अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कारोबारी हफ्ते की शुरुआत नरमी के साथ हुई है, जहां लगातार बने हुए आपूर्ति संकट और सट्टेबाजी के रिकॉर्ड स्तर के बावजूद वैश्विक बेंचमार्क नीचे फिसल गए हैं। आईसीई ब्रेंट क्रूड लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 102 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला गया, जबकि डब्ल्यूटीआई भी फिसलकर 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। तेल कीमतों में यह ताजा गिरावट हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली की वजह से देखने को मिली है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की इस सप्ताह होने वाली बैठकों से सकारात्मक समाधान निकलने की उम्मीद और आगामी ट्रंप-शी बैठक को लेकर बने कूटनीतिक भरोसे ने भी बाजार के मूड में सुधार किया है। हालांकि, कूटनीतिक बातचीत की इन उम्मीदों के बीच तेल बाजार के बुनियादी ढांचे पर वास्तविक दबाव जस का तस बना हुआ है।
सऊदी अरामको का आपूर्ति संकट और यूरोपीय ग्राहकों को झटका
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की भौतिक उपलब्धता को लेकर चिंताएं बेहद गंभीर बनी हुई हैं। ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सऊदी अरामको ने यूरोप के कुछ ग्राहकों को आगाह किया है कि वह अगले महीने दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत कच्चे तेल के कार्गो आवंटित करने में असमर्थ रह सकती है। यह स्थिति ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में आई तकनीकी रुकावटों के कारण पैदा हुई है, जिससे यानबु बंदरगाह पर कच्चे तेल की उपलब्धता काफी सीमित हो गई है। पिछले सप्ताह हुए ड्रोन हमलों में यह महत्वपूर्ण पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। परिचालन से जुड़े जानकारों का आकलन है कि इस पाइपलाइन को पूरी तरह से दोबारा शुरू करने में कई हफ्तों का समय लग सकता है, जिससे पश्चिमी देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति की डगर काफी कठिन हो गई है।
सटोरियों का दांव अब भी ऐतिहासिक तेजी पर
कीमतों में आई इस फौरी गिरावट के उलट वित्तीय बाजारों में संस्थागत निवेशकों की स्थिति काफी तेजी वाली बनी हुई है। आईएनजी के रणनीतिकारों इवा मांथे और वॉरेन पैटरसन ने रेखांकित किया है कि आईसीई ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में आपूर्ति जोखिम लगातार बने हुए हैं। आईसीई के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले मंगलवार तक मनी मैनेजरों ने अपने नेट लॉन्ग ब्रेंट पोजीशन में 16,904 लॉट की बढ़ोतरी की, जिससे कुल नेट लॉन्ग पोजीशन बढ़कर 282,657 लॉट पर पहुंच गई। यह स्तर मई 2026 के उत्तरार्ध के बाद से सबसे बड़ा नेट लॉन्ग पोजीशन है। इस जोरदार बढ़ोतरी की मुख्य वजह शॉर्ट कवरिंग रही, क्योंकि वैश्विक निवेशक मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधान के जोखिम को अपनी खरीद में लगातार शामिल कर रहे हैं।
रिफाइंड उत्पादों की किल्लत और भारत-चीन के निर्यात में भारी गिरावट
कच्चे तेल के अलावा रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का बाजार भी जबर्दस्त तंगी का सामना कर रहा है। एशियाई देशों के प्रमुख उत्पादकों से अगस्त महीने में होने वाले ईंधन निर्यात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके पीछे कच्चा माल कम मिलना और रिफाइनरियों का बंद होना मुख्य कारण रहा है। अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का पेट्रोल निर्यात सालाना आधार पर 14.5 प्रतिशत घटा है, जबकि डीजल निर्यात में साल-दर-साल आधार पर 19.2 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, चीन के पेट्रोल निर्यात में सालाना आधार पर 57.4 प्रतिशत की भारी कमी आई है। एशियाई आपूर्ति में इस भारी कटौती से आईसीई गैसऑयल क्रैक स्प्रेड को सहारा मिला है और पश्चिमी बाजारों में ईंधन की कमी और गंभीर हो गई है।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों के फैसले
कच्चे तेल में मंदी के बीच अन्य वित्तीय संपत्तियों में भी अनूठे उतार-चढ़ाव देखे जा रहे हैं। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर स्थिर बना हुआ है, जबकि अमेरिकी डॉलर जुलाई के उत्तरार्ध के अपने उच्चतम स्तर से हल्का सुधार थाम चुका है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट में कोई बदलाव न किए जाने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर कुछ दबाव देखा गया, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावनाओं ने ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले इसे सहारा दिया है। दूसरी तरफ, यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 157.00 से नीचे फिसल गया है, जिसे बैंक ऑफ जापान द्वारा शुक्रवार को किए गए रेट चेक के बाद संभावित हस्तक्षेप के डर से जापानी येन में आई मजबूती से बल मिला है। जापान में छुट्टी के माहौल और रूस-यूक्रेन तथा मध्य पूर्व के तनाव ने भी विदेशी मुद्रा कारोबारियों को सतर्क रखा है। इसके अतिरिक्त बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक अपेक्षित कदम है।
सोने में नरमी और सॉवरेन बॉन्ड बाजारों में तनाव
सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली कीमती धातु सोने ने नए कारोबारी सत्र की शुरुआत कमजोरी के साथ की है और यह 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब कारोबार कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के बावजूद मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सोने की कीमतों में यह करेक्शन आया है। वित्तीय बाजार चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में एक अजीबोगरीब मोड़ पर खड़े हैं, जहां अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव हावी हैं। एक तरफ तेल सस्ता हो रहा है और यूरोपीय तथा अमेरिकी शेयर बाजार हरे निशान में खुलने के संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सॉवरेन बॉन्ड में गहरा तनाव बना हुआ है, जहां शुक्रवार की देर शाम यूरोपीय और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में घबराहट के बीच तेजी देखी गई थी।




















