सवाईमाधोपुर के ऐतिहासिक रणथंभौर दुर्ग में स्थापित भगवान त्रिनेत्र गणेश के दरबार में इन दिनों आस्था का एक अनुपम और अलौकिक दृश्य दिखाई दे रहा है। सुप्रसिद्ध लक्खी मेले की शुरुआत के साथ ही यहाँ श्रद्धालुओं का एक विशाल सैलाब उमड़ पड़ा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लाखों भक्त भगवान गणेश के दर्शन के लिए आतुर दिखाई दे रहे हैं। मंदिर में शीश नवाकर श्रद्धालु अपने प्रियजनों और परिवार की सुख, शांति, समृद्धि तथा जीवन में खुशहाली की मन्नतें मांग रहे हैं। मेले को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह और उमंग का माहौल है। पूरे रणथंभौर वन क्षेत्र में सुबह से लेकर देर रात तक केवल गणपति बप्पा के जयकारे ही सुनाई दे रहे हैं, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्ति के रस में डूब गया है।
पथरीली और दुर्गम चढ़ाई पर भी अडिग भक्तों के कदम
श्रद्धालुओं की इस पावन यात्रा का मुख्य बिंदु रणथंभौर सर्किल से शुरू होता है। यहाँ से मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 14 किलोमीटर की दूरी भक्तों को पैदल ही तय करनी पड़ती है। रणथंभौर दुर्ग की चढ़ाई बेहद कठिन, पथरीली और घुमावदार रास्तों से होकर गुजरती है, लेकिन भक्तों की अटूट आस्था के सामने यह दुर्गम रास्ता भी बेहद आसान नजर आ रहा है। इस पैदल यात्रा में छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष भी भारी उत्साह के साथ आगे बढ़ रहे हैं। रास्ते भर बजने वाले भजनों और भक्तों द्वारा लगाए जाने वाले गगनभेदी जयकारों से पूरा वन क्षेत्र गुंजायमान हो रहा है। पैरों में छाले होने के बावजूद भक्तों के चेहरों पर थकान की जगह केवल भक्ति का तेज दिखाई दे रहा है।
भंडारों में सेवा भाव और सुगम यातायात के पुख्ता प्रबंध
पैदल चलने वाले यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सेवाभावी लोगों ने पूरे मार्ग में जगह-जगह पर विशाल भंडारे स्थापित किए हैं। इन सेवा शिविरों में आने वाले भक्तों को आदरपूर्वक बुलाकर विभिन्न प्रकार के भोजन, प्रसादी, फल और जलपान का वितरण किया जा रहा है। भंडारा संचालकों द्वारा भक्तों की बहुत ही प्रेमपूर्वक और सेवा भाव से मनुहार की जा रही है। भीषण गर्मी और थकान से राहत देने के लिए कई स्थानों पर शीतल पेयजल और चिकित्सा सहायता की भी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए यातायात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने विशेष योजना तैयार की है। परिवहन विभाग ने इस मेले के लिए चार दर्जन से अधिक रोडवेज बसों को विशेष ड्यूटी पर लगाया है, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों से आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को सुगम परिवहन सेवा मिल सके।
सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम और चतुर्थी पर स्वर्ण श्रृंगार की तैयारी
मेले के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे देखते हुए व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालने के लिए लगभग 1250 पुलिसकर्मियों की तैनाती मेला क्षेत्र और पैदल मार्गों पर की गई है। किसी भी अप्रिय घटना या भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारी लगातार गश्त कर रहे हैं। इसके साथ ही, रास्ते में आने वाले विभिन्न जलाशयों और वाटर पॉइंट्स पर सुरक्षा की दृष्टि से प्रशिक्षित गोताखोरों को तैनात किया गया है ताकि पानी से जुड़े हादसों को रोका जा सके। इस पावन मेले का मुख्य आकर्षण चतुर्थी के दिन होने वाला विशेष आयोजन होगा। इस शुभ दिन पर भगवान त्रिनेत्र गणेश का बहुमूल्य स्वर्ण आभूषणों से मनमोहक और अलौकिक श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद विशेष मंत्रोच्चार के साथ महाआरती का आयोजन होगा और बप्पा को एक हजार लड्डुओं का महाभोग अर्पित किया जाएगा। मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन ने इस मुख्य दिन पर आने वाले लाखों भक्तों के सुगम दर्शन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।


















