शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों के लिए इस साल का सबसे बड़ा मौका दस्तक दे सकता है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की सितंबर में करीब ₹30,000 करोड़ का आईपीओ लाने की तैयारी है। अगर यह इश्यू तय समय पर बाजार में उतरता है, तो यह भारत के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ की कतार में शामिल हो जाएगा। सबसे खास बात यह है कि आम निवेशकों को पहली बार देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में सीधी हिस्सेदारी खरीदने का रास्ता मिलेगा।
पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा इश्यू
यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) के आधार पर आएगा। इसका मतलब है कि कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक ही अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलेंगे। इसी वजह से इस इश्यू से जुटाई गई रकम कंपनी के खाते में नहीं जाएगी, बल्कि शेयर बेचने वाले निवेशकों को मिलेगी। आईपीओ के बाद एक्सचेंज की वैल्यू ₹5 लाख करोड़ के पार आंकी जा सकती है। इससे पहले कंपनी देश और विदेश के बड़े निवेशकों को लुभाने के लिए रोड शो भी शुरू करने वाली है।
कौन कितने शेयर बेचेगा
ड्राफ्ट दस्तावेज के मुताबिक इस इश्यू में करीब 14.89 करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखे जाएंगे, जो एक्सचेंज की कुल इक्विटी का लगभग 6 फीसदी हिस्सा है। सबसे बड़ी बिक्री स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की तरफ से होगी, जो करीब 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा। इसके साथ एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरिशस), बैंक ऑफ बड़ौदा, जीआईसी, न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस जैसी संस्थाएं भी अपनी हिस्सेदारी घटाएंगी। दिलचस्प बात यह है कि एलआईसी, जो 10.72 फीसदी हिस्सेदारी के साथ एक्सचेंज की सबसे बड़ी शेयरधारक है, इस आईपीओ में एक भी शेयर नहीं बेच रही।
2016 से अटका था रास्ता
एक्सचेंज ने पहली बार 2016 में ही आईपीओ लाने की योजना बनाई थी। लेकिन उस समय नियामकीय अड़चनों और गवर्नेंस से जुड़े कुछ मामलों की वजह से इसे हरी झंडी नहीं मिल पाई। इसके बाद कंपनी ने अपने नियमों और कामकाज के तौर-तरीकों में लगातार सुधार किए। हाल में सेबी से जरूरी मंजूरी मिलने के बाद अब इश्यू लॉन्च करने की कवायद तेज हो गई है, और करीब एक दशक का इंतजार खत्म होने के करीब है।
कैसा रहा कंपनी का वित्तीय हाल
वित्त वर्ष 2025-26 में एक्सचेंज का शुद्ध मुनाफा 15 फीसदी घटकर ₹10,302 करोड़ रह गया, और कुल आय में भी हल्की गिरावट दर्ज हुई। हालांकि मार्च तिमाही की तस्वीर इससे बेहतर रही। इस दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ 8 फीसदी बढ़कर ₹2,871 करोड़ पर पहुंच गया और कुल आय में 22 फीसदी की मजबूत बढ़ोतरी हुई। यानी सालाना आंकड़े भले नरम रहे, लेकिन आखिरी तिमाही में कारोबार ने रफ्तार पकड़ी।
निवेशकों के लिए क्यों अहम
एक्सचेंज देश के सबसे मजबूत और भरोसेमंद वित्तीय संस्थानों में गिना जाता है, इसलिए इसका आईपीओ निवेशकों के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। अगर यह सितंबर में लॉन्च होता है, तो हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,870 करोड़ के आईपीओ का रिकॉर्ड भी पीछे छूट सकता है। यही वजह है कि शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों की निगाहें अब इस मेगा इश्यू पर टिकी हैं। यह खबर सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।











