ब्रिटेन में आगामी बजट सत्र को लेकर वित्तीय बाजारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। 2024 के आम चुनाव के बाद देश की आर्थिक स्थिति और सरकार की प्राथमिकताओं पर डॉयचे बैंक ने एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है। संजय राजा, श्रेयस गोपाल और माउई ब्रेनन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि ब्रिटेन का राजकोषीय समेकन भारी रूप से कर वृद्धि पर केंद्रित है और इसकी अधिकांश समयसीमा को बाद के वर्षों पर टाल दिया गया है। आगामी 28 अक्टूबर को पेश होने वाले बजट में चांसलर हीली को गंभीर वित्तीय दबावों का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि सरकार के पास वित्तीय लचीलापन या गुंजाइश (फिस्कल हेडरूम) पहले की तुलना में लगभग आधी होने की संभावना जताई गई है।
राजकोषीय नीतियों पर कर का बढ़ता बोझ
डॉयचे बैंक के अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि हालिया चुनावी प्रक्रिया के बाद से ब्रिटेन की राजकोषीय योजना पूरी तरह से टैक्स केंद्रित रही है। पिछले चार राजकोषीय घटनाक्रमों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि शुद्ध आधार पर सरकारी खर्चों में औसतन 82 अरब GBP प्रति वर्ष की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके विपरीत, राजस्व जुटाने के लिए लागू की गई कर वृद्धियों से औसतन केवल 52 अरब GBP प्रति वर्ष प्राप्त हुए हैं। यह असंतुलन दर्शाता है कि सार्वजनिक वित्त पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसे संभालने के लिए केवल सीमित कर उपायों का ही सहारा लिया जा रहा है।
समेकन में देरी और बैकलोडिंग का जोखिम
रिपोर्ट का एक मुख्य बिंदु यह है कि सरकार की राजकोषीय योजनाओं में बैकलोडिंग का सहारा लिया गया है। इसका तात्पर्य यह है कि कठिन आर्थिक निर्णयों और समेकन के उपायों को भविष्य की ओर धकेल दिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 2025/26 की तुलना में 2029/30 में सकल कर समेकन का पैमाना 2.3 गुना अधिक होगा। विश्लेषकों का मानना है कि 7 सितंबर को दिए गए अपने पहले मुख्य भाषण में चांसलर हीली ने एक सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया था, लेकिन सार्वजनिक वित्त की वास्तविक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। घोषणापत्र के वादों और कड़े राजकोषीय नियमों से बंधे होने के कारण 28 अक्टूबर के बजट में नीतिगत बदलाव की बहुत कम गुंजाइश बचती है। ऐसी स्थिति में सरकार को पुनः पुरानी रणनीति अपनाते हुए दक्षता आधारित बचत और चुनिंदा कर उपायों पर ही भरोसा करना पड़ सकता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में AUD/USD और USD/JPY का रुझान
राजकोषीय चिंताओं के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान AUD/USD 0.7200 के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया, जो 14 मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। जापानी येन में आई मजबूती के कारण अमेरिकी डॉलर दबाव में रहा, जिससे फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें ऊंची रखने के संकेतों और भू-राजनीतिक तनावों का असर बेअसर हो गया। इसके अलावा, इस महीने के अंत में RBA द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियन डॉलर को सहारा दिया। हालांकि, चीन के मिश्रित व्यापार संतुलन आंकड़ों के कारण इस जोड़ी में बढ़त सीमित रही। दूसरी ओर, अमेरिकी सत्र में USD/JPY 154.00 के आसपास डगमगाता रहा, जो दिन के निचले स्तर 153.00 से उबरा था। जापान में मजबूत वेतन वृद्धि और Q2 GDP के संशोधित आंकड़ों के कारण अगले सप्ताह BoJ द्वारा दर वृद्धि की उम्मीदों को बल मिला है, जिससे येन को मजबूती मिल रही है।
ऊर्जा बाजार में डीजल क्रैक स्प्रेड का रिकॉर्ड उछाल
वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भले ही पिछले महीनों की तुलना में स्थिर प्रतीत हो रही हों, लेकिन डीजल बाजार से एक अलग तस्वीर सामने आ रही है। WTI कच्चे तेल की तुलना में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स के प्रीमियम को दर्शाने वाला US डीजल क्रैक स्प्रेड हाल ही में पहली बार $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया। कारोबार के दौरान इसने $102.00 प्रति बैरल से अधिक का सर्वकालिक उच्च रिकॉर्ड कायम किया, जो ऊर्जा क्षेत्र में रिफाइनिंग मार्जिन पर बने दबाव को रेखांकित करता है।



















