अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में स्विस फ्रैंक (CHF) की लगातार बढ़ती मजबूती और चीनी युआन (CNY) के निचले स्तर ने स्विट्जरलैंड की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा क्षमता के सामने एक कठिन चुनौती खड़ी कर दी है। वित्तीय संस्थान कॉमर्ज़बैंक के वरिष्ठ विशेषज्ञ माइकल फिफ्स्टर द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन के अनुसार, स्विट्जरलैंड के कुल निर्यात आंकड़े पहली नज़र में मजबूत नजर आते हैं, लेकिन बहुमूल्य धातुओं के व्यापार को अलग करते ही देश के पारंपरिक उद्योग क्षेत्रों की संरचनात्मक कमजोरी सतह पर आ जाती है। इस अध्ययन में दवा उद्योग, रासायनिक क्षेत्र और घड़ी निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर मुद्रा की विनिमय दर के अलग-अलग प्रभावों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है।
बहुमूल्य धातुओं के प्रभाव से उपजी भ्रम की स्थिति
साल 2019 से 2024 के दौरान स्विट्जरलैंड ने अपने शीर्ष अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कुल मिलाकर बाजार हिस्सेदारी हासिल की थी। अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापारिक शुल्कों के कारण प्रभावित वर्ष 2025 के आंकड़ों को शामिल करने के बावजूद यह सकारात्मक रुझान बना रहता है। हालांकि, आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर एक भिन्न तस्वीर सामने आती है। जब निर्यात आंकड़ों से बहुमूल्य धातुओं (जैसे सोना और चांदी) के कारोबार को घटा दिया जाता है, तो स्विट्जरलैंड ने औसतन अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के बीच बाजार हिस्सेदारी गंवाई है। इससे साफ होता है कि वैश्विक बाजारों में पारंपरिक स्विस विनिर्मित सामानों की मांग पर प्रतिकूल दबाव बन रहा है।
दवा और रसायन क्षेत्रों में बाजार हिस्सेदारी का नुकसान
स्विट्जरलैंड के सबसे बड़े निर्यात वर्ग यानी दवा और औषधि (मेडिसिन) क्षेत्र में 2019 के बाद से लगातार गिरावट देखी गई है। इस क्षेत्र में स्विस कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में दो अंकों में प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। यद्यपि इस दौरान चीन की हिस्सेदारी में मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन स्विस कंपनियों के हाथ से निकले बाजार का अधिकांश हिस्सा अन्य प्रतिस्पर्धी देशों ने हासिल किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दवा क्षेत्र में आई गिरावट के पीछे मुख्य वजह केवल चीनी युआन की कमजोरी नहीं, बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों से मिलने वाली कड़ी चुनौती है।
दूसरी ओर, रासायनिक (केमिकल्स) क्षेत्र में स्विट्जरलैंड को हुए नुकसान का लाभ किसे मिला है, वह पूरी तरह स्पष्ट है। रसायन उद्योग में चीन ने न केवल स्विस निर्यातकों की लागत पर बल्कि कई अन्य देशों को पीछे छोड़ते हुए अपनी बाजार हिस्सेदारी में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। इस विशिष्ट क्षेत्र में स्विस फ्रैंक और चीनी युआन की विनिमय दर के अंतर का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलता है।
घड़ी उद्योग की मजबूती और अन्य वैश्विक मुद्रा बाजार
विभिन्न उद्योगों में विनिमय दर का असर एक जैसा नहीं रहा है। स्विट्जरलैंड का विश्व प्रसिद्ध घड़ी निर्माण उद्योग मजबूत स्विस फ्रैंक के बावजूद बेहद लचीला बना हुआ है। इस क्षेत्र में मुद्रा की मजबूती का प्रभाव काफी कम देखा गया है, जो यह दर्शाता है कि उच्च मूल्य वाले और विशिष्ट उत्पादों पर विनिमय दर का असर सीमित रहता है।
इस वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के बीच अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी हलचल देखी जा रही है। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर (GBP/USD) की विनिमय दर 1.3630 के स्तर के आसपास समेकित हो रही है। अमेरिकी डॉलर 14 मई के बाद के अपने निचले स्तर से उबरने की कोशिश में है। वहीं दूसरी तरफ, यूरो और अमेरिकी डॉलर (EUR/USD) की दर 1.1670 के करीब बनी हुई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, चढ़ते बॉन्ड प्रतिफल और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ी हैं। इन परिस्थितियों से यह संभावना बलवती हुई है कि यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) सितंबर की अपनी मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी कर सकता है।
क्रिप्टोकरेंसी और अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा कदम
डिजिटल एसेट बाजार में जोखिम उठाने की भावना सुधरने से बिटकॉइन (BTC) 80,000 डॉलर के स्तर के ऊपर मजबूती से कारोबार कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा दीर्घकालिक बॉन्ड बाजार में बढ़ती ब्याज दरों को नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों से क्रिप्टो बाजार को समर्थन मिल रहा है। इस दौरान एयरोड्रोम फाइनेंस (AERO) और वर्चुअल्स प्रोटोकॉल (VIRTUAL) जैसे क्रिप्टो टोकनों ने शानदार प्रदर्शन दिखाया है।
इधर, अमेरिकी वित्त विभाग ने बॉन्ड बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। 12:32 GMT पर जारी सूचना के अनुसार, विभाग 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड पुनर्खरीद (बायबैक) कार्यक्रम के आकार को दोगुना करने जा रहा है। प्रति ऑपरेशन अधिकतम 2 अरब डॉलर की सीमा को बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह पुनर्खरीद प्रक्रिया 9 सितंबर से शुरू होकर 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगी।



















