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सोशल मीडिया रील्स से आतंक के जाल तक, पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट शहजाद भट्टी की साजिश का पर्दाफाशपाकिस्तान
2 अक्तू॰ 2026, 1:29 pm (23 मिनट पहले)· 1

सोशल मीडिया रील्स से आतंक के जाल तक, पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट शहजाद भट्टी की साजिश का पर्दाफाश

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े घोषित आतंकी शहजाद भट्टी द्वारा भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए बरगलाने और आतंकी गतिविधियों में धकेलने की साजिश सामने आई है।

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारतीय युवाओं को ऑनलाइन भटकाने और आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बनाने की गहरी साजिशें रच रही है। इस नापाक तंत्र का एक प्रमुख चेहरा शहजाद भट्टी है, जिसके खिलाफ भारत सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत कार्रवाई की है और उसे विधिवत आतंकवादी घोषित किया है। शहजाद भट्टी डिजिटल मंचों, खासकर इंस्टाग्राम और रील्स के जरिए भारत के नौजवानों को अपने जाल में फंसाने की लगातार कोशिशें कर रहा है। वह युवाओं को तरह-तरह के प्रलोभन देकर, हथियारों की चमक दिखाकर और आर्थिक मदद का झांसा देकर देश विरोधी कृत्यों में झोंकने की फिराक में रहता है। गनीमत यह रही कि भारत की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने समय रहते निगरानी बढ़ाई, संदिग्ध लड़कों की पहचान की और उन्हें काउंसलिंग देकर वापस मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया।

डिजिटल दुनिया में गैंगस्टर कल्चर और युवाओं का ब्रेनवॉश

शहजाद भट्टी का काम करने का तौर-तरीका बेहद सुनियोजित और खतरनाक है। वह इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आक्रामक तेवर, अपराध जगत की झूठी शान और गन कल्चर को बढ़ावा देने वाली रील्स प्रसारित करवाता है। जब कोई युवा इन रील्स को लाइक या शेयर करता है, तो उसके सिंडिकेट के गुर्गे तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। इन लड़कों से धीरे-धीरे दोस्ताना बातचीत शुरू की जाती है, उनकी निजी परेशानियां पूछी जाती हैं और फिर सहानुभूति का ढोंग रचकर उन्हें अपने साथ जोड़ा जाता है। इसके बाद उन्हें पैसे का लालच, हथियारों की उपलब्धता और हर मुश्किल में पीछे खड़े रहने का झूठा भरोसा दिलाया जाता है।

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इस पूरे जाल का अंतिम मकसद युवाओं को टारगेट किलिंग, पुलिस थानों पर ग्रेनेड फेंकने, संवेदनशील इलाकों में देश विरोधी नारे लिखने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने जैसे घातक कामों में धकेलना होता है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा तंत्र ने चौकसी बरतते हुए कई भटके हुए युवाओं को बाउंड डाउन किया और कानूनी दायरे में रखकर सुधरने का अवसर प्रदान किया। इनमें तीन अलग-अलग राज्यों के युवा शामिल हैं, जिनमें एक कानून का छात्र और यूपीएससी का आकांक्षी है, दूसरा तीन लाख फॉलोअर्स वाला सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और तीसरा पूर्व में छोटे-मोटे काम करने के बाद अब खेती से जुड़ा युवक है।

रील्स को लाइक करने से शुरू हुआ खतरनाक संपर्क

इस साजिश के शिकार होने से बाल-बाल बचे पहले युवक की कहानी आंखें खोलने वाली है। यह नौजवान कानून की पढ़ाई करने के साथ-साथ प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहा है। उसका सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस या भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस बनकर देश की सेवा करने का था। करीब आठ महीने पहले अक्टूबर के महीने में कुछ निजी उलझनों और परेशानियों के चलते वह सोशल मीडिया पर सामान्य से अधिक वक्त बिताने लगा था।

उसी दौरान स्क्रॉल करते हुए उसकी स्क्रीन पर एक वीडियो रील सामने आई। इस रील में लॉरेंस बिश्नोई और शहजाद भट्टी के नामों का जिक्र था। युवक को उस वक्त यह बिल्कुल इल्म नहीं था कि शहजाद भट्टी पाकिस्तान का एक खतरनाक डॉन और आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा है। उस रील में दोनों की तरफ से ईद की मुबारकबाद दी जा रही थी। युवक ने अनजाने में उस रील को लाइक कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया के एल्गोरिदम ने उसे वैसी ही और रील्स दिखानी शुरू कर दीं। बदमाशी, हथियार और डॉन कल्चर वाली इन सामग्रियों को लाइक और फॉलो करने के सिलसिले के बीच उसके प्रोफाइल से धीरू और हरमन नाम के दो संदिग्ध व्यक्ति जुड़ गए।

