अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में सोमवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ी बढ़त दर्ज करते हुए 1.3240 के स्तर के पास दस्तक दी। हालांकि इस मामूली उछाल के बावजूद चार्ट पर व्यापक तकनीकी रुझान अब भी मंदी की ओर इशारा कर रहा है। 100-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज यानी एसएमए से नीचे बने रहने के कारण पाउंड पर लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है, जबकि 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स भी 41 के आसपास रहते हुए कमजोर मोमेंटम का संकेत दे रहा है। वर्तमान लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार यह जोड़ी 1.32 पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 0.11 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्शाती है।
चार्ट पर मंदी का दबाव और अहम तकनीकी सीमाएं
दैनिक मूल्य चार्ट के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि पाउंड और डॉलर की जोड़ी निकट अवधि में नकारात्मक दायरे में फंसी हुई है। हाजिर भाव 20-दिवसीय एसएमए और लंबी अवधि के 100-दिवसीय एसएमए दोनों से नीचे अटका हुआ है। इसके साथ ही यह अपने बोलिंजर बैंड के निचले हिस्से में सीमित दायरे में घूम रहा है। लाइव तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक 50-दिवसीय ईएमए 1.34 और 200-दिवसीय ईएमए 1.34 के स्तर पर डेथ क्रॉस जैसी संरचना प्रदर्शित कर रहे हैं, जो लंबी अवधि के डाउनट्रेंड को दर्शाती है। 14-दिवसीय आरएसआई लगभग 41 के स्तर पर 50 की तटस्थ मध्य रेखा से काफी नीचे है, जिससे साफ है कि बाजार में किसी भी तेजी के प्रयास की तुलना में गिरावट का दबाव कहीं अधिक हावी है।
ऊपर की ओर पहला बड़ा प्रतिरोध 20-दिवसीय बोलिंजर मिडल बैंड पर 1.3280 के स्तर पर मौजूद है। लाइव डेटा में दैनिक पिवट 1.32 पर स्थित है, जबकि आर1 और आर2 प्रतिरोध 1.33 पर दिखाई दे रहे हैं। यदि खरीदार इस बाधा को निर्णायक रूप से पार करने में सफल रहते हैं, तो भाव 100-दिवसीय एसएमए के करीब 1.3400 तक जा सकते हैं। इसके बाद बोलिंजर बैंड की ऊपरी सीमा 1.3432 के पास स्थित है, जो किसी भी बड़े उछाल के लिए मजबूत छत का काम करेगी। दूसरी ओर, गिरावट की स्थिति में 1 अक्टूबर का निचला स्तर 1.3180 पहला बड़ा सहारा है। यदि बिकवाली तेज होती है, तो बोलिंजर बैंड की निचली सीमा 1.3130 तक रास्ता खुल सकता है, जिससे मौजूदा सुधारात्मक चरण और गहरा सकता है। 52 हफ्तों का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच फैला है, जबकि 14-दिवसीय एटीआर 0.01 पर दर्ज हुआ है।
रियाद हवाई अड्डे पर हमला और कच्चे तेल में उछाल का डॉलर पर असर
मध्य पूर्व में भड़के नए भू-राजनीतिक तनाव ने भी विदेशी मुद्रा बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के अनुसार रविवार को रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक पैसेंजर टर्मिनल पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल आकर गिरा। इस हमले की जिम्मेदारी तुरंत हूती विद्रोहियों ने अपने ऊपर लेते हुए इसे सऊदी आक्रामकता का जवाब बताया। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के विश्लेषकों ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की ऊर्जा परिसंपत्तियों पर हमले जारी रहने की संभावना है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी डॉलर दोनों को मजबूती मिल सकती है। तेल की कीमतें चढ़ने और तनाव बढ़ने से डॉलर को सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर अतिरिक्त समर्थन प्राप्त हो रहा है, जिससे पाउंड की किसी भी बड़ी बढ़त पर लगाम लगी हुई है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दरों पर सख्त रुख और मुद्रा का परिदृश्य
ब्रिटेन में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर चल रही बहस भी मुद्रा के मूल्य निर्धारण में अहम भूमिका निभा रही है। बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीति निर्माता कैथरीन एल मान के भाषणों का विश्लेषण करने वाले इंडेक्स पर 9.4 का स्कोर दर्ज हुआ, जो उनके 8.1 के ऐतिहासिक औसत से कहीं अधिक आक्रामक रुख की पुष्टि करता है। मान का सख्त मानना है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड को बैंक दर में बढ़ोतरी करने की जरूरत है और वह मौद्रिक नीति का काम जोखिम प्रीमियम पर नहीं छोड़ सकता। उनका यह बयान साफ करता है कि वित्तीय स्थितियां सख्त होने के बावजूद वे नीति को और कड़ा करने के पक्ष में हैं।
दूसरी तरफ, बड़े वित्तीय संस्थानों के रुख में भी फेरबदल देखने को मिला है। कॉमर्जबैंक ने इस संदर्भ में स्पष्ट किया कि बाजार पहले से ही फरवरी तक दो अतिरिक्त ब्याज दर वृद्धियों को अपने मूल्य में शामिल कर चुका है, जिसके चलते उनके संशोधित अनुमान का बाजार पर तत्काल बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना कम है। बैंक ने आगे कहा कि वे पहले साल के अंत तक स्टर्लिंग में कमजोरी की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब आने वाले महीनों में यूरो और पाउंड की जोड़ी के मोटे तौर पर सीमित दायरे में बने रहने का अनुमान है।
