मणिपुर में पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन से जुड़े चालकों ने अपनी हड़ताल को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। यह कदम राज्य के मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह द्वारा चालकों को सुरक्षा का भरोसा देने और ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए कर्मियों के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा करने के बाद उठाया गया है। इस फैसले से राज्य में आवश्यक ईंधन की आपूर्ति बाधित होने का खतरा टल गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
आपूर्ति सेवाओं की बहाली और रूट योजना
हड़ताल खत्म होने की घोषणा के बाद चालकों ने जानकारी दी कि वे मालोम डिपो से पेट्रोल और डीजल की लोडिंग का काम फिर से शुरू करेंगे। इसके साथ ही सेकमाई बॉटलिंग प्लांट से LPG की लोडिंग का काम भी दोबारा शुरू किया जा रहा है। चालक अब जिरीबाम से इंफाल तक इन आवश्यक पेट्रोलियम उत्पादों से लदे वाहनों का परिवहन फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने से राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में ईंधन की कमी दूर हो सकेगी।
खाली काफिले पर फैसला और आगामी बैठक
हालांकि, यह हड़ताल पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। पेट्रोलियम टैंकरों और LPG बुलेट वाहनों के चालकों ने फैसला किया है कि वे तब तक खाली काफिले में शामिल नहीं होंगे, जब तक कि मुख्यमंत्री और अन्य संबंधित पक्षों के साथ उनकी बैठक नहीं हो जाती। चालकों के अनुसार, यह महत्वपूर्ण बैठक 15 सितंबर या उससे पहले होने की संभावना है। इस बैठक में सुरक्षा चिंताओं और उनके अन्य लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिसके बाद ही खाली वाहनों की आवाजाही पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सुरक्षा चिंताओं के कारण थमे थे पहिए
यह विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवश्यक वस्तुओं का परिवहन करने वाले चालकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण शुरू हुआ था। असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर चालकों ने अपनी सुरक्षा की गारंटी के लिए सड़कों से दूरी बना ली थी। एक आधिकारिक बयान में, चालकों के संगठन ने मुख्यमंत्री द्वारा गंभीर रूप से घायल सहयोगियों के लिए घोषित वित्तीय मुआवजे और आश्वासनों की सराहना की है।
जनता से माफी और सुरक्षा की अपील
हड़ताल के दौरान आम लोगों को हुई असुविधा के लिए चालकों ने खेद व्यक्त किया है। उन्होंने इस कठिन समय में सहयोग देने के लिए जनता और विभिन्न सामाजिक समूहों का आभार जताया। इसके साथ ही, चालकों ने मणिपुर की सभी समितियों और समुदायों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय राजमार्गों पर भविष्य में होने वाले किसी भी विरोध प्रदर्शन, बंद या नाकेबंदी के दौरान आवश्यक वस्तुओं का परिवहन करने वाले वाहनों को निशाना न बनाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चालक और आवश्यक वस्तुएं किसी एक समुदाय की नहीं बल्कि सभी की होती हैं, इसलिए उन्हें इन विवादों से दूर रखा जाना चाहिए।



