दुबई लिंक और लाइव सेशन में झूठी हमदर्दी का नाटक

धीरू और हरमन ने पहले बहुत सामान्य तरीके से बातचीत शुरू की। उन्होंने युवक का हालचाल पूछा, उसकी दिनचर्या समझी और पारिवारिक परेशानियों पर गहरी हमदर्दी जताई। धीरे-धीरे एक मजबूत डिजिटल दोस्ती बन गई। इसके बाद उन्होंने युवक का सीधा संपर्क सोहेल नाम के एक व्यक्ति से करवाया, जो दुबई में बैठकर इस नेटवर्क को संचालित कर रहा था। सोहेल अक्सर सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो सेशन करता था और शहजाद भट्टी की छवि को एक मसीहा के रूप में चमकाने में जुटा रहता था।

सोहेल अपने लाइव प्रसारणों में दावा करता था कि उनका भाई हर जरूरतमंद शख्स की मदद के लिए तैयार खड़ा है और जो भी संकट में हो, वे उसकी पूरी सहायता करेंगे। धीरू ने सोहेल को इस यूपीएससी अभ्यर्थी के बारे में जानकारी दी। तीसरे लाइव सेशन के दौरान सोहेल ने इस छात्र को अपनी स्क्रीन पर जोड़ लिया। वहां उसका नाम पूछा गया, तबीयत पूछी गई और भरोसा दिलाया गया कि किसी भी तरह की दिक्कत आने पर पूरा गिरोह उसके साथ चट्टान की तरह खड़ा रहेगा। हालांकि, प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे इस छात्र ने अपनी समझदारी दिखाई और उनके लुभावने दावों के बावजूद भावनात्मक रूप से बहकने से खुद को बचाए रखा।

अपराध का बढ़ता शिकंजा और महिला थाने पर हमला

जैसे-जैसे महीने बीते, इस नेटवर्क की हिंसक सच्चाई सामने आने लगी। छात्र से लगातार संपर्क में रहने वाला धीरू पूरी तरह शहजाद भट्टी के गिरोह की गैंगवार और हिंसक वारदातों में शामिल हो चुका था। छात्र को शुरुआत में इस खौफनाक बदलाव की भनक नहीं थी। लेकिन बाद में धीरू ने एक महिला पुलिस थाने को निशाना बनाते हुए वहां ग्रेनेड से हमला कर दिया। जब यह सनसनीखेज खबर मीडिया में आई, तो छात्र बुरी तरह सहम गया। अपनी जान और भविष्य को खतरे में पाकर उसने तुरंत धीरू से अपना हर तरह का नाता तोड़ लिया। धीरू को बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

धीरू के जेल जाने के बाद हरमन लगातार छात्र के संपर्क में रहा। लेकिन हरमन भी धीरे-धीरे शहजाद भट्टी के शिकंजे में पूरी तरह जकड़ता जा रहा था। यह मॉड्यूल नए और कम उम्र के लड़कों को आकर्षित करके उनसे बेहद खतरनाक काम करवाता था। उन्हें बम या ग्रेनेड फेंकने, हत्या की वारदात को अंजाम देने और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों को धमकाने के काम सौंपे जाते थे। गिरोह ने इस छात्र को भी एक हिंदू व्यक्ति का मोबाइल नंबर दिया, जिसने उनके खिलाफ कुछ बात कही थी। गिरोह के सदस्यों ने छात्र से कहा कि वह उस नंबर पर कॉल करके गाली-गलौज करे और जान से मारने की धमकी दे। लेकिन छात्र ने हिम्मत दिखाते हुए उस नंबर को तुरंत अपने फोन से मिटा दिया और कोई संपर्क नहीं किया।

