ब्रिटेन के चांसलर ऑफ द एक्सचेकर यानी वित्त मंत्री जॉन हीली ने सोमवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान दिए एक तय भाषण में साफ कर दिया कि सरकार राजकोषीय अनुशासन में कोई ढील नहीं देगी, भले ही सरकार की उधारी लागत पिछले कई सालों की सबसे ऊंचाई पर पहुंच गई हो।
वैश्विक झटके और उधारी लागत रिकॉर्ड ऊंचाई पर
हीली ने कहा कि इस समय ब्रिटेन को वैश्विक झटकों का असर बहुत गहराई से महसूस हो रहा है और देश की उधारी लागत ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच चुकी है। यानी सरकार को अपने खर्चों के लिए कर्ज जुटाना पहले से कहीं ज्यादा महंगा पड़ रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है, विकास दर भले ही अभी कमजोर हो, लेकिन 2026 की पहली छमाही में ब्रिटेन G7 देशों में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था रहा। उत्पादकता, जो सालों से पिछड़ी हुई थी, अब आखिरकार सुधरनी शुरू हो गई है।
हीली ने कहा कि वे अर्थव्यवस्था में बढ़ती लागत पर रोक लगाना चाहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो खर्च पर लगाम कसना और सरकार के वित्तीय हालात को स्थिर करना ही अभी उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, भले ही इसके लिए उन्हें राजनीतिक रूप से मुश्किल फैसले क्यों न लेने पड़ें।
रीव्ज़ की पहल को आगे बढ़ाएंगे, बजट में मिलेगा राजकोषीय विकेंद्रीकरण का खाका
हीली ने अपने रुख को रीव्ज़ की तरफ से पहले शुरू किए गए राजकोषीय अनुशासन के प्रयास का ही विस्तार बताया और कहा कि वे नए सिरे से शुरुआत करने के बजाय उसी काम को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने बताया कि आने वाले बजट में वे राजकोषीय विकेंद्रीकरण यानी केंद्र से क्षेत्रों को वित्तीय अधिकार सौंपने की रूपरेखा पेश करेंगे। हालांकि भाषण के दौरान उन्होंने यह नहीं बताया कि इस रोडमैप के तहत आखिर किन अधिकारों या फंडिंग व्यवस्थाओं में बदलाव होगा, इसका पूरा ब्योरा बजट पेश होने पर ही सामने आएगा।
एआई का मौका नहीं गंवाएंगे, लेकिन निगरानी जरूरी
हीली ने अपने भाषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा, "मैं एआई के मौके को हाथ से जाने नहीं दूंगा, लेकिन इसे बिना निगरानी के फैलने भी नहीं दूंगा।" उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एआई से जुड़े खतरों का सामना करना जरूरी है, यानी सरकार तकनीक को बढ़ावा देने के साथ-साथ उससे जुड़े जोखिमों पर भी नजर रखेगी। हीली ने यह भी कहा कि एआई तकनीक को लेकर लोगों की जो चिंताएं हैं, वे उनसे खुद भी सहमत हैं, और यह तकनीक श्रम बाजार को उन तरीकों से बदल देगी जिन्हें अभी अर्थशास्त्री भी पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं।
भाषण का संकेत क्या है
हीली के इन बयानों से साफ है कि सरकार एक साथ दो मोर्चों पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, एक तरफ उधारी और खर्च पर सख्त लगाम, दूसरी तरफ यह भरोसा दिलाना कि विकास और उत्पादकता में सुधार जारी है। रिकॉर्ड उधारी लागत और एआई से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों की चेतावनी के साथ बजट में राजकोषीय विकेंद्रीकरण के रोडमैप का वादा जोड़कर हीली ने संकेत दिया है कि अगला बजट अनुशासन और सुधार, दोनों मोर्चों पर बारीकी से देखा जाएगा।



















