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अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अनिर्णय से पाउंड को मिला सहारा, 1.3300 के पास संभली ब्रिटिश मुद्राबाज़ार
17 अक्तू॰ 2026, 8:32 am (2 घंटे पहले)· 1

अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अनिर्णय से पाउंड को मिला सहारा, 1.3300 के पास संभली ब्रिटिश मुद्रा

फेडरल रिजर्व के रुख में अनिश्चितता और बैंक ऑफ इंग्लैंड की ओर से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के संकेतों के बीच ब्रिटिश पाउंड 1.3300 के स्तर के करीब मजबूत बना हुआ है।

GBP/USD━SMA20 ━SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण17 अक्टूबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

GBP/USD अभी 1.33 पर है, जबकि EMA20 1.33, EMA50 1.34 और EMA200 1.34 पर हैं।

आगे संभावित चाल

EMA50 (1.34) के ऊपर बंद होने पर तेजी, EMA200 (1.34) टूटने पर गिरावट खुलती है।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

GBP/USD का RSI 53 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

बोलिंजर बैंड्स20-period, 2 std-dev

यह क्या है

Bollinger Bands कीमत को उसके 20-दिनी औसत के दो स्टैंडर्ड डेविएशन के दायरे में घेरती हैं। ऊपरी बैंड अति-खिंचाव दिखाता है, निचला बिकवाली से थकान; बीच का बैंड रुझान का केंद्र है।

अभी यह कहाँ है

GBP/USD का बैंड दायरा 1.32–1.33 है।

आगे संभावित चाल

मध्य-बैंड (1.33) को फिर से पार करने पर गति ऊपर झुकती है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार के शुरुआती यूरोपीय सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी मजबूती बरकरार रखी और विनिमय दर 1.3300 के मनोवैज्ञानिक स्तर के इर्द-गिर्द घूमती नजर आई। इस तेजी के पीछे दो प्रमुख कारण मुख्य रूप से सक्रिय रहे, जिसमें एक तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख को लेकर उपजा संशय रहा, तो दूसरी तरफ बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा आगामी बैठकों में नीतिगत दरों को सख्त करने की बढ़ती संभावना ने पाउंड को मजबूत सहारा प्रदान किया। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में चल रही भारी उठापटक के बावजूद पाउंड ने अपनी हालिया गिरावट से तेजी से वापसी की है और निवेशकों का ध्यान अब दोनों प्रमुख केंद्रीय बैंकों की आगामी कार्यप्रणाली पर टिका हुआ है।

फेडरल रिजर्व के अनिश्चित संकेत और डॉलर पर दबाव

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वॉश के हालिया बयानों ने डॉलर की दिशा को लेकर बाजार में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा के साथ आयोजित एक विशेष परिचर्चा के दौरान केविन वॉश ने आने वाले महीनों के लिए किसी स्पष्ट नीतिगत बदलाव का संकेत देने से परहेज किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे अक्टूबर और दिसंबर में होने वाली नीतिगत बैठकों में आर्थिक परिस्थितियों का नए सिरे से आकलन करेंगे। मूल्य स्थिरता को बहाल करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भी उन्होंने ब्याज दरों के भविष्य के रास्ते पर कोई निश्चित समयसीमा साझा नहीं की।

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बाजार के जानकार फेडरल रिजर्व के इस तटस्थ और अनिर्णायक रवैये को डॉलर के लिए नकारात्मक मान रहे हैं। भविष्य में ब्याज दरों में और सख्ती की संभावनाओं पर स्पष्टता न होने के चलते डॉलर इंडेक्स में बिकवाली का दबाव देखा गया। जब निवेशकों को यह लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व तुरंत कोई आक्रामक कदम नहीं उठाने जा रहा है, तो उन्होंने डॉलर में अपने लंबे दांव घटाने शुरू कर दिए, जिसका सीधा लाभ ब्रिटिश पाउंड जैसी प्रतिस्पर्धी मुद्राओं को मिला।

बैंक ऑफ इंग्लैंड का मुद्रास्फीति पर रुख और दर वृद्धि के संकेत

ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक के गवर्नर एंड्रयू बेली ने देश में महंगाई की स्थिति पर व्यावहारिक टिप्पणी की है। उन्होंने शुक्रवार को उल्लेख किया कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का ब्रिटेन की समग्र कीमतों पर अभी तक सीमित द्वितीयक प्रभाव देखने को मिला है। हालांकि, बेली ने यह भी स्पष्ट किया कि इन द्वितीयक प्रभावों की वास्तविक व्यापकता कितनी गंभीर होगी, इस पर कोई ठोस निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार ब्रिटेन की मुद्रास्फीति का लक्ष्य से ऊपर बना रहना काफी निराशाजनक स्थिति पैदा कर रहा है।

अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण से यह निष्कर्ष निकला है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड अगले महीने अपनी प्रमुख उधारी दरों में वृद्धि शुरू कर सकता है। उल्लेखनीय है कि फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष भड़कने के बाद से बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी मौद्रिक नीति को यथावत बनाए रखा था। चूंकि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था ने अपनी जुझारू क्षमता दिखाई है लेकिन यह बहुत मजबूत स्थिति में नहीं है, इसलिए केंद्रीय बैंक फिलहाल किसी भी तरह की मौद्रिक नरमी के पक्ष में नहीं दिखता है। मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के अनिवार्य लक्ष्य पर वापस लाने की प्राथमिकता के चलते सख्त नीति की उम्मीदें पाउंड के पक्ष में माहौल बना रही हैं।

तकनीकी स्तर और यूओबी ग्रुप का मूल्य विश्लेषण

विदेशी मुद्रा विश्लेषकों का मानना है कि हालिया तीव्र उतार-चढ़ाव के बाद भी पाउंड और डॉलर की जोड़ी को लेकर उनका मध्यम अवधि का नजरिया स्थिर है। सिंगापुर स्थित यूओबी ग्रुप के रणनीतिकारों ने रेखांकित किया कि सप्ताह की शुरुआत में जब यह मुद्रा जोड़ी 1.3235 के आसपास थी, तब उन्होंने 1.3170 से 1.3280 के दायरे में कारोबार की उम्मीद जताई थी। इसके बाद पाउंड पहले 1.3275 तक चढ़ा और फिर अप्रत्याशित रूप से 1.3137 के निचले स्तर तक लुढ़क गया, लेकिन इसके तुरंत बाद इसमें उल्लेखनीय रिकवरी देखी गई।

विश्लेषकों का कहना है कि 1.3137 तक आई यह तेज गिरावट किसी स्थायी मंदी का संकेत नहीं थी, बल्कि यह केवल कारोबारी दायरे का विस्तार था। वर्तमान में यह जोड़ी 1.3135 से 1.3280 के बीच कारोबार करने का आधार बना रही है और किसी एक दिशा में मजबूत रुझान स्थापित करने के लिए इस सीमा को निर्णायक रूप से तोड़ना अनिवार्य होगा। दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो जीबीपी/यूएसडी 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज और ऊपरी बोलिंजर बैंड के नीचे सीमित बना हुआ है, जबकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 53 के स्तर पर स्थिर होकर तटस्थ स्थिति दर्शा रहा है।

लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार यह मुद्रा जोड़ी 1.3300 पर ट्रेड कर रही है, जो पिछले बंद स्तर से 0.43 प्रतिशत की मजबूती दिखाता है। चार्ट पर 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 1.3300 पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय और 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 1.3400 पर बने हुए हैं। ऊपरी स्तर पर शुरुआती प्रतिरोध बोलिंजर बैंड के ऊपरी सिरे 1.3340 और उसके बाद 100-दिवसीय एसएमए 1.3390 पर दिखाई देता है। वहीं दूसरी ओर, गिरावट की स्थिति में 1.3250 पर स्थित मध्य बोलिंजर बैंड तत्काल सहारा प्रदान कर रहा है, जिसके टूटने पर 1.3160 का निचला स्तर अगला महत्वपूर्ण समर्थन होगा।

ब्रिटिश पाउंड की ऐतिहासिक भूमिका और आर्थिक पैमानों का प्रभाव

ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी लगातार इस्तेमाल होने वाली मुद्रा है, जिसका इतिहास वर्ष 886 से शुरू होता है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में चौथी सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा मानी जाती है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के आधार पर दैनिक वैश्विक मुद्रा विनिमय में इसका हिस्सा लगभग 12 प्रतिशत है, जो प्रतिदिन करीब 630 अरब डॉलर के लेनदेन के बराबर बैठता है। इसके सबसे सक्रिय व्यापारिक युग्मों में डॉलर के साथ 'केबल' यानी जीबीपी/यूएसडी शामिल है जो कुल मुद्रा बाजार का 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है, इसके बाद जापानी येन के साथ 'ड्रैगन' के नाम से चर्चित जीबीपी/जेपीवाई 3 प्रतिशत और यूरो के साथ ईयूआर/जीबीपी 2 प्रतिशत का योगदान देता है।

पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति की होती है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक उद्देश्य 2 प्रतिशत की स्थिर मुद्रास्फीति दर को कायम रखना है, जिसे नियंत्रित करने के लिए वह ब्याज दरों को अपना प्रमुख हथियार बनाता है। जब महंगाई अनियंत्रित होने लगती है, तो दरों को बढ़ाया जाता है ताकि ऋण महंगा हो और मांग सीमित हो सके। ऊंची ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को अपनी पूंजी ब्रिटेन में लगाने के लिए आकर्षित करती हैं, जिससे पाउंड की मांग सीधे तौर पर बढ़ती है। इसके विपरीत, सुस्त आर्थिक वृद्धि के दौर में दरों को घटाकर ऋण सस्ता किया जाता है ताकि कारोबारी निवेश को बढ़ावा मिल सके।

