एप्पल के शेयरों को गुरुवार को तगड़ा झटका लगा। कारोबार के दौरान यह शेयर 5% तक लुढ़क गया और सिर्फ एक ही दिन में कंपनी की मार्केट वैल्यू से 215 अरब डॉलर से ज्यादा रकम साफ हो गई। यह बिकवाली ठीक उस वक्त आई जब आईफोन बनाने वाली इस कंपनी ने अपने कई प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की पुष्टि की और इसकी वजह प्रोडक्ट बनाने की बढ़ती लागत को बताया।
यह गिरावट अचानक नहीं आई। पिछले हफ्ते ही CEO टिम कुक ने कहा था कि अब "कीमतों में बढ़ोतरी टाली नहीं जा सकती।" उन्होंने इसकी वजह AI इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े पैमाने पर हो रहे विस्तार को बताया, जिसकी वजह से दुनिया भर में मेमोरी और स्टोरेज चिप की सप्लाई पर भारी दबाव पड़ रहा है।
कौन से प्रोडक्ट होंगे महंगे
एप्पल ने मैकबुक, आईपैड और कई दूसरे डिवाइस के दाम बढ़ाने की पुष्टि की है। नई कीमतें कुछ इस तरह हैं:
- MacBook Neo एंट्री मॉडल: 599 डॉलर से बढ़कर 699 डॉलर
- MacBook Air 512GB: 1099 डॉलर से बढ़कर 1299 डॉलर
- MacBook Pro 1T: 1699 डॉलर से बढ़कर 1999 डॉलर
- iPad Air 128GB: 599 डॉलर से बढ़कर 749 डॉलर
- iPad Pro Wifi 256GB: 999 डॉलर से बढ़कर 1199 डॉलर
एप्पल ने क्या सफाई दी
कंपनी ने एक बयान में कहा, "कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री इस वक्त एक अभूतपूर्व चुनौती का सामना कर रही है। AI डेटा सेंटर के तेज विस्तार ने मेमोरी और स्टोरेज की मांग में असाधारण उछाल ला दिया है। हमने पहले कभी किसी कंपोनेंट की कीमत को इतनी तेजी से, इतना ज्यादा बढ़ते नहीं देखा।" एप्पल ने आगे कहा कि वह अब "उस मुकाम पर पहुंच गई है जहां कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ानी ही पड़ेंगी," यानी आगे और बढ़ोतरी की गुंजाइश भी खुली रखी गई है। कंपनी ने कहा, "हम जानते हैं कि यह खबर अच्छी नहीं है, और हम लगातार समाधान खोजने में जुटे हैं।"
दाम बढ़ने के पीछे चिप की किल्लत
पिछली तीन तिमाहियों में मेमोरी और स्टोरेज की कीमतें चार गुना तक बढ़ चुकी हैं, जिससे एप्पल जैसी कंपनियों के लिए अपने प्रोडक्ट बनाना और महंगा हो गया है। दूसरी ओर, माइक्रोन (MU) और AMD जैसी चिप कंपनियों को इस किल्लत और बढ़ती मांग का फायदा मिला है। एप्पल अब भी अपनी खुद की आत्मनिर्भर चिप बनाने की दौड़ में पीछे है और उसे उसी चिप टेक्नोलॉजी पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिसकी इस साल किल्लत देखी गई है।
AI रणनीति पर सवालों ने बढ़ाया दबाव
एप्पल की AI रणनीति को लेकर बनी हुई चिंताएं भी शेयर पर दबाव बढ़ा रही हैं। इसी महीने हुई सालाना वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस के बाद भी निवेशक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि सिरी के बहुप्रतीक्षित अपग्रेड की कोई पक्की लॉन्च तारीख अब तक तय नहीं हुई है। इस बात ने भी निराशा बढ़ाई है कि इसके अहम एजेंटिक फीचर्स अंदरूनी तौर पर काफी हद तक थर्ड पार्टी मॉडल्स पर निर्भर रह सकते हैं। इससे यह धारणा कमजोर पड़ी है कि एप्पल नजदीकी भविष्य में एक स्वतंत्र, हाई मार्जिन वाली AI ताकत बनकर उभरेगी। इसके अलावा यह बदलाव कंपनी के नेतृत्व के लिए एक नाजुक वक्त पर आया है, क्योंकि बाजार सितंबर में होने वाले एक दुर्लभ, पीढ़ीगत CEO बदलाव की तैयारी कर रहा है।













