अमरीकी 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में 2007 के बाद की सबसे बड़ी तेजी से वैश्विक बाजारों में मचा हड़कंपअमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक फैसले से डॉलर सूचकांक में गिरावट, स्कॉशियाबैंक ने दी डिबेसमेंट ट्रेड की चेतावनीग्लोबल फ्लैश PMI आंकड़ों से पहले अमेरिकी डॉलर में मजबूती, बांड यील्ड और कच्चे तेल में उछालफिलाडेल्फिया फेड के 40 साल के रिकॉर्ड आउटलुक के बाद भी डाउ जॉन्स में भारी गिरावट और बॉन्ड यील्ड में उछालइंस्टाग्राम रील्स को वायरल करने का नया तरीका, एल्गोरिदम और रिटेंशन से बढ़ेगी रीचक्लैरिटी एक्ट पर देरी के बीच सीएफटीसी तैयार कर रहा है स्वतंत्र क्रिप्टो नियम, बिटकॉइन 70000 डॉलर के पारदिल्ली मुंबई समेत कई शहरों में 21 अगस्त को महंगा हुआ सोना, 24K, 22K और 18K के देखें ताजा भावफेड अधिकारियों के बयानों और ट्रेजरी बायबैक से डॉलर इंडेक्स में हलचल, 98.50 का निचला स्तर छूने के बाद रिकवरीमूलांक 3 राशिफल 21 अगस्त 2026: बहस से बचकर सुनें दूसरों की बात, तरक्की के नए रास्ते खोलेंगे ये मौकेअभावों को पछाड़कर भारतीय महिला हॉकी टीम की कमान संभालने वाली सलीमा टेटे की पूरी कहानी
युद्ध का जोश और खरीदार, दोनों गायब: क्रूड ऑयल फिर फरवरी वाले स्तर पर लौटाबाज़ार
7 जुल॰ 2026, 12:37 am (45 दिन पहले)· 2

युद्ध का जोश और खरीदार, दोनों गायब: क्रूड ऑयल फिर फरवरी वाले स्तर पर लौटा

वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बनी अंतरिम सहमति के बाद क्रूड ऑयल ने युद्ध का पूरा प्रीमियम गंवा दिया है। ओपेक+ के बढ़ते कोटा, भरते भंडार और स्टोरेज को फायदेमंद बनाती वायदा कीमतों के बीच बाजार का रुझान मंदी की तरफ है।

CLSMA20 SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण6 जुलाई 2026

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

CL का RSI 29 है।

आगे संभावित चाल

30 के ऊपर वापसी उछाल की पुष्टि करती है।

स्टोकैस्टिकStochastic Oscillator (14,3)

यह क्या है

Stochastic बंद भाव की तुलना उसके हालिया दायरे से करता है। 80 के ऊपर ओवरबॉट, 20 के नीचे ओवरसोल्ड; इन छोरों के पास तेज़ रेखा और सिग्नल रेखा का क्रॉसओवर पलटाव का शुरुआती संकेत है।

अभी यह कहाँ है

CL की फास्ट लाइन / सिग्नल लाइन 10/7 पर है।

आगे संभावित चाल

फास्ट लाइन का सिग्नल लाइन के ऊपर वापस क्रॉस होना शुरुआती खरीद संकेत है।

तीन महीने के युद्ध ने तेल की कीमतों में जो उछाल भरा था, उसे बाजार ने महज तीन हफ्तों में पूरी तरह निकाल फेंका है। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) अब उसी जगह पर आ खड़ा हुआ है जहां वह फरवरी में था, मानो बीच का सारा तूफान कभी आया ही न हो। ताजा लाइव आंकड़ों के मुताबिक क्रूड ऑयल फिलहाल 68.56 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 68.69 डॉलर से करीब 0.19% नीचे है। वहीं ब्रेंट 72.00 डॉलर के करीब टिका हुआ है। दोनों बेंचमार्क युद्ध से पहले वाले अपने आधार भाव से बमुश्किल दो डॉलर ऊपर हैं और मार्च में बने ऊंचे शिखर से करीब 40% नीचे लुढ़क चुके हैं।

