फ्लाईदुबई विमान संकट पर कैप्टन स्मित मच्छार की पत्नी ने साझा किया दर्द, बोलीं उस वक्त पूरी तरह टूट चुकी थीअमेरिकी रोजगार आंकड़ों से पहले विदेशी मुद्रा बाजार में ठहराव, प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की चाल पर टिकी निगाहेंकाशी के पिशाच मोचन कुंड में अकाल मृत्यु झेलने वाले पूर्वजों के उद्धार का विधान, रोजाना जुट रहे हजारों लोगऊर्जा लागत में उछाल से यूरोप में गहरा सकता है मुद्रास्फीति का संकट, यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने दी चेतावनीकौन बनेगा करोड़पति 18 में अमिताभ बच्चन ने ताजा कीं कोलकाता की यादें, पार्क स्ट्रीट की रौनक और उषा उत्थुप के सुरों का किया बखानहिमाचल के युवाओं को खाड़ी देशों में नौकरी का मौका, सरकाघाट में 12 विदेशी कंपनियों ने लिया 1500 युवाओं का इंटरव्यूसोशल मीडिया रील्स से आतंक के जाल तक, पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट शहजाद भट्टी की साजिश का पर्दाफाशगोवा की मेजबानी में लौटेगा टीवीएस मोटोसोल, दिसंबर में सजेगा दोपहिया संस्कृति का सबसे बड़ा मंचखाली पेट मेथी दाने का पानी पीने से सेहत को मिलते हैं कई बड़े लाभगुस्से में आपा खोने से दिल पर अचानक बढ़ता है ढाई गुना तक दबाव, जानिए क्यों खतरनाक है यह स्थिति
अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट पर टिकी वैश्विक बाजार की नजर, फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर फैसले और डॉलर पर दिखेगा सीधा असरबाज़ार
2 अक्तू॰ 2026, 2:05 pm (19 मिनट पहले)· 0

अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट पर टिकी वैश्विक बाजार की नजर, फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर फैसले और डॉलर पर दिखेगा सीधा असर

सितंबर महीने में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 90 हजार नई नौकरियों के जुड़ने का अनुमान है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं और डॉलर के रुख पर बड़ा असर पड़ सकता है।

GC━SMA20 ━SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण2 अक्टूबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

GC अभी $4,215 पर है, जबकि EMA20 $4,314, EMA50 $4,348 और EMA200 $4,439 पर हैं।

आगे संभावित चाल

तेजी संभवतः EMA20 ($4,314) के पास थम सकती है।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

GC का RSI 38 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

बोलिंजर बैंड्स20-period, 2 std-dev

यह क्या है

Bollinger Bands कीमत को उसके 20-दिनी औसत के दो स्टैंडर्ड डेविएशन के दायरे में घेरती हैं। ऊपरी बैंड अति-खिंचाव दिखाता है, निचला बिकवाली से थकान; बीच का बैंड रुझान का केंद्र है।

अभी यह कहाँ है

GC का बैंड दायरा $4,145–$4,529 है।

आगे संभावित चाल

मध्य-बैंड ($4,337) को फिर से पार करने पर गति ऊपर झुकती है।

वैश्विक वित्तीय बाजारों और नीति निर्धारकों की निगाहें अमेरिकी श्रम बाजार के ताजा आंकड़ों पर टिक गई हैं। अमेरिका का ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स सितंबर महीने के नॉन-फार्म पेरोल यानी रोजगार वृद्धि से जुड़े आंकड़े शुक्रवार को 12:30 GMT पर जारी करने जा रहा है। निवेशक और अर्थशास्त्री इस बात का आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं कि फेडरल रिजर्व अक्टूबर की आगामी बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी करेगा या मौद्रिक नीति को यथावत रखेगा। इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट में आने वाले आंकड़े अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीतिगत दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं और अमेरिकी डॉलर के मूल्यांकन के साथ-साथ सोने और प्रमुख विदेशी मुद्रा जोड़ियों की दिशा भी तय करेंगे।

