देश भर में मेडिकल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर होने वाले खर्च में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद दवा निर्माण के क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डॉ रेड्डीज को शेयर बाजार में एक तगड़े झटके का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी द्वारा अपने हालिया तिमाही नतीजों की घोषणा करते ही निवेशकों का सारा उत्साह और भरोसा पल भर में ही ठंडा पड़ गया। नतीजों से फैली भारी निराशा का सीधा असर कंपनी के शेयरों पर पड़ा है, जो देखते ही देखते गोता लगाने लगे और 52-सप्ताह के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए।
शेयरों में हावी हुआ बिकवाली का दबाव
शेयर बाजार में 23 जुलाई का कारोबारी दिन इस फार्मा कंपनी के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुआ। इस दिन सुबह से ही डॉ रेड्डीज के शेयरों पर बिकवाली का भारी दबाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा था। सुबह 10.27 बजे तक हालात इस कदर बिगड़ गए कि कंपनी के शेयर 2.83 फीसदी की तेज गिरावट के साथ 1,150 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहे थे। शेयरों में आई इस अचानक और तेज गिरावट ने निवेशकों को सकते में डाल दिया है। शेयर का यह स्तर इसके 52-सप्ताह का सबसे निचला स्तर है, जो यह दर्शाता है कि बाजार में इस कंपनी को लेकर नकारात्मक धारणा कितनी गहरी हो चुकी है। जिन निवेशकों ने लंबी अवधि के मुनाफे की उम्मीद में इस कंपनी में अपना पैसा लगाया था, उन्हें इस भारी बिकवाली के कारण अपने पोर्टफोलियो में बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
तिमाही नतीजों के आंकड़ों ने किया निराश
शेयरों में आई इस सुनामी का मुख्य कारण डॉ रेड्डीज के अप्रैल-जून के वित्तीय नतीजे हैं, जो बाजार के अनुमानों से काफी पीछे छूट गए हैं। कंपनी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में मुनाफे में भारी सेंध लगी है। पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले कंपनी का शुद्ध मुनाफा 68.71 फीसदी की भारी गिरावट के साथ महज 443.5 करोड़ रुपये पर आ सिमटा है। गौरतलब है कि 2026 की पहली तिमाही में कंपनी ने 1,417.8 करोड़ रुपये का शानदार मुनाफा दर्ज किया था, जिसके सामने मौजूदा आंकड़े बेहद कमजोर नजर आते हैं। केवल मुनाफा ही नहीं, बल्कि कंपनी की आय भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। 30 जून को समाप्त हुई पहली तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में भी 5.55 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जो घटकर 8,070.5 करोड़ रुपये रह गया है। इसके अलावा, टैक्स चुकाने से पहले का प्रॉफिट (प्री-टैक्स प्रॉफिट) भी सालाना आधार पर 70.98 फीसदी का गोता लगाते हुए 552.6 करोड़ रुपये पर आ गया है।
विदेशी ब्रोकरेज हाउसों ने बदला अपना रुख
इन कमजोर नतीजों के बाद, कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज कंपनियों ने भी डॉ रेड्डीज के शेयरों को लेकर अपना नजरिया बदल लिया है और टार्गेट प्राइस में कटौती की है। ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस सीएलएसए का अनुमान है कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव का असर कंपनी के कारोबार पर पड़ेगा और शेयरों पर दबाव जारी रहेगा। इसके चलते सीएलएसए ने इसका टार्गेट प्राइस 1,240 रुपये तय किया है। जेपी मॉर्गन ने भी कंपनी के शेयरों पर अपना भरोसा कम करते हुए इसका टार्गेट प्राइस घटाकर 1,100 रुपये कर दिया है। जेफरीज का नजरिया भी काफी नकारात्मक है; उसका मानना है कि डॉ रेड्डीज के शेयर आने वाले समय में और भी कमजोर प्रदर्शन करेंगे। जेफरीज के अनुसार, कई कारणों से कंपनी के मार्जिन में कमी आ सकती है। इसके साथ ही, सिटी ब्रोकरेज ने भी इस कंपनी के शेयरों का टार्गेट प्राइस काफी घटाकर 1,040 रुपये कर दिया है। वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका ने भी अपने पहले के 1,500 रुपये के टार्गेट प्राइस को घटाकर 1,480 रुपये कर दिया है।
घरेलू ब्रोकरेज कंपनियों की भविष्यवाणियां
विदेशी ब्रोकरेज की तरह ही, घरेलू बाजार के विश्लेषक भी इस कंपनी के भविष्य को लेकर काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल ने कंपनी के शेयरों को लेकर अपना न्यूट्रल रुख तो बरकरार रखा है, लेकिन उन्होंने टार्गेट प्राइस को 1,125 रुपये पर सेट कर दिया है। इसके साथ ही, मोतीलाल ओसवाल ने यह भी अनुमान लगाया है कि आने वाले समय में कंपनी की कुल कमाई में 2 से 3 फीसदी की और कमी देखने को मिल सकती है। एक अन्य प्रमुख घरेलू ब्रोकरेज हाउस इलारा कैपिटल ने भी डॉ रेड्डीज का टार्गेट प्राइस पहले के मुकाबले घटा दिया है। पहले उन्होंने 1,283 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया था, जिसे अब घटाकर 1,222 रुपये कर दिया गया है। ब्रोकरेज ने एक लंबी अवधि का चौंकाने वाला अनुमान भी पेश किया है, जिसके अनुसार साल 2029 तक कंपनी की कमाई में 7 से 29 फीसदी तक की बड़ी गिरावट आ सकती है।
निवेशकों को लगातार हो रहा है भारी नुकसान
अगर हम कंपनी के शेयरों के पुराने रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो पता चलता है कि इसने लंबे समय से निवेशकों को निराश ही किया है। बीते तीन साल के प्रदर्शन को देखें, तो डॉ रेड्डीज ने अपने निवेशकों को महज 9 फीसदी के आसपास का ही रिटर्न दिया है, जो शेयर बाजार के लिहाज से बहुत कम माना जाता है। छोटी अवधि के आंकड़े और भी डराने वाले हैं। बीते एक साल में इस शेयर में 7.41 फीसदी की गिरावट आ चुकी है, जबकि सालाना आधार पर यह 9.22 फीसदी टूट चुका है। पिछले तीन महीने का आंकड़ा देखें, तो निवेशकों का पैसा 13.39 फीसदी डूब चुका है। यह गिरावट लगातार जारी है; केवल एक महीने में कंपनी के शेयर 11 फीसदी से ज्यादा गिर चुके हैं और पिछले एक सप्ताह के भीतर ही इनमें 5.83 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों का भरोसा पूरी तरह से डगमगा गया है।


















