मिज़ो नेशनल फ्रंट ने अपने संगठनात्मक चुनावों को टालने का फैसला किया है। अब पार्टी के आंतरिक चुनाव वर्ष 2028 में होने वाले मिज़ोरम विधानसभा चुनावों के बाद आयोजित किए जाएंगे। मिज़ो नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने आइजोल में आयोजित एक राजनीतिक सत्र के दौरान यह घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के शीर्ष संगठन में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी भी दी। पार्टी के सांगठनिक चुनाव मूल रूप से अगले साल होने तय थे, लेकिन नेतृत्व ने इस व्यवस्था को बदलने का निर्णय लिया है।
शीर्ष नेतृत्व का पुनर्गठन और नई जिम्मेदारियां
चुनावी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के कारण की व्याख्या करते हुए जोरमथांगा ने कहा कि यह फैसला मिज़ो नेशनल फ्रंट की स्थापित परंपरा के अनुरूप है। पार्टी में लंबे समय से विधानसभा चुनावों के ठीक पहले संगठन चुनाव कराने के बजाय चुनाव संपन्न होने के बाद ही सांगठनिक प्रक्रिया पूरी करने का नियम रहा है। वर्ष 2028 के बाद होने वाले इस सांगठनिक अभ्यास में नए पदाधिकारियों का चुनाव किया जाएगा। इसके तहत महासचिवों, सचिवों और पार्टी के विभिन्न अग्रिम संगठनों के प्रमुखों सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां और चुनाव पूरे किए जाएंगे।
संगठनात्मक चुनावों की घोषणा के साथ ही जोरमथांगा ने पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व में तत्काल प्रभाव से फेरबदल की भी घोषणा की। मिज़ो नेशनल फ्रंट के संविधान के तहत पार्टी अध्यक्ष को मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री तानलुइया को वर्किंग प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया है। इसके अलावा पूर्व गृह मंत्री लालछमलियाना और पूर्व विधायक डी थंगलियाना को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया है। जोरमथांगा ने कहा कि इन नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य पार्टी के कामकाज को बेहतर बनाना और इसके संगठनात्मक ढांचे को अधिक मजबूत करना है।
विपक्षी दलों पर संगठनात्मक चुनावों को लेकर निशाना
आइजोल में आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए मिज़ो नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष ने राज्य की विपक्षी राजनीतिक पार्टियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सत्ताधारी ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दोनों ही दलों ने आंतरिक सांगठनिक चुनावों से दूरी बना रखी है। जोरमथांगा ने दावा किया कि ये पार्टियां लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराने के बजाय अपने पसंदीदा लोगों को सीधे तौर पर मुख्य पदों पर नियुक्त कर देती हैं।
1986 के ऐतिहासिक मिज़ोरम शांति समझौते पर राजनीतिक घमासान
पूर्व मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने वर्ष 1986 के ऐतिहासिक मिज़ोरम शांति समझौते पर दिए गए बयानों को लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री लालदुहोमा की भी तीखी आलोचना की। जोरमथांगा ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने अतीत में भी इस ऐतिहासिक समझौते के महत्व को कम करने का प्रयास किया था, लेकिन मिज़ोरम की जनता ने ऐसे सभी प्रयासों को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि लालदुहोमा मिज़ो नेशनल फ्रंट को कमजोर करने की नीयत से समझौते पर मौजूद हस्ताक्षरों पर सवाल उठा रहे हैं और गलत बयानबाजी कर रहे हैं।
समझौते से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करते हुए जोरमथांगा ने बताया कि 1986 का यह शांति समझौता केंद्र सरकार की ओर से तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव आरडी प्रधान, मिज़ोरम सरकार की तरफ से तत्कालीन मुख्य सचिव लालखामा और मिज़ो नेशनल फ्रंट की ओर से तत्कालीन नेता लालडेंगा द्वारा औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक दस्तावेज की मूल प्रति आज भी पूरी तरह सुरक्षित और उपलब्ध है।
इस समझौते के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए जोरमथांगा ने वर्ष 2006 में मनाए गए शांति समझौते के वर्षगांठ समारोह को याद किया। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के उस समय को याद करते हुए उन्होंने बताया कि आइजोल में आयोजित इस कार्यक्रम के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल को आमंत्रित किया गया था, और दोनों नेताओं ने लिखित में इसके जवाब भेजे थे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और लालडेंगा के दौर में हुए इस समझौते को सबसे सफल शांति समझौतों में से एक बताते हुए जोरमथांगा ने कहा कि इसी समझौते ने राज्य में विकास की नींव रखी थी। इसके अलावा उन्होंने शांति प्रक्रिया में हर स्तर पर शामिल रहने के लालदुहोमा के दावे को खारिज करते हुए कहा कि लालदुहोमा उन वार्ताओं में किसी प्रमुख भूमिका में नहीं थे।



