सितंबर महीने के रोजगार आंकड़ों से क्या हैं बाजार की उम्मीदें

बाजार के विश्लेषकों और निवेशकों का अनुमान है कि सितंबर महीने में अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल में 90,000 की वृद्धि देखने को मिलेगी। यह आंकड़ा अगस्त महीने में दर्ज की गई 1,62,000 नौकरियों की मजबूत बढ़त के मुकाबले काफी धीमी रफ्तार की ओर इशारा करता है। वहीं बेरोजगारी दर के 4.1 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर बने रहने का पूर्वानुमान लगाया गया है। मजदूरी मुद्रास्फीति के पैमाने के रूप में देखे जाने वाले औसत प्रति घंटा आय यानी एवरेज ऑवर्ली अर्निंग्स में महीने-दर-महीने 0.3 प्रतिशत की स्थिर बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की उम्मीद है। यदि आंकड़े इन अनुमानों के अनुरूप रहते हैं, तो यह संकेत मिलेगा कि रोजगार बाजार पूरी तरह चरमराया नहीं है, बल्कि स्थिर गति से सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है।

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फेडरल रिजर्व का पिछला कदम और नीति निर्माताओं का रुख

अगस्त के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने जब यह पुष्टि कर दी थी कि अमेरिकी श्रम बाजार की स्थिति काफी स्वस्थ है, तब फेडरल रिजर्व ने सितंबर की अपनी बैठक में नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी। अपनी नीतिगत घोषणा में अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने रेखांकित किया था कि रोजगार निर्माण की रफ्तार कार्यबल के आकार के अनुरूप बनी हुई है और बेरोजगारी दर में बहुत कम बदलाव हुआ है। इसी धारणा को दोहराते हुए फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने स्पष्ट किया था कि बेरोजगारी दर ऐतिहासिक रूप से निचले स्तरों पर बनी हुई है, जबकि जॉब ओपनिंग्स और काम के कामकाजी घंटों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा था कि केंद्रीय बैंक के अधिकार क्षेत्र में आने वाला श्रम पक्ष इस समय काफी मजबूत और अच्छी स्थिति में दिखाई देता है।

सितंबर बैठक के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व के विभिन्न अधिकारियों की ओर से सख्त मौद्रिक नीति के पक्ष में बयान सामने आए। फिलाडेल्फिया फेड की अध्यक्ष एना पॉलसन ने तर्क दिया कि ब्याज दरों में एक बार फिर इजाफा करने की जरूरत पड़ सकती है। उनका मानना था कि हालांकि सितंबर महीने में की गई ब्याज दर बढ़ोतरी ने महंगाई से लड़ने के रुख को मजबूती दी है, लेकिन बुनियादी मुद्रास्फीति अभी भी जिद्दी बनी हुई है और अनुमान से ज्यादा ऊंची बनी हुई है। दूसरी तरफ शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी ने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से भविष्य में होने वाले उत्पादकता लाभ वर्तमान में अर्थव्यवस्था के अत्यधिक गर्म होने का बड़ा जोखिम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने विशाल राजकोषीय घाटे, मुद्रास्फीति लक्ष्य के लगातार लंबे समय तक पार रहने और आपूर्ति झटकों की अनदेखी करने वाले तर्कों की दोबारा समीक्षा करने पर बल दिया, जिससे स्पष्ट होता है कि नीति निर्माताओं का झुकाव सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने की ओर है।

आर्थिक संकेतकों और ब्याज दर की संभावनाओं का गणित

अमेरिकी अर्थव्यवस्था से हाल ही में जारी हुए उत्साहवर्धक व्यापक आर्थिक आंकड़ों ने भी अक्टूबर में लगातार दूसरी बार ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को हवा दी है। एसएंडपी ग्लोबल के विनिर्माण और सेवा परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई में सुधार दर्ज किया गया और वे क्रमशः 57 और 58.7 के स्तर पर पहुंच गए। यह निजी क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधियों में एक ठोस और स्वस्थ विस्तार का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इन मजबूत आंकड़ों के चलते वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर को काफी सहारा मिला था।

सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना सप्ताह की शुरुआत में उछलकर करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। हालांकि इसके बाद अमेरिकी ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस द्वारा जारी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर यानी कोर पीसीई प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों के बाद इन संभावनाओं में कुछ नरमी आई। फेडरल रिजर्व का मुद्रास्फीति मापने का यह पसंदीदा पैमाना अगस्त में 3 प्रतिशत पर रहा, जो जुलाई के बराबर था लेकिन बाजार के 3.3 प्रतिशत के अनुमान से काफी कम रहा। मुद्रास्फीति के इन नरम आंकड़ों ने ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी के दबाव को कुछ हद तक सीमित किया है।

टीडी सिक्योरिटीज और ओसीबीसी विश्लेषकों का अलग-अलग आकलन

रोजगार रिपोर्ट को लेकर वित्तीय संस्थानों के बीच अलग-अलग अनुमान देखने को मिल रहे हैं। टीडी सिक्योरिटीज का मानना है कि सितंबर में नॉन-फार्म पेरोल घटकर 50,000 के स्तर पर आ सकता है और बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो सकती है। संस्थान के अनुसार इस संभावित सुस्ती का मुख्य कारण मौसमी कारकों का पलटना है। उनका विश्लेषण बताता है कि निजी पेरोल 50,000 पर रह सकता है, जिसकी अगुवाई स्वास्थ्य सेवा और अवकाश एवं आतिथ्य क्षेत्र करेंगे, जबकि स्थानीय स्तर पर भर्तियों में कमी के चलते सरकारी रोजगार सपाट रहेगा। टीडी सिक्योरिटीज यह भी मानती है कि औसत प्रति घंटा आय मासिक आधार पर 0.1 प्रतिशत और सालाना आधार पर 3.0 प्रतिशत की धीमी रफ्तार दिखा सकती है, जिसमें श्रम भागीदारी बढ़ने के साथ बेरोजगारी दर में मामूली इजाफा संभव है। हालांकि संस्थान का कहना है कि मौसमी कारकों और श्रम भागीदारी में वृद्धि के चलते रिपोर्ट के नरम आंकड़ों को बहुत अधिक नीतिगत कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इसके विपरीत ओसीबीसी के विश्लेषकों का कहना है कि हाल के बेरोजगारी दावों में लगातार गिरावट का रुख रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि श्रम बाजार की जमीनी स्थिति अब भी काफी दृढ़ और मजबूत बनी हुई है। विश्लेषकों ने आगाह किया कि रोजगार के आंकड़ों में ऊपर की तरफ अप्रत्याशित उछाल आने का जोखिम बढ़ रहा है। उनका तर्क है कि यदि रोजगार रिपोर्ट अनुमान से अधिक मजबूत आती है, तो यह फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक सख्ती जारी रखने की उम्मीदों को और पुख्ता करेगी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखेगी और डॉलर को अतिरिक्त समर्थन प्रदान करेगी।

विदेशी मुद्रा बाजारों और तकनीकी स्तरों पर पड़ने वाला प्रभाव

वर्तमान बाजार परिदृश्य में यदि नॉन-फार्म पेरोल का आंकड़ा 1,00,000 के ऊपर निकलता है, तो इससे अक्टूबर बैठक में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीदें फिर से जाग उठेंगी। ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर में एक नई तेजी शुरू हो सकती है, जिससे यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर यानी EUR/USD जोड़ी सप्ताहांत की ओर दबाव में आकर नीचे जा सकती है। इसके विपरीत यदि आंकड़ा 50,000 से नीचे गिरकर एक बड़ा नकारात्मक झटका देता है, तो डॉलर को तत्काल बिकवाली का सामना करना पड़ सकता है। यदि आंकड़ा 50,000 से 1,00,000 के दायरे में रहता है, तो फेड की ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की मौजूदा धारणा में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है।

