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अमेरिकी बाज़ार में इंफोसिस और विप्रो लुढ़के, एनवीडिया-एप्पल जैसी टेक कंपनियों ने भरी उड़ानबाज़ार
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अमेरिकी बाज़ार में इंफोसिस और विप्रो लुढ़के, एनवीडिया-एप्पल जैसी टेक कंपनियों ने भरी उड़ान

बीते साल अमेरिका में लिस्टेड ज़्यादातर भारतीय ADR फिसले, इंफोसिस और विप्रो को दहाई अंकों का नुकसान हुआ, जबकि एनवीडिया, अल्फाबेट और एप्पल चढ़े। बैंकिंग शेयरों और डॉ. रेड्डीज ने दबाव और बढ़ाया।

बीते एक साल में अमेरिका में ADR के रूप में कारोबार करने वाली ज़्यादातर भारतीय कंपनियों के शेयर नीचे की ओर फिसले हैं, और इस गिरावट की अगुवाई टेक्नोलॉजी कंपनियों ने की। आईटी सेवाओं की मांग कमज़ोर बनी रहने की वजह से इंफोसिस और विप्रो दोनों ने पूरे साल में दहाई अंकों का नुकसान झेला। दूसरी तरफ अमेरिकी टेक दिग्गजों की तस्वीर बिल्कुल अलग रही, इसी अवधि में एनवीडिया, अल्फाबेट और एप्पल के शेयरों ने अच्छी बढ़त दर्ज की।

कमज़ोर मांग और IBM के झटके से पिटे आईटी शेयर

ग्लोबल टेक्नोलॉजी खर्च में आई सुस्ती का सीधा असर भारतीय सॉफ्टवेयर निर्यातकों पर पड़ा, और IBM के शेयरों में तेज़ गिरावट ने हालात और बिगाड़ दिए। दूसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद से कमज़ोर रहने के बाद IBM का शेयर 25.5% टूट गया, और इसकी मार भारतीय आईटी ADR पर भी पड़ी, क्योंकि निवेशक इन्हें एक ही बड़े दांव का हिस्सा मानते हैं। ऑर्डर बुक पर दबाव और ग्राहकों के हाथ खींचने के बीच बाज़ार ने इन शेयरों को कोई रियायत नहीं दी।

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बैंकिंग शेयरों ने भी नहीं दिया सहारा

बैंकिंग सेक्टर से भी कोई राहत नहीं मिली। सबसे ज़्यादा नज़र रखे जाने वाले दो भारतीय बैंकिंग ADR, यानी एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक, दोनों पूरे साल कमज़ोर प्रदर्शन करते रहे। आईटी की सुस्ती के साथ मिलकर इसका नतीजा यह हुआ कि अमेरिकी बाज़ार में लिस्टेड कई भारतीय शेयरों को लेकर निवेशकों का भरोसा कमज़ोर पड़ गया।

छह लिस्टिंग, बिखरी हुई तस्वीर

अमेरिका में कुल छह भारतीय ADR कारोबार करते हैं, और बीते साल इनमें से ज़्यादातर की तस्वीर नकारात्मक ही रही। NYSE पर लिस्टेड टाटा मोटर्स के आंकड़े उपलब्ध नहीं हो सके, जिससे कुल हिसाब में एक छोटा-सा अंतर रह गया।

घरेलू बाज़ार में गिरावट क्यों कम दिखी

एक बात बार-बार सामने आई, भारत में इन्हीं कंपनियों के शेयरों की गिरावट अमेरिका में लिस्टेड ADR के मुकाबले आमतौर पर कम रही। ऐसा अंतर तब दिखता है जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होता है, क्योंकि करेंसी में उतार-चढ़ाव से डॉलर में निवेश करने वाले के लिए वही कंपनी अलग नज़र आती है। इसके अलावा हर एक्सचेंज पर कारोबार के घंटे, लिक्विडिटी और निवेशकों का मूड भी अलग होता है। कुछ उतार-चढ़ाव बेहद कम समय के रहे, जैसे अमेरिका-ईरान समझौते की चर्चा से आई हल्की तेज़ी।

डॉ. रेड्डीज पर टिकीं नज़रें

नतीजों और प्रोडक्ट से जुड़ी कई अपडेट के बाद डॉ. रेड्डीज पर निवेशकों की नज़रें खास तौर पर टिक गईं। कंपनी ने API से जुड़ी एक दिक्कत के चलते अपने जेनेरिक सेमाग्लूटाइड की कमर्शियल सप्लाई कुछ समय के लिए रोक दी। इतना ही नहीं, टोरेंट फार्मास्युटिकल्स ने डॉ. रेड्डीज के बनाए सेमालिक्स इंजेक्शन पेन के चुनिंदा बैच वापस मंगा लिए। इन दोनों घटनाओं का असर घरेलू बाज़ार में भी कंपनी के शेयरों पर पड़ा।

दो बाज़ार, दो अलग कहानियां

भारत में टाटा मोटर्स एक चमकता नाम रहा और सीमित ADR मौजूदगी के बावजूद इसने सकारात्मक प्रदर्शन किया। यही अंतर पूरी कहानी को समेट देता है। वॉल स्ट्रीट पर कीमतों में ग्लोबल अनिश्चितता और सेक्टर की मुश्किलें झलकीं, जबकि दलाल स्ट्रीट पर कारोबार मिलेजुले संकेत देता रहा, जिसे स्थानीय निवेशकों की भागीदारी और करेंसी से जुड़े कारकों का सहारा मिला। कुल मिलाकर भारतीय ADR की तस्वीर इस बात पर निर्भर रही कि आप किस बाज़ार से उसे देख रहे हैं।

सवाल-जवाब

किन भारतीय ADR में सबसे ज़्यादा गिरावट रही?
इंफोसिस और विप्रो ने बीते साल दहाई अंकों का नकारात्मक रिटर्न दिया।
IBM का शेयर कितना गिरा?
दूसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद से कमज़ोर रहने के बाद IBM का शेयर 25.5% टूटा।
किन अमेरिकी टेक कंपनियों के शेयर चढ़े?
इसी अवधि में एनवीडिया, अल्फाबेट और एप्पल के शेयरों ने बढ़त दर्ज की।
अमेरिका में कितने भारतीय ADR लिस्टेड हैं?
अमेरिका में कुल छह भारतीय ADR कारोबार करते हैं।
डॉ. रेड्डीज के शेयरों पर दबाव क्यों बढ़ा?
कंपनी ने API की दिक्कत के चलते जेनेरिक सेमाग्लूटाइड की कमर्शियल सप्लाई रोकी, और टोरेंट फार्मास्युटिकल्स ने उसके बनाए सेमालिक्स इंजेक्शन पेन के चुनिंदा बैच वापस मंगाए।
भारत में कौन-सा शेयर बेहतर प्रदर्शन करता रहा?
घरेलू बाज़ार में टाटा मोटर्स सकारात्मक प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा।
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