रुपयों का लालच और भारत विरोधी नारे लिखवाने की चाल

शहजाद भट्टी का यह नेटवर्क लगातार अपने शिकारों को पैसों का प्रलोभन देता था, अत्याधुनिक हथियार दिलाने की बात करता था और हर कदम पर समर्थन का दावा करता था। छात्र के अनुसार, इसी चक्रव्यूह में हरमन और अंश नाम का एक अन्य लड़का भी फंस गया था। अंश सीधे तौर पर जट, अजमल गुर्जर और शहजाद भट्टी तीनों के संपर्क में बना हुआ था। अंश ने हरमन को केवल 120 रुपये का लालच दिया और उससे एक खास जगह पर टीटीएच लिखने को कहा। जब हरमन ने ऐसा करने से हिचकिचाहट दिखाई, तो अंश ने उसे ताना मारा कि जब वह शहजाद भट्टी जैसे बड़े नाम से जुड़ा है, तो क्या वह मामूली सा टीटीएच भी नहीं लिख सकता।

हरमन उस दौरान पिज्जा डिलीवरी का काम किया करता था। दबाव और उकसावे में आकर उसने पिज्जा डिलीवरी वाले स्थान पर दीवार पर टीटीएच लिख दिया। यहां टीटीएच का पूरा मतलब तहरीक तालिबान हिंदुस्तान से था, जो देश में अलगाववाद और आतंक फैलाने की एक सोची-समझी साजिश थी। चूंकि यूपीएससी की तैयारी कर रहा छात्र पढ़ा-लिखा और जागरूक था, इसलिए उसने गिरोह के संदेशों का जवाब देना बंद कर दिया और अपनी सीमाएं तय कर लीं। उसने नवंबर के महीने में उनसे हर तरह की बातचीत पूरी तरह खत्म कर दी।

सुरक्षा एजेंसियों की समय पर कार्रवाई और नई जिंदगी

डिजिटल दुनिया में छोड़े गए निशान कभी पूरी तरह गायब नहीं होते। इस नेटवर्क के संपर्क में रहने के कारण खतरा टला नहीं था। मार्च के महीने में भारतीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए नेटवर्क के कई संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान इस छात्र का नाम भी सामने आया, क्योंकि उसके फोन रिकॉर्ड और सोशल मीडिया अकाउंट्स इस सिंडिकेट से जुड़े पाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने मार्च में उसे भी पूछताछ के लिए बुलाया।

सुरक्षा एजेंसियों ने गहन छानबीन के बाद पाया कि यह छात्र किसी देश विरोधी अपराध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं था, बल्कि अनजाने में सोशल मीडिया की रील्स के जरिए इस घातक चक्रव्यूह की परिधि में पहुंच गया था। एजेंसियों ने कठोर दंडात्मक कदम उठाने के बजाय संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने छात्र की विस्तृत काउंसलिंग कराई, कानूनी प्रक्रिया के तहत बाउंड डाउन किया और उसे अपनी पढ़ाई पूरी कर मुख्यधारा में लौटने का पूरा मौका दिया। आज यह छात्र और उसके साथ के अन्य नौजवान सुरक्षित हैं और सोशल मीडिया पर दिखने वाली हिंसक रील्स और पाकिस्तानी आतंकियों के लुभावने दावों के खिलाफ दूसरों को आगाह कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

शहजाद भट्टी कौन है और भारत सरकार ने उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
शहजाद भट्टी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़ा एक प्रमुख मोहरा है, जिसे भारत सरकार ने यूएपीए के तहत विधिवत आतंकवादी घोषित किया है।
शहजाद भट्टी का गिरोह भारतीय युवाओं से कैसे संपर्क करता था?
यह सिंडिकेट इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर गन कल्चर और गैंगस्टर रील्स के जरिए युवाओं से जुड़ता था और झूठी मदद का झांसा देता था।
यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्र से गिरोह ने क्या काम करवाने की कोशिश की थी?
गिरोह ने छात्र को एक हिंदू व्यक्ति का फोन नंबर देकर उसे गाली देने और जान से मारने की धमकी देने का काम सौंपा था, जिसे उसने करने से मना कर दिया।
हरमन नाम के युवक को किस काम के लिए कितने पैसे दिए गए थे?
हरमन को अंश नाम के लड़के ने 120 रुपये देकर पिज्जा डिलीवरी वाले स्थान पर तहरीक तालिबान हिंदुस्तान यानी टीटीएच लिखने के लिए कहा था।
सुरक्षा एजेंसियों ने भटके हुए युवाओं के साथ कैसा व्यवहार किया?
सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति को समझकर युवाओं को काउंसलिंग दी, कानूनी दायरे में बाउंड डाउन किया और उन्हें मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया।
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