तकनीकी मोर्चे पर EUR/USD की अल्पकालिक स्थिति मंदी की ओर इशारा करती है, क्योंकि यह अपने 100-दिवसीय और 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए और घटती ट्रेंड लाइन से काफी नीचे कारोबार कर रहा है। दैनिक चार्ट पर इसका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 20 से नीचे बना हुआ है, जो इसके ओवरसोल्ड स्थिति में होने का संकेत देता है। नीचे की तरफ 1.1145 का स्तर एक प्रमुख स्थिर सपोर्ट का काम कर रहा है, जिसके बाद 1.1000 का मनोवैज्ञानिक स्तर अहम है। ऊपर की ओर पहला महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर 1.1460 पर स्थित है, जो बोलिंजर बैंड का मध्य बिंदु है, जिसके बाद 1.1520 पर 100-दिवसीय एसएमए और 1.1615 पर 200-दिवसीय एसएमए व डाउनवर्ड ट्रेंड लाइन मौजूद हैं।

अन्य वैश्विक संपत्तियों और एशियाई सत्र की हलचल

शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर 17 महीने के उच्चतम स्तर से पीछे हटा, क्योंकि ट्रेडर्स ने इस बेहद महत्वपूर्ण रोजगार रिपोर्ट से पहले मुनाफावसूली करना बेहतर समझा। इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD उछलकर 0.6950 की ओर बढ़ा, जिसे वैश्विक यील्ड और महंगाई के जोखिमों के बीच नवंबर में ऑस्ट्रेलिया में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीदों से सहारा मिला। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY 158.00 के आसपास संघर्ष करता दिखा। टोक्यो सीपीआई मुद्रास्फीति के उम्मीद से ज्यादा गर्म रहने और डॉलर में आई नरमी के कारण यह जोड़ी अपने साप्ताहिक उच्च स्तर से फिसल गई।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पाई नेटवर्क में अस्थिरता बनी रही और यह 0.0900 डॉलर के आसपास घूमता रहा, जहां चार घंटे के चार्ट पर राइजिंग वेज पैटर्न के नीचे टूटने का खतरा बना हुआ था और 0.1000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर इसके सुधार में बाधा बना रहा।

सोने का बाजार और नॉन-फार्म पेरोल का सीधा संबंध

नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट का सोने की कीमतों पर ऐतिहासिक रूप से गहरा प्रभाव पड़ता है। सामान्य तौर पर मजबूत रोजगार आंकड़े अमेरिकी डॉलर को मजबूत करते हैं और ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने की संभावना बढ़ाते हैं। चूंकि सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर में आंका जाता है और यह कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए डॉलर की मजबूती और ऊंची ब्याज दरें सोने के आकर्षण को कम करती हैं। इसके विपरीत जब रोजगार के आंकड़े अनुमान से कमजोर आते हैं, तो डॉलर में गिरावट आती है और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ जाती है।

शुक्रवार को सोने का हाजिर और वायदा कारोबार यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक एक सीमित दायरे में रहा। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार सोना 4,215 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 4,202 डॉलर के मुकाबले 0.30 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का निचला और उच्चतम दायरा 3,843 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.24 गुना है। तकनीकी विश्लेषण पर नजर डालें तो 14-अवधि का आरएसआई 38 के स्तर पर है। एमएसीडी -59.31 पर है जो इसके -37.79 के सिग्नल से नीचे मंदी का संकेत देता है। मूविंग एवरेज में ईएमए 20 स्तर 4,314 डॉलर, ईएमए 50 स्तर 4,348 डॉलर और ईएमए 200 स्तर 4,439 डॉलर पर है। 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलने के कारण यहां डेथ क्रॉस बना हुआ है जो दीर्घकालिक डाउनट्रेंड दिखाता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड्स 4,145 डॉलर से 4,529 डॉलर के दायरे में हैं, जिनका मध्य स्तर 4,337 डॉलर है। सोने का दैनिक पिवट पॉइंट 4,201 डॉलर पर है, जहां पहला रेजिस्टेंस 4,240 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस 4,265 डॉलर पर है, जबकि पहला सपोर्ट 4,176 डॉलर और दूसरा सपोर्ट 4,138 डॉलर पर बना हुआ है।

