अमेरिकी शेयर बाजार के लिए सोमवार की सुबह आम नहीं रही। डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में बैठे-बैठे ही न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) और नैस्डैक, दोनों के लिए कारोबार की शुरुआती घंटी बजाई। किसी ट्रेडिंग फ्लोर पर पहुंचे बिना एक साथ दो एक्सचेंज की घंटी बजाने का यह अंदाज साफ बताता है कि ट्रंप अपने राष्ट्रपति पद को शेयरों की चाल के साथ कितनी मजबूती से जोड़ना चाहते हैं।
ट्रंप अकाउंट्स की शुरुआत बनी मौका
ओवल ऑफिस का यह आयोजन दरअसल एक नई योजना, ट्रंप अकाउंट्स, की शुरुआत का जश्न भी था। ये अकाउंट बच्चों के लिए बनाए गए हैं, ताकि वे कम उम्र से ही शेयर सूचकांकों में पैसा लगा सकें। रिपब्लिकन पार्टी ने इस विचार को 2025 के टैक्स और खर्च में कटौती वाले बिल में शामिल किया था और इसे साल की बड़ी वित्तीय योजना का हिस्सा बना दिया। कारोबार शुरू होते ही ट्रंप ने जबरदस्त तेजी का दावा किया। उन्होंने कहा, 'यह ऊपर जाने वाला है, मुझे लगता है बाजार आसमान छू लेगा।' इस तरह उन्होंने इस पल को नए और युवा निवेशकों के लिए एक बड़ी शुरुआत के रूप में पेश किया।
बेसेंट बोले, ज्यादातर परिवार बाजार से बाहर
घंटी बजाने के इस समारोह से पहले ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह योजना आखिर क्यों जरूरी है। उन्होंने दलील दी कि अमेरिका में बड़ी संख्या में लोग शेयर खरीदते ही नहीं, जिससे बाजार चढ़ने पर फायदा उठाने वालों का दायरा सिमट जाता है। बेसेंट के मुताबिक इसका लाभ अक्सर अमीर घरों तक पहुंचता है, जबकि बाकी कमाई दशकों तक रिटायरमेंट योजनाओं में बंद रहती है, जिन तक आम परिवार आसानी से नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा, '38% अमेरिकी परिवारों की हमारे शानदार इक्विटी बाजारों में कोई हिस्सेदारी नहीं है।'
अर्थव्यवस्था पर घटता भरोसा
चढ़ते बाजार का जश्न मनाना रिपब्लिकन के लिए एक सियासी जोखिम भी है। जून में हुए एक सर्वे में ट्रंप के आर्थिक कामकाज को लेकर लोगों का समर्थन कमजोर दिखा। एसोसिएटेड प्रेस-NORC सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च के इस सर्वे में सिर्फ 33% अमेरिकी वयस्कों ने ट्रंप के आर्थिक नेतृत्व को सराहा। यह आंकड़ा इशारा करता है कि बाजार की तेजी का फायदा कई मतदाताओं की रोजमर्रा की जिंदगी तक नहीं पहुंच रहा।
बाजार की हालिया चाल
कागजों पर बाजार का प्रदर्शन मजबूत रहा है। एसएंडपी 500 सूचकांक 2025 में 17.9% चढ़ा और इससे पहले भी इसकी रफ्तार दमदार रही। इसने 2024 में 25% और 2023 में 26.3% का रिटर्न दिया था। खास बात यह है कि ये दोनों साल डेमोक्रेट जो बाइडेन के राष्ट्रपति काल में आते हैं। इस साल अब तक यह बेंचमार्क सूचकांक करीब 10% बढ़ चुका है, यानी ऊपर की चाल अब भी कायम है, भले ही इस तेजी का सेहरा किसके सिर बंधे, इस पर बहस जारी है।
महंगाई की छाया
ट्रंप के नेतृत्व को लेकर लोगों की राय पर महंगाई का असर भी साफ दिखता है। उन्होंने 2024 का चुनाव कीमतें घटाने के वादे के साथ जीता था, लेकिन उसके बाद दाम और ऊपर चढ़े हैं। टैरिफ और ईरान में युद्ध की शुरुआत ने कीमतों पर नया दबाव डाला। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पिछले 12 महीनों में 4.2% बढ़ा, जबकि जनवरी 2025 में जब ट्रंप ने अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया था, तब यह 3% था।
व्यापक हिस्सेदारी का दांव
आयोजन के आखिर में ट्रंप ने कहा कि शेयरों की मिल्कियत को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक फैलाने से आने वाली पीढ़ियों को दौलत बनाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इन अकाउंट्स को मिल रहे सरकारी समर्थन का जिक्र किया और कुछ कंपनियों तथा अरबपतियों के साथ आने की बात भी कही। योजना को शुरू होने में लगी देरी पर उन्होंने मजाक में कहा, 'हमें और तेजी से कदम उठाना चाहिए था।' प्रशासन इस योजना को ज्यादा अमेरिकियों को बाजार से जोड़ने और अर्थव्यवस्था में आम लोगों की हिस्सेदारी बढ़ाने के रास्ते के तौर पर पेश करता रहा है।











