अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबारी हफ्ते की शुरुआत के साथ ही बहुमूल्य धातुओं पर दबाव देखने को मिला है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं द्वारा सख्त मौद्रिक रुख जारी रखने के स्पष्ट संकेतों ने अमेरिकी मुद्रा को सहारा दिया है। इसके चलते पीली धातु 4,383 डॉलर के स्तर से फिसल गई और 4,350 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती दिखी। डॉलर इंडेक्स (DXY) अन्य छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले 0.2 प्रतिशत चढ़कर 100.42 के स्तर पर पहुंच गया, जिसने सोने की रिकवरी की संभावनाओं को फिलहाल सीमित कर दिया है।
केंद्रीय बैंक के कड़े बयानों से डॉलर को मिला समर्थन
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की हालिया बैठक के बाद बाजार में बनी धारणा को फेडरल रिजर्व के शीर्ष अधिकारियों के बयानों ने और मजबूत किया है। फेड चेयर केविन वॉर्श और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बेहतर समन्वय की चर्चाओं के चलते केंद्रीय बैंक की नीतियों पर भरोसा मजबूत हुआ है, जिससे यह उम्मीद बढ़ गई है कि ब्याज दरों में सख्ती का दौर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कई क्षेत्रीय फेड अध्यक्षों ने स्पष्ट किया है कि मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए दरों को ऊंचा बनाए रखना या उनमें और बढ़ोतरी करना अपरिहार्य हो सकता है।
सेंट लुइस फेड के अध्यक्ष अल्बर्टो मुसालेम ने महंगाई के खतरे पर कड़ा रुख जाहिर करते हुए चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि नीतिगत सख्ती के बिना अगले 18 महीनों में महंगाई का 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ऊपर बने रहने का जोखिम है। उनके अनुसार भविष्य में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। इसी तरह शिकागो फेड के ऑस्टन गूल्सबी ने आपूर्ति झटकों का हवाला देते हुए कहा कि लगातार आ रहे झटकों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और केंद्रीय बैंक को ऐसा फैसला लेना होगा जिससे आर्थिक परेशानियां भी खड़ी हो सकती हैं। मिनियापोलिस फेड के अध्यक्ष नील काशकारी ने भी रविवार को रेखांकित किया कि महंगाई सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा बनी हुई है।
तकनीकी स्तर और चार्ट का ढांचा
चार्ट के दृष्टिकोण से सोने का रुझान कमजोर ढांचे के साथ ठहराव की ओर इशारा कर रहा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) नीचे की ओर झुक चुका है और तकनीकी तौर पर बिकवाली का संकेत दे रहा है। बाजार की बनावट लगातार निचले स्तरों और निचली चोटियों की संरचना को बरकरार रखे हुए है। लाइव आंकड़ों के अनुसार सोने का भाव 4,382 डॉलर के आसपास है, जो पिछले बंद भाव 4,425 डॉलर के मुकाबले 0.97 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 3,718 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है।
कारोबारियों के लिए तात्कालिक समर्थन स्तर दिन का निचला स्तर 4,322 डॉलर है। यदि यह स्तर टूटता है, तो 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 4,319 डॉलर और उसके बाद 50-दिवसीय स्तर 4,295 डॉलर पर नजर रहेगी। इन दोनों स्तरों के टूटने पर सोने के लिए अगला बड़ा मांग क्षेत्र 4,000 डॉलर का मील का पत्थर बन जाएगा। वहीं तेजी के परिदृश्य में, यदि खरीदार 4,400 डॉलर के स्तर को दैनिक आधार पर दोबारा हासिल कर लेते हैं, तो भाव 4,400 से 4,500 डॉलर के दायरे में झूल सकता है। इस स्तर से ऊपर निकलने पर अगला तकनीकी अवरोध 200-दिवसीय एसएमए 4,541 डॉलर पर स्थित है।
मुद्रा बाजार और अन्य परिसंपत्तियों की चाल
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में भी डॉलर की मजबूती का सीधा असर दिखा। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) सोमवार को स्पष्ट दिशा तलाशने के लिए संघर्ष करता रहा। 0.7140 के स्तर का दोबारा परीक्षण करने के बाद इस जोड़ी पर ताजा गिरावट का दबाव बना और यह 0.7100 के निचले दायरे में स्थिर होने की कोशिश करती नजर आई। डॉलर के प्रति सुधरती धारणा ने इस जोड़ी में बिकवाली बढ़ाई।
दूसरी ओर, जापानी येन में मजबूती के कारण USD/JPY घटकर 157.00 के नीचे फिसला। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा शुक्रवार को रेट चेक किए जाने के बाद संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने व्यापारियों को सतर्क कर रखा है। बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो काफी समय से बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। हालांकि, रूस और यूक्रेन के साथ-साथ पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों के बीच डॉलर की गिरावट थमी रही, जिससे इस मुद्रा जोड़ी को बहुत बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
सुरक्षित निवेश और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी
इतिहास गवाह है कि संकट के समय सोना हमेशा संपत्ति के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में इस्तेमाल हुआ है। आभूषणों के अलावा इसे आज भी संकट के दौर में सबसे भरोसेमंद निवेश माना जाता है। चूंकि सोने पर किसी सरकार या जारीकर्ता की देनदारी नहीं होती, इसलिए इसे मुद्रा अवमूल्यन और महंगाई से बचाव का सबसे कारगर हथियार माना जाता है। ब्याज दरें शून्य होने पर सोने में निवेश की मांग बढ़ती है, जबकि उधारी लागत बढ़ने पर बिना ब्याज वाली इस धातु पर दबाव आता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। आर्थिक अस्थिरता के समय वे अपनी मुद्राओं को संबल देने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीदते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडारों में 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी कुल कीमत करीब 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड इतिहास की सबसे बड़ी सालाना सरकारी खरीदारी दर्ज की गई थी। भारत, चीन और तुर्की जैसे उभरते हुए देश आज भी अपने सोने के भंडारों को बहुत तेजी से बढ़ा रहे हैं ताकि वित्तीय साख को मजबूत बनाया जा सके।
शेयर बाजारों और बॉन्ड यील्ड की स्थिति
तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल बनी हुई है। अनिश्चितता के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही और अमेरिकी तथा यूरोपीय शेयर बाजारों में शुरुआती बढ़त देखने को मिली। बाजार का असली तनाव सरकारी बॉन्डों में केंद्रित है, जहां यील्ड में आई तेजी ने निवेशकों को सतर्क रखा है। आमतौर पर शेयर बाजार में तेजी आने से सोने का भाव गिरता है, जबकि जोखिम भरी संपत्तियों में भारी गिरावट के समय सोने को तवज्जो मिलती है।
आने वाले दिनों में अमेरिका से जारी होने वाले एडीपी रोजगार आंकड़े, विनिर्माण व सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े और फेडरल रिजर्व के विभिन्न अधिकारियों के वक्तव्य ही सोने की अगली दिशा तय करेंगे। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव सोने को निचले स्तरों पर सहारा दे सकते हैं, लेकिन जब तक डॉलर मजबूत रहेगा, तब तक पीली धातु की किसी भी बड़ी तेजी पर दबाव बना रहने की संभावना है।



