नॉन-फार्म पेरोल की आंतरिक संरचना और व्यापक प्रभाव

नॉन-फार्म पेरोल अमेरिकी श्रम विभाग की व्यापक रोजगार रिपोर्ट का केवल एक घटक है, जिसमें कृषि क्षेत्र को छोड़कर शेष अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कर्मचारियों की शुद्ध संख्या का हिसाब रखा जाता है। यह आंकड़ा सीधे तौर पर फेडरल रिजर्व के पूर्ण रोजगार और 2 प्रतिशत मुद्रास्फीति के दोहरे लक्ष्य को साधने की क्षमता को मापता है। अधिक नौकरियां आने का अर्थ है कि लोगों की आमदनी और खर्च करने की क्षमता बनी हुई है, जो मांग को बढ़ाकर महंगाई को जन्म दे सकती है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक मजबूत रोजगार के दौर में ब्याज दरें बढ़ाता है और मंदी की स्थिति में दरें घटाकर अर्थव्यवस्था को सहारा देता है।

हालांकि बाजार केवल हेडलाइन पेरोल आंकड़े को देखकर ही प्रतिक्रिया नहीं देता। कई बार ऐसा देखा गया है कि हेडलाइन पेरोल मजबूत आने के बावजूद यदि औसत साप्ताहिक आय या कामकाजी घंटों में गिरावट दर्ज की जाती है, तो बाजार मुद्रास्फीति के दबाव को खारिज करते हुए इसे अपस्फीतिकारी मान लेता है। श्रम बल भागीदारी दर और औसत कार्य घंटे भी बाजार के मिजाज को बदलने की क्षमता रखते हैं। शुक्रवार को जारी होने वाले इन व्यापक आंकड़ों के हर पहलू का बारीक विश्लेषण ही तय करेगा कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा किस ओर मुड़ेगी।

सवाल-जवाब

सितंबर महीने के लिए अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल का क्या अनुमान है?
बाजार का अनुमान है कि सितंबर में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 90,000 नई नौकरियां जुड़ी हैं, जो अगस्त के 1,62,000 के आंकड़े से कम है।
बेरोजगारी दर और औसत प्रति घंटा आय को लेकर क्या उम्मीदें हैं?
बेरोजगारी दर के 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रहने और औसत प्रति घंटा आय में 0.3 प्रतिशत की मासिक वृद्धि का पूर्वानुमान है।
नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट फेडरल रिजर्व के फैसले को कैसे प्रभावित करती है?
यदि रोजगार आंकड़े मजबूत आते हैं तो फेड मुद्रास्फीति को रोकने के लिए ब्याज दरें बढ़ा सकता है, जबकि कमजोर आंकड़े आने पर मौद्रिक नरमी की संभावना बढ़ती है।
मजबूत रोजगार आंकड़ों का सोने की कीमत पर क्या असर पड़ता है?
मजबूत रोजगार आंकड़ों से आमतौर पर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी आती है, जिससे सोने की कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिलता है।
टीडी सिक्योरिटीज का सितंबर पेरोल को लेकर क्या अलग अनुमान है?
टीडी सिक्योरिटीज का मानना है कि मौसमी कारकों के कारण सितंबर में पेरोल घटकर 50,000 रह सकता है और बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Gupta@rohan-gupta·5 मिनट पहले

नौकरियों के आंकड़े कम होने की बात सुनकर मुझे अपने वो दिन याद आ गए जब मैं पहली नौकरी के लिए महीनों धक्के खा रहा था। बाजार में सुस्ती आते ही सबसे पहले फ्रेशर्स पर गाज गिरती है, और फेड के ये फैसले सीधे आम आदमी की जेब पर भारी पड़ते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·5 मिनट पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। ये आंकड़े सिर्फ कागजी लगते हैं, पर इनसे सचमुच तय होता है कि अगली नौकरी मिलेगी या नहीं।

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