अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं के बीच ब्याज दरों के भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है। सेंट लुइस फेडरल रिजर्व के अधिकारी मुसालेम ने स्पष्ट किया है कि मुद्रास्फीति अब भी असहज स्तर पर बनी हुई है। उनके मुताबिक, आपूर्ति से जुड़ी रुकावटों को अलग करके देखने के बाद भी कीमतें 3% तक के दायरे में दर्ज की जा रही हैं। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त बनाने की दरकार है।
मांग और लागत दोनों से बढ़ रहा दबाव
मुसालेम के अनुसार वर्तमान मूल्य वृद्धि के पीछे आपूर्ति और मांग दोनों मोर्चों का संयुक्त असर दिखाई दे रहा है। कारोबारी संपर्कों से मिले संकेतों से पता चलता है कि कंपनियां अपने उत्पादों के दाम करीब 3% के आसपास बढ़ाने की रूपरेखा तैयार कर रही हैं। इसके अलावा कच्चे माल की कीमतों में आया उछाल केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहा है। तांबे जैसी आधारभूत औद्योगिक धातुओं के दाम भी चढ़े हैं, जिससे विनिर्माण और उत्पादन लागत में इजाफा देखने को मिल रहा है।
श्रम बाजार की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसे पूर्ण रोजगार के आसपास संतुलित करार दिया है। मुसालेम ने जोर देकर कहा कि रोजगार परिदृश्य इस समय महंगाई को भड़काने वाला मुख्य कारक नहीं है। हालांकि, उनका अनुमान है कि यदि अतिरिक्त नीतिगत कदम नहीं उठाए गए, तो अगले 18 महीनों में मुद्रास्फीति 2% के निर्धारित लक्ष्य से काफी ऊपर रह सकती है।
नीतिगत दरों में बढ़ोत्तरी की रणनीति
आगामी कदमों को लेकर मुसालेम का स्पष्ट नजरिया है कि नीति निर्माताओं को दरों में बढ़ोतरी जल्द और छोटे स्तर पर करनी चाहिए। उनका मानना है कि बाद में अचानक भारी वृद्धि करने से बेहतर है कि समय रहते क्रमिक कदम उठाए जाएं। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी में इस वर्ष उनके पास मतदान का अधिकार नहीं है, जिसके कारण वित्तीय बाजारों में उनकी इस सख्त टिप्पणी का तात्कालिक प्रभाव सीमित नजर आया। फिर भी नीतिगत स्तर पर दरों को बढ़ाने की ऐसी खुली मांग भविष्य के संभावित रुख का शुरुआती संकेत मानी जा रही है।
मुद्रा बाजारों की हलचल और वैश्विक रुख
मुसालेम के बयानों के बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती दर्ज की गई। वहीं एशियाई सत्र के दौरान सोमवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के स्तर से ऊपर टिका रहा। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम दरों को यथावत रखने के फैसले ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर कुछ दबाव बनाया, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से संभावित दर वृद्धि की उम्मीदों ने इसे सहारा दिया। साथ ही निवेशक आगामी ट्रंप और शी शिखर सम्मेलन पर भी नजरें टिकाए हुए हैं।
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 157.00 के नीचे फिसल गया। बैंक ऑफ जापान द्वारा शुक्रवार को किए गए रेट चेक के बाद बाजार में हस्तक्षेप की आशंका बढ़ गई थी, जिससे येन को हल्का समर्थन मिला। इसके साथ ही जापान में अवकाश के बीच रूस और यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों ने मुद्रा कारोबारियों को सतर्क रखा है। डॉलर के हालिया सुधार के थमने से इस मुद्रा जोड़ी की गिरावट सीमित दायरे में रही।
जिंस और बॉन्ड बाजारों की तस्वीर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव देखा गया और बहुमूल्य धातु 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास कारोबार करती रही। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के बावजूद मजबूत डॉलर ने सोने की तेजी पर ब्रेक लगाया।
तीसरी तिमाही के अंतिम दौर में वित्तीय संपत्तियां मिश्रित रुझान दिखा रही हैं। अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के बीच कच्चे तेल के दाम गिर रहे हैं, जबकि अमेरिकी और यूरोपीय शेयर बाजारों में तेजी के संकेत बने हुए हैं। शुक्रवार को यूरोपीय और अमेरिकी सॉवरेन बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बाद सरकारी ऋण बाजार सबसे ज्यादा दबाव में दिखे। इस बीच बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक सामान्यीकरण की दिशा में आगे बढ़ते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो विश्लेषकों के पूर्व अनुमानों के पूरी तरह अनुरूप रहा।

















