मणिपुर में तनावपूर्ण माहौल के बीच नागा समुदायों की प्रमुख संस्था ने मुख्यमंत्री के एक तय कार्यक्रम को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया है। जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल मणिपुर की वर्किंग कमेटी ने नागा समुदायों से अपील की है कि वे मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के आगामी 12 सितंबर को होने वाले लुअंगकाओ गांव के दौरे का पूर्ण रूप से बहिष्कार करें। इस विरोध के पीछे मुख्य वजह छह लियांगमाई नागा पुरुषों की हत्या के मामले में न्याय न मिलना बताई जा रही है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों और संगठनों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
प्रस्तावित दौरे और संग्रहालय के निरीक्षण पर आपत्ति
समिति का कहना है कि मुख्यमंत्री का यह पहला दौरा और लुअंगकाओ गांव की यात्रा, जिसमें रानी गाइदिनलिउ ट्राइबल फ्रीडम फाइटर्स म्यूजियम के विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी शामिल है, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बिल्कुल उचित नहीं है। संगठन का मानना है कि जब तक इस संवेदनशील मामले में पीड़ितों के परिवारों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक इस तरह के आधिकारिक दौरों और कार्यक्रमों से बचा जाना चाहिए।
हत्याकांड के 119 दिन बीते, शव अभी भी मोर्चरी में
वर्किंग कमेटी ने एक बयान जारी कर यह भी स्पष्ट किया है कि 13 मई को लेइलोन वाइपेई गांव में छह लियांगमाई नागा पुरुषों का कथित तौर पर अपहरण कर उनकी हत्या किए जाने की घटना को 119 दिन बीत चुके हैं। समिति का दावा है कि इस सनसनीखेज मामले में अब तक न तो किसी की गिरफ्तारी हुई है और न ही जांच किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंच पाई है। इसके अलावा, इन सभी छह मृतकों के शव अभी भी इम्फाल के जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान यानी JNIMS की मोर्चरी में लावारिस पड़े हैं और उनके परिवार वाले अंतिम संस्कार के इंतजार में हैं।
सरकारी कार्यक्रमों को बताया नागा समाज का अपमान
हालांकि समिति ने स्वतंत्रता सेनानी रानी गाइदिनलिउ के प्रति अपना पूरा सम्मान व्यक्त किया है, लेकिन साथ ही यह भी जोर देकर कहा है कि नागा बहुल इलाकों में किसी भी प्रकार का आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित करने से पहले सरकार को पीड़ितों के परिवारों को न्याय दिलाना होगा। समिति ने अपने बयान में कड़े शब्दों में कहा है कि इस गंभीर पृष्ठभूमि के बीच, चाहे वह रानी गाइदिनलिउ को सम्मान देने का मामला हो या विकास परियोजनाओं की समीक्षा का, नागा क्षेत्रों में कोई भी जनसंपर्क अभियान तब तक नहीं चलाया जाना चाहिए जब तक कि उनके छह बेटों के खून का हिसाब नहीं मिल जाता। संगठन ने इसे नागाओं और मृतकों का अपमान करार दिया है।
सरकारी अधिकारियों से दूरी बनाने की अपील
इस विरोध प्रदर्शन को और व्यापक बनाते हुए समिति ने क्षेत्र के सभी नागा नेताओं, ग्राम प्राधिकरणों और सिविल सोसायटी संगठनों से भी एक सख्त अपील की है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे सरकारी अधिकारियों के साथ विकास परियोजनाओं, राहत सहायता या किसी भी तरह की राजनीतिक बातचीत से जुड़ी बैठकों से पूरी तरह दूर रहें। संगठन का यह रुख तब तक जारी रहने की बात कही गई है जब तक कि सभी नागा समुदायों के व्यापक हितों पर सामूहिक रूप से विचार-विमर्श न कर लिया जाए और उनका सही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित न हो जाए।
सामूहिक जनादेश के बिना बातचीत पर रोक
वर्किंग कमेटी ने अपनी बात को दोहराते हुए साफ कर दिया है कि जनता के व्यापक हितों को ताक पर रखकर कोई भी व्यक्तिगत या समूह स्तर पर बातचीत नहीं की जाएगी। बयान में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि जब तक लोगों का सामूहिक जनादेश प्राप्त नहीं होता, तब तक कोई भी व्यक्ति या समूह नागाओं की तरफ से बोलने का अधिकार नहीं रखता है। इस चेतावनी के बाद राज्य सरकार और स्थानीय नागा निकायों के बीच तनातनी और बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं।





















