अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों पर लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली गिरावट दर्ज होने के बाद भी कीमती धातुओं के बाजार में चांदी खुद को संभालने में नाकाम रही है। तकनीकी मोर्चे पर 60 डॉलर के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलने के बाद मंदड़ियों की पकड़ और मजबूत हो गई है, जिससे यह सफेद धातु अपने दो महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रही है।
तकनीकी संकेतकों में मंदी के गहरे संकेत
दैनिक चार्ट पर चांदी का रुख लगातार नकारात्मक बना हुआ है। एक्सएजी/यूएसडी (XAG/USD) प्रमुख तकनीकी पैमानों पर 50-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) से नीचे बना हुआ है। किसी भी परिसंपत्ति का इन तीनों अहम मूविंग एवरेज से नीचे टिके रहना तकनीकी रूप से लंबी और मध्यम अवधि में मंदी का स्पष्ट संकेत माना जाता है।
मोमेंटम इंडिकेटर्स भी इस कमजोरी की पुष्टि कर रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) फिसलकर 30 के मध्य स्तर की ओर बढ़ रहा है, जो यह दर्शाता है कि बाजार ओवरसोल्ड क्षेत्र की तरफ जा रहा है। वहीं मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (एमएसीडी) शून्य से नीचे बना हुआ है और इसकी नकारात्मक रेखा यह संकेत दे रही है कि आने वाले सत्रों में भी गिरावट का दबाव कायम रह सकता है।
ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक चांदी (SI=F) का भाव 58.97 डॉलर पर देखा गया है, जो पिछले बंद भाव 59.90 डॉलर के मुकाबले 1.56 प्रतिशत नीचे है। सत्र के दौरान एक्सएजी/यूएसडी में 58.83 डॉलर के आसपास कारोबार दर्ज हुआ, जो दिन के आधार पर 1.87 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के मुकाबले 17.75 गुना तक उछल गया है, जिससे यह जाहिर होता है कि गिरावट के इस दौर में बाजार में भारी बिकवाली हुई है। 52 हफ्तों के दायरे में चांदी 45.85 डॉलर से 121.30 डॉलर के बीच रही है।
महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर और समर्थन क्षेत्र
मौजूदा तकनीकी संरचना के अनुसार 50-दिवसीय ईएमए 63.55 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 67.31 डॉलर पर है, जहां 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे आना एक डेथ क्रॉस दर्शाता है। इसके अलावा 20-दिवसीय ईएमए 62.23 डॉलर, 50-दिवसीय एसएमए 64.07 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 72.53 डॉलर पर स्थित है। आरएसआई (14) 36 के स्तर पर है, जबकि एमएसीडी -1.40 पर बना हुआ है जो -0.98 की सिग्नल लाइन के मुकाबले -0.42 का मंदी वाला हिस्टोग्राम दिखा रहा है।
बोलिंजर बैंड (20,2) का दायरा 58.12 डॉलर से 67.38 डॉलर के बीच है और इसका मध्य स्तर 62.75 डॉलर पर है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (एटीआर) 1.49 डॉलर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा को दर्शाता है। शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए पिवट पॉइंट 59.51 डॉलर पर आंका गया है। यदि कीमतों में और गिरावट आती है तो पहला समर्थन एस1 (S1) 58.18 डॉलर पर और दूसरा समर्थन एस2 (S2) 57.40 डॉलर पर मौजूद है। वहीं ऊपर की ओर पहला प्रतिरोध आर1 (R1) 60.29 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध आर2 (R2) 61.62 डॉलर पर देखा जा रहा है। 20-दिवसीय आधार पर अहम समर्थन 58.73 डॉलर और प्रतिरोध 66.94 डॉलर के पास है।
मूल्य संचय और निवेश माध्यम के रूप में चांदी
चांदी ऐतिहासिक रूप से मूल्य संचय करने और विनिमय के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली एक प्रमुख कीमती धातु रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में सोने की तुलना में इसे कम तरजीह दी जाती है, फिर भी निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए चांदी का रुख करते हैं। उच्च मुद्रास्फीति के दौर में मुद्रा के अवमूल्यन से बचने के लिए इसे एक सुरक्षित विकल्प और बचाव साधन के रूप में भी देखा जाता है।
निवेशक चांदी में कई तरीकों से पूंजी लगा सकते हैं। इसे सिक्कों या सिल्लियों के रूप में भौतिक रूप से खरीदा जा सकता है, अथवा एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) जैसे आधुनिक वित्तीय साधनों के माध्यम से भी इसका कारोबार किया जा सकता है, जो वैश्विक बाजारों में चांदी की हाजिर कीमतों पर नजर रखते हैं।
चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले वृहद आर्थिक कारक
चांदी की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव कई भू-राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है या गहरी मंदी की आशंका गहराती है, तो निवेशक सुरक्षित ठिकानों की ओर भागते हैं। हालांकि इस मामले में सोने की मांग अधिक रहती है, लेकिन चांदी को भी इसका कुछ फायदा मिलता है। एक ऐसी परिसंपत्ति होने के नाते जिस पर कोई निश्चित ब्याज नहीं मिलता, ब्याज दरों में कमी आने पर चांदी की कीमतों में तेजी आने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की दिशा भी चांदी के लिए बेहद अहम होती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इसका मूल्य डॉलर (XAG/USD) में तय किया जाता है। एक मजबूत डॉलर आम तौर पर चांदी की तेजी को रोकता है, जबकि डॉलर की कमजोरी इसे ऊपर की ओर धकेलने में मदद करती है। अन्य कारकों में प्रत्यक्ष निवेश मांग, खदानों से आपूर्ति और रीसाइक्लिंग दरें शामिल हैं। सोने की तुलना में प्रकृति में चांदी अधिक प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, जिसके कारण खनन आपूर्ति का असर भी इसकी कीमत पर तेजी से पड़ता है।
औद्योगिक मांग और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका
चांदी केवल एक वित्तीय संपत्ति या आभूषण की धातु नहीं है, बल्कि इसका एक विशाल हिस्सा उद्योग जगत में उपयोग किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में चांदी की भारी खपत होती है, क्योंकि तांबे और सोने की तुलना में इसकी विद्युत चालकता सबसे अधिक होती है। जब औद्योगिक उत्पादन में उछाल आता है तो मांग बढ़ने से कीमतें चढ़ती हैं, जबकि औद्योगिक सुस्ती इसके भाव को नीचे खींचती है।
इस संदर्भ में संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के बड़े औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न विनिर्माण प्रक्रियाओं में चांदी का भारी उपयोग करते हैं। दूसरी ओर, भारत में आभूषणों के लिए आम उपभोक्ताओं की ओर से आने वाली मांग वैश्विक स्तर पर चांदी के मूल्य निर्धारण में अहम भूमिका निभाती है।
सोने के साथ संबंध और गोल्ड/सिल्वर अनुपात
ऐतिहासिक रूप से चांदी की चाल काफी हद तक सोने के नक्शेकदम पर चलती है। सुरक्षित निवेश परिसंपत्ति के समान दर्जे के कारण जब सोने में तेजी आती है, तो चांदी भी आमतौर पर बढ़त दर्ज करती है। इन दोनों धातुओं के बीच के सापेक्ष मूल्यांकन को समझने के लिए निवेशक गोल्ड/सिल्वर अनुपात का विश्लेषण करते हैं।
यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोने की कीमत के बराबर पहुंचने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। बाजार विश्लेषक इस अनुपात के बहुत ऊपर जाने को इस बात का संकेत मानते हैं कि चांदी अपने वास्तविक मूल्य से कम आंकी गई है, या फिर सोना जरूरत से ज्यादा महंगा हो गया है। इसके विपरीत, यदि यह अनुपात काफी नीचे गिर जाता है, तो यह माना जाता है कि चांदी की तुलना में सोना कम मूल्यांकित हो सकता है।
अन्य बाजारों का हाल और भू-राजनीतिक परिदृश्य
वैश्विक वित्तीय बाजारों के अन्य हिस्सों में गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.6950 के ठीक ऊपर स्थिर होता दिखा, जहां ट्रेडर पश्चिम एशिया के संकट पर नजर बनाए हुए हैं। पेंटागन द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित हमलों के लिए सैन्य तैयारियों के आदेश की जानकारी सामने आई है। इस स्थिति ने भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को बनाए रखा है, जो एफओएमसी की सख्त मिनट्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों के साथ मिलकर अमेरिकी डॉलर को मजबूती दे रहा है।
दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के नीचे फिसल गया, क्योंकि ऐसी अटकलें हैं कि जापानी अधिकारी अपनी मुद्रा को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप कर सकते हैं। अमेरिकी डॉलर 18 महीने के उच्चतम स्तर के करीब से मुनाफावसूली के चलते थोड़ा नरम हुआ। इसी दौरान सोने ने कुछ संभलते हुए बढ़त दर्ज की और प्रति ट्रॉय औंस 4,150 डॉलर के स्तर के आसपास पहुंच गया। सोने की यह वापसी अमेरिकी डॉलर की गति में कुछ कमी और 10 से 30 वर्ष की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई हल्की गिरावट के बाद देखने को मिली है। इसके बावजूद चांदी कमजोर बनी हुई है और बिकवाली के भारी दबाव से जूझ रही है।






