बीते एक हफ्ते से कीमतों की रोजाना की चाल सिकुड़ती जा रही है और उनका दायरा भी छोटा होता जा रहा है। यह इशारा करता है कि तेजी अपने आप कमजोर नहीं पड़ी, बल्कि वह जोखिम प्रीमियम के साथ ही बाजार से बाहर निकल गई। 17 जून को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुई अंतरिम सहमति ने होर्मुज जलसंधि को सामान्य आवाजाही के लिए दोबारा खोल दिया। डर की खरीदारी बाहर का रास्ता देख चुकी है और अब जो बचा है वह एक ऐसा बाजार है जिसे इस साल पहली बार आम मांग और आपूर्ति के हिसाब से भाव तय करने पड़ रहे हैं। और यह कवायद बाजार को कतई रास आती नहीं दिख रही।

ये भी पढ़ें

ब्रेंट और WTI का फासला बताता है, डर की खरीदारी खत्म

ब्रेंट का WTI पर प्रीमियम अब घटकर करीब 3.50 डॉलर पर आ गया है। यह भाड़े और गुणवत्ता के हिसाब-किताब का सामान्य अंतर है, न कि किसी तरह का जोखिम प्रीमियम। युद्ध के दौरान समुद्री रास्ते से आने वाले बैरलों ने ही डर का बोझ ढोया था, लेकिन अब यह फासला दोबारा पाइपलाइन बनाम टैंकर के उबाऊ गणित तक सिमट गया है। अब कोई ब्रेंट के इलाके के लिए अतिरिक्त पैसा नहीं चुका रहा। यही अंतर वह सबसे साफ पैमाना है जो बता रहा है कि भू-राजनीतिक तनाव की वजह से आई खरीदारी अब पूरी तरह बाहर निकल चुकी है।

ओपेक+ ने फिर बढ़ाया कोटा, कागजी आपूर्ति की बाढ़

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और उसके सहयोगियों, जिन्हें मिलाकर ओपेक+ कहा जाता है, ने रविवार को अगस्त के कोटा में एक बार फिर 188 हजार बैरल प्रतिदिन (bpd) जोड़ने पर सहमति जताई। युद्ध शुरू होने के बाद से 940 हजार bpd की कागजी आपूर्ति बहाल करने की दिशा में यह ताजा कदम है। हकीकत की उत्पादन रफ्तार अब भी इस कागजी हिसाब से पीछे चल रही है। बंदी के सबसे बुरे दौर में खाड़ी के सबसे बड़े उत्पादक करीब 60 लाख bpd का उत्पादन गंवा बैठे थे, हालांकि जून की सहमति के बाद से आपूर्ति दोबारा पटरी पर लौट रही है।

इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात ने कोटा व्यवस्था से पूरी तरह किनारा कर लिया है। वहीं वॉशिंगटन अब भी अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) से 17 करोड़ 20 लाख बैरल तेल जारी करने की उस प्रक्रिया को पूरा कर रहा है, जिस पर युद्ध के दौरान सहमति बनी थी। इसके ऊपर से मई में अमेरिकी उत्पादन करीब 1 करोड़ 40 लाख bpd के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। यानी बाजार में तेल की चौतरफा आमद हो रही है।

वायदा बाजार अब स्टोरेज का पैसा दे रहा है

पिछले हफ्ते ब्रेंट का वायदा कर्व इस साल पहली बार कॉन्टैंगो में फिसल गया, जिसमें छह महीने का स्प्रेड करीब माइनस 56 सेंट रहा। जब बाजार आपको बैरल भंडार करके रखने का पैसा देने लगे, तो वह असल में यही कह रहा होता है कि उसके पास जरूरत से कहीं ज्यादा तेल है। ओपेक की अपनी मासिक रिपोर्ट लगातार दो महीनों से 2026 की मांग वृद्धि का अनुमान घटा रही है और इसे 10 लाख bpd से नीचे ला चुकी है। इसका मतलब है कि आपूर्ति की यह लहर एक ऐसे वक्त पर आ रही है जब मांग का अनुमान लगातार सिकुड़ रहा है। जानकारों ने साल के अंत तक ब्रेंट को 60 डॉलर के दायरे में देखना शुरू कर दिया है और इस बार वायदा बाजार भी उनसे बहस करता नजर नहीं आ रहा।

