घरेलू इक्विटी बाजारों में गुरुवार, 8 अक्टूबर को भारी दबाव का माहौल देखने को मिला, जब बिकवाली के तेज झोंके ने दोनों प्रमुख सूचकांकों को नीचे खींच लिया। वैश्विक वित्तीय बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और घरेलू स्तर पर ब्याज दरों से जुड़ी चिंताओं के बीच दलाल स्ट्रीट पर पूरे कारोबारी सत्र के दौरान मंदड़ियों का दबदबा बना रहा। दिन के कारोबार की समाप्ति तक बीएसई बेंचमार्क इंडेक्स 1,000 अंक से ज्यादा फिसल गया, जिसकी वजह से बाजार में निवेश करने वालों की कुल संपत्ति में तकरीबन 10 लाख करोड़ रुपये की भारी चपत लग गई।
प्रमुख सूचकांकों में तेज फिसलन और बाजार का व्यापक रुख
दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार लाल निशान में बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत टूटकर 71,593.24 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी तरफ, एनएसई निफ्टी 371.25 अंक अथवा 1.64 प्रतिशत का गोता लगाकर 22,231.80 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की चौड़ाई पूरी तरह से गिरावट के पक्ष में झुकी नजर आई। सत्र के दौरान कुल 3,280 शेयरों ने लाल निशान में कारोबार खत्म किया, जबकि केवल 951 शेयर बढ़त दर्ज करने में कामयाब रहे और 180 शेयरों के भाव में कोई फेरबदल दर्ज नहीं किया गया। केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बिकवाली की चपेट में रहे और दोनों में 2 प्रतिशत से अधिक का नुकसान दर्ज हुआ।
सेक्टरवार स्थिति: रियल्टी और एनर्जी में मची अफरातफरी
सेक्टरों के स्तर पर बिकवाली का असर बेहद व्यापक रहा और लगभग सभी सेक्टोरल सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। सबसे तगड़ा झटका निफ्टी रियल्टी इंडेक्स को लगा, जो 2.98 प्रतिशत लुढ़क गया। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा निफ्टी एनर्जी इंडेक्स भी 2.87 प्रतिशत नीचे आ गया। इसके साथ ही निफ्टी इंफ्रा में 2.66 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई में 2.47 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा में 2.38 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 2.01 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। चौतरफा बिकवाली के इस दौर में केवल सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का निफ्टी आईटी सूचकांक ही 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त लेकर किसी तरह हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहा।
मुनाफे और नुकसान वाले प्रमुख शेयरों का लेखा-जोखा
बाजार के सामान्य रुझान के विपरीत कुछ ही शेयर बढ़त बनाने में सफल रहे। इंफोसिस के शेयर में 0.50 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 0.34 प्रतिशत और एक्सिस बैंक में 0.20 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके विपरीत बिकवाली का सबसे कड़ा प्रहार लार्जकैप और अन्य प्रमुख कंपनियों पर हुआ। अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में 5.36 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई। इसके अलावा जेएसडब्ल्यू स्टील 4.46 प्रतिशत, आईटीसी 4.03 प्रतिशत, मैक्स हेल्थकेयर 3.81 प्रतिशत, इंडिगो 3.55 प्रतिशत और श्रीराम फाइनेंस 3.24 प्रतिशत तक फिसलकर बंद हुए।
बाजार में आई इस तेज गिरावट की मुख्य वजहें
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय इक्विटी बाजार में 8 अक्टूबर को दर्ज हुई इस गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक जिम्मेदार रहे। भारतीय रिजर्व बैंक ने तीन साल के लंबे अंतराल के बाद अपनी प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि करके इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है और अपनी मौद्रिक नीति का रुख कैलिब्रेटेड टाइटनिंग में तब्दील कर दिया है। इस कदम से बढ़ती ब्याज दरों को लेकर निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बन गया। दूसरी तरफ, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल देखने को मिला, जहां 30 साल की यील्ड 5.71 प्रतिशत और 10 साल की यील्ड 5.3 प्रतिशत के पार निकल गई। बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों पर पहुंचने से इक्विटी के मुकाबले फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक मानी जाने लगती हैं। इसके अलावा, मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया, जिससे आयात लागत बढ़ने और मुद्रास्फीति में इजाफे का खतरा गहरा गया है।



