स्टर्लिंग का ऐतिहासिक आधार और वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिति
ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी सक्रिय मुद्रा मानी जाती है, जिसका इतिहास वर्ष 886 ईस्वी से जुड़ा है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और वैश्विक विदेशी मुद्रा विनिमय में इसका चौथा सबसे बड़ा हिस्सा है। वर्ष 2022 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक मुद्रा विनिमय के कुल सौदों में पाउंड की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत रही है, जिसका औसत दैनिक कारोबार 630 अरब डॉलर का बैठता है।
पाउंड के सबसे प्रमुख व्यापारिक जोड़ों में जीबीपी/यूएसडी सबसे आगे है, जिसे बाजार के कारोबारी पारंपरिक रूप से 'केबल' के नाम से जानते हैं। यह अकेला जोड़ा कुल मुद्रा कारोबार का 11 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। इसके अलावा जीबीपी/जेपीवाई, जिसे ट्रेडर्स 'ड्रैगन' कहते हैं, 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जबकि यूरो और पाउंड की जोड़ी 2 प्रतिशत लेनदेन संभालती है। पाउंड स्टर्लिंग को जारी करने और उसकी स्थिरता बनाए रखने की जिम्मेदारी बैंक ऑफ इंग्लैंड की है।
केंद्रीय बैंक के फैसले, आर्थिक आंकड़े और व्यापार संतुलन की भूमिका
पाउंड स्टर्लिंग के विनिमय मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे निर्णायक तत्व बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। बैंक अपने नीतिगत निर्णय मुख्य रूप से लगभग 2 प्रतिशत की स्थिर मुद्रास्फीति हासिल करने के लक्ष्य के आधार पर लेता है। इस लक्ष्य को पाने का प्रमुख माध्यम ब्याज दरों में फेरबदल करना है। जब महंगाई दर बहुत अधिक हो जाती है, तो केंद्रीय बैंक उधारी को महंगा करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करता है। ऊंची ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती हैं, जिससे पाउंड मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब आर्थिक वृद्धि सुस्त पड़ती है और महंगाई काफी नीचे चली जाती है, तो बैंक दरों में कटौती कर निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
इसके साथ ही यूके की अर्थव्यवस्था से जुड़े वृहद आर्थिक आंकड़े भी मुद्रा के उतार-चढ़ाव को सीधे प्रभावित करते हैं। सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई तथा रोजगार के आंकड़े मुद्रा की दिशा तय करते हैं। एक मजबूत आर्थिक ढांचा न केवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाता है, बल्कि ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बढ़ाकर पाउंड को ताकत देता है। इसके अलावा व्यापार संतुलन का आंकड़ा भी बेहद महत्वपूर्ण है, जो निर्यात से होने वाली कमाई और आयात पर होने वाले खर्च के अंतर को मापता है। यदि किसी देश के निर्यात उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग होती है, तो उस मुद्रा का मूल्य स्वाभाविक रूप से बढ़ता है, जबकि नकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा पर दबाव बनाता है।
वैश्विक मुद्राओं, सोने और क्रिप्टो बाजार में हलचल
विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य जोड़ों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी ने सोमवार को शुरुआती मंदी के अंतर को पाट लिया, लेकिन एशियाई सत्र में छुट्टी के चलते कम तरलता के बीच यह 0.7000 के स्तर से नीचे ही बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बहु-वर्षीय उच्च स्तर से आई नरमी के बावजूद डॉलर ने वापसी की कोशिश की, जबकि नवंबर में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की कम होती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित रखा।
उधर डॉलर और जापानी येन की जोड़ी नए कारोबारी सप्ताह में भी सीमित दायरे में रही और 158.00 के ऊपर कारोबार करती दिखी। जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए संभावित हस्तक्षेप की अटकलों के बीच खरीदार सतर्क हैं। दूसरी ओर, सोना सोमवार को अपने दो महीने के निचले स्तर 4,067 डॉलर से सुधार जारी रखते हुए 4,200 डॉलर के स्तर से ऊपर टिके रहने की कोशिश करता दिखा, क्योंकि अमेरिकी डॉलर 18 महीने के शिखर से पीछे हटने के बाद स्थिर हो गया है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कार्डानो ने पिछले सप्ताह दर्ज की गई 2.85 प्रतिशत की गिरावट के बाद सोमवार को अपने प्रमुख समर्थन क्षेत्र के ऊपर दोबारा कदम रखा। डेरिवेटिव्स बाजार में बेहतर स्थिति और मजबूत तकनीकी परिदृश्य के चलते एडीए में सुधार को बल मिला है। कॉइनग्लास के आंकड़ों के अनुसार कार्डानो के लिए लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात सोमवार को 1.01 पर पहुंच गया, जो सकारात्मक रुझान को दिखाता है। वहीं भारतीय रुपये की बात करें तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा डॉलर की मांग को रोकने के नए उपायों के चलते रुपये ने मजबूती के साथ शुरुआत की। डॉलर के मुकाबले रुपया 1 प्रतिशत चढ़कर 95.80 के करीब पहुंच गया, जिससे घरेलू मुद्रा को बड़ी राहत मिली है।






