अहम स्तर: कहां है दीवार और कहां है सहारा

WTI के सामने पहली अड़चन 70.00 डॉलर का स्तर है और उसके पीछे जून का ब्रेकडाउन शेल्फ 72.00 डॉलर के करीब है। ब्रेंट को भी 74.00 डॉलर पर ठीक यही परीक्षा देनी है। किसी भी दिन के बंद भाव पर इन स्तरों को दोबारा हासिल करना वह न्यूनतम शर्त है, जिसके बाद ही कोई यह दलील दे सकता है कि गिरावट का दौर थम गया है।

नीचे की तरफ WTI के लिए शुरुआती सहारा 67.50 डॉलर के करीब है और ब्रेंट के लिए करीब 71.00 डॉलर पर, जो बीते हफ्ते की सुस्त चाल का फर्श रहे हैं। इसके नीचे 65.00 डॉलर ही इकलौता अहम गोल आंकड़ा है, जिसके बाद सीधे फरवरी वाले आधार भाव आते हैं, जो WTI के लिए करीब 62.00 डॉलर और ब्रेंट के लिए 66.50 डॉलर पर हैं। यही वह जगह है जहां से इस पूरे सफर की शुरुआत हुई थी।

रुझान मंदी का, तेजी बिकवाली के लिए

बाजार का रुझान साफ तौर पर मंदी की तरफ है। स्टोकैस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) दो हफ्तों से अपने फर्श के पास चिपका हुआ है और इस बीच भी कीमतें लगातार रिसती जा रही हैं। गिरावट के दौर में ओवरसोल्ड होना महज हालात का बयान है, खरीद का संकेत नहीं। ताजा लाइव आंकड़ों में भी RSI(14) 29 पर है, जो ओवरसोल्ड जोन है, और स्टोकैस्टिक की फास्ट लाइन 10 तथा सिग्नल लाइन 7 पर बनी हुई है। MACD भी संकेत रेखा से नीचे रहकर मंदी का इशारा कर रहा है।

कोटा बढ़ रहा है, भंडार खाली हो रहा है और वायदा कर्व स्टोरेज का पैसा दे रहा है, ऐसे में 70.00 डॉलर की तरफ आने वाली हर तेजी बिकवाली के लिए है। बातचीत का रुख तभी बदलेगा जब कीमत किसी दिन के बंद भाव पर दोबारा 72.00 डॉलर के ऊपर लौटेगी, जबकि 67.50 डॉलर टूटने पर फरवरी वाला आधार भाव फिर से मेज पर आ जाएगा।

WTI क्रूड आखिर है क्या

WTI ऑयल एक तरह का क्रूड ऑयल है जिसकी बिक्री अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होती है। WTI का मतलब है वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट, जो ब्रेंट और दुबई क्रूड समेत तीन प्रमुख किस्मों में से एक है। इसकी अपेक्षाकृत कम गुरुत्व और सल्फर की मात्रा के चलते इसे 'लाइट' और 'स्वीट' भी कहा जाता है। इसे बेहतरीन गुणवत्ता का तेल माना जाता है जिसे आसानी से रिफाइन किया जा सकता है। यह अमेरिका में निकाला जाता है और कशिंग हब के जरिए इसकी आपूर्ति होती है, जिसे 'दुनिया का पाइपलाइन चौराहा' कहा जाता है। यह तेल बाजार का एक बेंचमार्क है और मीडिया में इसकी कीमत का जिक्र अक्सर होता रहता है।

कीमत किन बातों से चलती है

दूसरी सभी संपत्तियों की तरह WTI ऑयल की कीमत की सबसे बड़ी चालक भी मांग और आपूर्ति ही हैं। दुनिया की तेज आर्थिक वृद्धि मांग को बढ़ा सकती है और सुस्त वृद्धि इसे घटा सकती है। राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और प्रतिबंध आपूर्ति को बाधित कर कीमतों पर असर डालते हैं। ओपेक के फैसले भी कीमत की एक अहम चालक हैं। अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी WTI क्रूड ऑयल की कीमत को प्रभावित करता है, क्योंकि तेल का कारोबार मुख्य रूप से डॉलर में होता है। ऐसे में कमजोर डॉलर तेल को सस्ता बना सकता है और मजबूत डॉलर महंगा।