मौद्रिक नीति के अलावा सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स और रोजगार के आंकड़े भी पाउंड के रुख को तय करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को खींचती है और केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने का संबल देती है, जिससे मुद्रा में निखार आता है। इसी तरह देश का व्यापार संतुलन भी एक अहम कड़ी है, जो यह दर्शाता है कि ब्रिटेन अपने निर्यात से कितना कमा रहा है और आयात पर कितना खर्च कर रहा है। जब ब्रिटिश उत्पादों की मांग वैश्विक बाजार में बढ़ती है तो सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करता है।

वैश्विक बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों में हलचल

अमेरिकी डॉलर की कमजोरी का प्रभाव केवल पाउंड तक सीमित नहीं रहा बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों में भी इसका व्यापक असर दिखा। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अपनी बढ़त को जारी रखते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.6950 के स्तर तक छलांग लगाई। उधर डॉलर की चौतरफा बिकवाली के चलते अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गई।

सुरक्षित निवेश के रूप में पहचानी जाने वाली पीली धातु यानी सोने में भी रिकवरी की रफ्तार तेज हुई। शुरुआती यूरोपीय घंटों के दौरान सोना चढ़कर 4,200 डॉलर प्रति औंस की ओर अग्रसर हुआ, क्योंकि व्यापारी फेडरल रिजर्व के अनिर्णीत बयानों के बाद अपनी पूंजी को सुरक्षित ठिकानों में स्थानांतरित कर रहे थे। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में मिला-जुला रुख देखा गया। बिटकॉइन और इथेरियम अपने प्रमुख समर्थन स्तरों को बचाने में सफल रहे, जबकि रिपल का टोकन एक्सआरपी अहम प्रतिरोध स्तर के नीचे संघर्ष करता नजर आया। जिद्दी महंगाई के आंकड़ों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित रखा है, जिससे डिजिटल संपत्तियों में सुधार की रफ्तार थमी हुई है।

सवाल-जवाब

शुक्रवार को ब्रिटिश पाउंड में मजबूती क्यों देखने को मिली?
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर कोई स्पष्ट संकेत न दिए जाने से डॉलर कमजोर हुआ, जबकि बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा अगले महीने दरें बढ़ाने की संभावनाओं ने पाउंड को सहारा दिया।
फेड प्रमुख केविन वॉश ने ब्याज दरों के संबंध में क्या कहा?
केविन वॉश ने कहा कि वे अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में आर्थिक स्थिति का आकलन करेंगे, लेकिन उन्होंने भविष्य के नीतिगत कदमों पर कोई निश्चित रुख जाहिर नहीं किया।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली का मुद्रास्फीति पर क्या आकलन है?
एंड्रयू बेली के अनुसार ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का समग्र कीमतों पर अभी तक सीमित असर दिखा है, लेकिन जिद्दी महंगाई के बीच किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
जीबीपी/यूएसडी के लिए मुख्य तकनीकी स्तर कौन से हैं?
ऊपरी स्तर पर 1.3340 और 1.3390 पर कड़ा प्रतिरोध बना हुआ है, जबकि गिरावट की स्थिति में 1.3250 और 1.3160 पर अहम समर्थन मौजूद है।
डॉलर की इस कमजोरी का अन्य वित्तीय संपत्तियों पर क्या असर हुआ?
डॉलर गिरने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.6950 की ओर चढ़ा, जापानी येन 158.00 से नीचे आया और सोना सुधरकर 4,200 डॉलर के पास पहुंच गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·6 मिनट पहले

फेड और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के बयानों से पाउंड संभल तो गया है, पर मुझे शक है कि यह तेजी ज़्यादा दिन टिक पाएगी।

Michael Anderson@michael-anderson·25 मिनट पहले

फेड के रुख से डॉलर टूटना लाजिमी था, पर पाउंड का टिकना कुछ ज्यादा ही उम्मीद भरा लग रहा है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·25 मिनट पहले

माيكل, पाउंड का टिकना उम्मीद भरा नहीं लग रहा, क्योंकि बैंक ऑफ इंग्लैंड की महंगाई पर सख्ती और रेट हाइक की बातें इसे सच में मजबूती दे रही हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·46 मिनट पहले

फेड के इस तरह हाथ खींचने से डॉलर कमजोर हुआ है, जिसका सीधा फायदा पाउंड को मिल रहा है।

Rohan Gupta@rohan-gupta·46 मिनट पहले

रविकेश, बात तो सही है, लेकिन जब तक बैंक ऑफ इंग्लैंड खुद दरें नहीं बढ़ाता, पाउंड का ये टिकना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।

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