वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी मौद्रिक नीति घोषणा को लेकर हलचल तेज हो गई है। वित्तीय बाजारों ने गुरुवार को यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर उसे 2.5 प्रतिशत करने की संभावना को पूरी तरह से शामिल कर लिया है। इस निर्णय की मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ते अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में आया भारी उछाल है। इसी बीच, बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली के आक्रामक बयानों ने पाउंड स्टर्लिंग को निचले स्तरों पर मजबूत सहारा प्रदान किया है, क्योंकि वैश्विक संघर्षों के कारण ब्रिटेन में महंगाई का जोखिम लगातार बना हुआ है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की ब्याज दर रणनीति और ऊर्जा कीमतों का प्रभाव
यूरोपीय क्षेत्र में ऊर्जा की बढ़ती लागत ने यूरोपीय सेंट्रल बैंक को अपनी मौद्रिक नीति को और कड़ा करने पर मजबूर किया है। बाजार सहभागियों का मानना है कि गुरुवार को होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में ब्याज दरों को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया जाएगा। मध्य पूर्व में तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण कच्चे तेल और परिष्कृत ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। जब ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे विनिर्माण और परिवहन लागत में वृद्धि होती है, जो अंततः उपभोक्ताओं पर मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ाती है। इस मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए यूरोपीय सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जिससे यूरो को अमेरिकी डॉलर और अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले समर्थन मिल रहा है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड का सख्त रुख और ब्रिटेन में मुद्रास्फीति का खतरा
बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने हालिया बयानों में स्पष्ट किया है कि भू-राजनीतिक तनावों के कारण ईंधन और ऊर्जा उत्पाद महंगे हो रहे हैं। उनके अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के साथ-साथ यूक्रेनी हमलों द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों को पहुंचाए गए नुकसान ने डीजल और पेट्रोल की वैश्विक कीमतों को बढ़ा दिया है। स्पीचट्रैकर विश्लेषण के अनुसार, बेली का वक्तव्य स्कोर 7.2/10 दर्ज किया गया, जो उनके ऐतिहासिक औसत 6/10 से काफी अधिक है। यह उच्च स्कोर दर्शाता है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड का रुख सामान्य से अधिक आक्रामक है। गवर्नर बेली ने चेतावनी दी है कि ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के ऊपर जाने का जोखिम अभी भी बना हुआ है। इस कड़े रुख के कारण पाउंड स्टर्लिंग में गिरावट आने पर निवेशकों की ओर से खरीदारी का समर्थन देखा जा रहा है।
उंड स्टर्लिंग का ऐतिहासिक महत्व और वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी
पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी चालू मुद्रा है, जिसकी शुरुआत वर्ष 886 ईस्वी में हुई थी। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में चौथी सबसे ज्यादा ट्रेड की जाने वाली करेंसी है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक मुद्रा कारोबार में पाउंड स्टर्लिंग की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है, जिसका दैनिक औसत कारोबार 630 अरब डॉलर का है। पाउंड स्टर्लिंग को बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा जारी किया जाता है। इसके प्रमुख ट्रेडिंग जोड़ों में जीबीपी/यूएसडी शामिल है, जिसे ट्रेडर की भाषा में 'केबल' कहा जाता है और यह कुल विदेशी मुद्रा व्यापार का 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इसके अलावा, जीबीपी/जेपीवाई जिसे 'ड्रैगन' कहा जाता है, 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जबकि ईयूआर/जीबीपी जोड़ी 2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण
पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक लक्ष्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत लगभग 2 प्रतिशत की वार्षिक मुद्रास्फीति दर को आदर्श माना जाता है। जब मुद्रास्फीति इस लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में वृद्धि करता है। ऊंची ब्याज दरों से कर्ज महंगा हो जाता है, जिससे अर्थव्यवस्था में मांग घटती है और महंगाई पर नियंत्रण पाना आसान होता है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए ऊंची ब्याज दरें ब्रिटेन को निवेश का एक आकर्षक केंद्र बनाती हैं, जिससे पाउंड स्टर्लिंग की मांग बढ़ती है। इसके विपरीत, यदि आर्थिक विकास सुस्त पड़ता है और महंगाई बहुत कम हो जाती है, तो केंद्रीय बैंक दरों में कटौती करता है ताकि व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके। इसके अतिरिक्त, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई तथा रोजगार के आंकड़े भी पाउंड की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) भी एक अहम संकेतक है, जहां निर्यात बढ़ने पर देश की मुद्रा मजबूत होती है।
EUR/USD का तकनीकी विश्लेषण और लाइव मार्केट परिदृश्य
लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD मुद्रा जोड़ी वर्तमान में 1.16 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 1.16 से 0.13 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्शाती है। इस जोड़ी का 52 सप्ताह का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच रहा है, जबकि व्यापारिक वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 59 पर है, जो मध्यम तेजी की स्थिति को दर्शाता है। एमएसीडी (MACD) सूचक 0.00 पर अपने सिग्नल लाइन के साथ तटस्थ से थोड़ा मंदी का संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय, 50-दिवसीय और 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) सभी 1.16 के आसपास केंद्रित हैं, जबकि 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 1.15 और 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 1.16 पर है। बोलिंजर बैंड्स का दायरा 1.15 से 1.17 के बीच है, और औसत दिशात्मक सूचकांक (ADX) 27 पर एक मजबूत रुझान की पुष्टि करता है। अल्पकालिक समर्थन स्तर 1.15 पर और प्रतिरोध स्तर 1.17 पर देखा जा रहा है।
वैश्विक मुद्रा बाजार, कमोडिटी और क्रिप्टो रुझान
वैश्विक वित्तीय बाजारों में अन्य परिसंपत्तियों पर भी महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD जोड़ी 0.7200 के स्तर से ऊपर समेकित होती दिखी, जिसे चीन के मुद्रास्फीति आंकड़ों और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदों से समर्थन मिला। जापानी येन में मजबूती के कारण USD/JPY जोड़ी यूरोपीय कारोबारी सत्र में 153.50 के आसपास मंदी के दायरे में रही, जिसे बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति सामान्यीकरण की संभावनाओं का सहारा मिला। कमोडिटी बाजार में सोने ने लगातार तीन दिनों की गिरावट को रोकते हुए वापसी की और 4,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर को फिर से छू लिया। वहीं, ऊर्जा बाजार में अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया और 102.00 डॉलर का रिकॉर्ड स्तर छू गया। क्रिप्टोकरेंसी क्षेत्र में पाई नेटवर्क (PI) अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज पर समर्थन पाने के बाद 0.098 डॉलर से ऊपर कारोबार करता नजर आया।



