भंडार के आंकड़े और बुधवार की परीक्षा

अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) और एनर्जी इन्फॉर्मेशन एजेंसी (EIA) की ओर से हर हफ्ते जारी होने वाले तेल भंडार के आंकड़े WTI ऑयल की कीमत पर सीधा असर डालते हैं। भंडार में बदलाव मांग और आपूर्ति के उतार-चढ़ाव को दर्शाते हैं। अगर आंकड़े भंडार में गिरावट दिखाएं तो यह मांग बढ़ने का संकेत हो सकता है, जिससे कीमत ऊपर जाती है। इसके उलट ज्यादा भंडार बढ़ी आपूर्ति को दर्शाता है, जिससे कीमत नीचे आती है। API की रिपोर्ट हर मंगलवार आती है और EIA की अगले दिन। दोनों के नतीजे आमतौर पर एक-दूसरे के करीब होते हैं और 75% मौकों पर 1% के दायरे में रहते हैं। EIA के आंकड़ों को ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है क्योंकि यह एक सरकारी एजेंसी है। इस बार ब्रेंट कर्व के कॉन्टैंगो में फिसलने ने बुधवार को आने वाले EIA भंडार आंकड़ों को इस हफ्ते की सबसे बड़ी परीक्षा बना दिया है।

ओपेक और ओपेक+ की भूमिका

ओपेक यानी पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन 12 तेल उत्पादक देशों का समूह है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करते हैं। इनके फैसले अक्सर WTI ऑयल की कीमतों पर असर डालते हैं। जब ओपेक कोटा घटाने का फैसला करता है तो आपूर्ति सिकुड़ती है और कीमत ऊपर जाती है, जबकि उत्पादन बढ़ाने पर इसका उलटा असर होता है। ओपेक+ उस विस्तारित समूह को कहते हैं जिसमें ओपेक के अलावा दस अतिरिक्त गैर-ओपेक देश शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख रूस है।

सवाल-जवाब

क्रूड ऑयल की मौजूदा कीमत क्या है?
ताजा लाइव आंकड़ों के मुताबिक क्रूड ऑयल करीब 68.56 डॉलर पर है, जो पिछले बंद भाव 68.69 डॉलर से 0.19% नीचे है। ब्रेंट 72.00 डॉलर के करीब है।
तेल की कीमतें अचानक क्यों गिरीं?
17 जून को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बनी अंतरिम सहमति ने होर्मुज जलसंधि को दोबारा खोल दिया, जिससे युद्ध का जोखिम प्रीमियम बाजार से पूरी तरह निकल गया।
ओपेक+ ने अगस्त के लिए क्या फैसला किया?
ओपेक+ ने रविवार को अगस्त कोटा में 188 हजार बैरल प्रतिदिन और जोड़ने पर सहमति जताई, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 940 हजार bpd आपूर्ति बहाल करने की दिशा में ताजा कदम है।
कॉन्टैंगो का क्या मतलब है और यह क्यों अहम है?
जब वायदा बाजार बैरल भंडार करके रखने का पैसा देने लगे तो उसे कॉन्टैंगो कहते हैं। यह संकेत है कि बाजार में जरूरत से ज्यादा तेल है, और ब्रेंट कर्व इस साल पहली बार इसमें फिसला है।
इस हफ्ते बाजार की सबसे बड़ी परीक्षा क्या है?
बुधवार को आने वाले EIA भंडार आंकड़े इस हफ्ते की सबसे बड़ी परीक्षा हैं, जो मांग और आपूर्ति की दिशा साफ करेंगे।
WTI के लिए अहम स्तर कौन से हैं?
ऊपर की तरफ 70.00 डॉलर पहली अड़चन है और 72.00 डॉलर अहम है। नीचे 67.50 डॉलर सहारा है, जिसके टूटने पर फरवरी वाला करीब 62.00 डॉलर का आधार भाव सामने आ सकता है।
तेल का मौजूदा तकनीकी रुझान क्या कह रहा है?
रुझान मंदी का है। RSI(14) 29 पर ओवरसोल्ड जोन में है और स्टोकैस्टिक फर्श के पास बना हुआ है, लेकिन गिरावट के दौर में यह खरीद का संकेत नहीं माना जाता।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR