सोमवार को ब्रिटिश पाउंड ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाई और GBP/USD जोड़ी 1.3465 के इलाके की ओर बढ़ती दिखी। इस चढ़ाई के पीछे दो बड़ी वजहें रहीं, एक तरफ डॉलर में हल्की कमजोरी और दूसरी तरफ ब्रिटेन की सरकारी वित्तीय स्थिति को लेकर बाजार में बनी सकारात्मक धारणा। एशियाई सत्र में ही निचले स्तरों पर खरीदार सक्रिय हो गए, जिन्होंने गिरावट को खरीदने का मौका माना और पाउंड को सहारा दिया।
हालांकि तस्वीर एकतरफा नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव, महंगाई की चिंता और फेड की ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदों ने डॉलर को नीचे गिरने से रोके रखा। यही वजह है कि पाउंड की बढ़त सधी हुई और सीमित बनी हुई है।
राजकोषीय उम्मीदें और सत्ता में बदलाव
पाउंड को सबसे बड़ा सहारा ब्रिटेन के आर्थिक भविष्य को लेकर बन रही उम्मीद से मिल रहा है। सोमवार को एंडी बर्नहैम एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। बाजार को उम्मीद है कि वे एक ऐसे वित्त मंत्री की नियुक्ति करेंगे जो खर्च और घाटे को लेकर सख्त रुख रखता हो, जैसे शबाना महमूद। खर्च पर लगाम रखने वाली नीति की उम्मीद निवेशकों को भरोसा देती है, और यही भरोसा पाउंड की मांग को बढ़ाता है।
सत्ता में इतने कम समय में बार-बार हुए बदलाव के बावजूद, बाजार का ध्यान इस बात पर है कि नई सरकार सरकारी वित्त को किस दिशा में ले जाती है। एक अनुशासित राजकोषीय रुख का संकेत ही फिलहाल मुद्रा को मजबूती दे रहा है।
सुरक्षित निवेश की मांग ने डॉलर को संभाला
दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव डॉलर के पक्ष में काम कर रहा है। रविवार को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं रात हमले पूरे किए। इन हमलों का मकसद ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना बताया गया है, जिसका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और आम नाविकों पर हमले के लिए किया जाता रहा है।
जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें और एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन दागे, जिनका निशाना इस क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देश थे। बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और इराक ने हमलों की एक नई लहर की जानकारी दी। इस तरह के तनाव के चलते कारोबारी भू-राजनीतिक जोखिम को कीमतों में शामिल करना जारी रखते हैं, और इसका सीधा फायदा सुरक्षित निवेश माने जाने वाले डॉलर को मिलता है।
यही कारण है कि पाउंड की तेजी के बावजूद डॉलर बहुत ज्यादा कमजोर नहीं हुआ। दिन के कारोबार में डॉलर सबसे मजबूत स्विस फ्रैंक के मुकाबले रहा, जो दिखाता है कि जोखिम से बचने की मांग किस कदर हावी है।
इस हफ्ते के अहम आंकड़े
आने वाले दिनों में पाउंड की चाल काफी हद तक ब्रिटेन के आर्थिक आंकड़ों पर टिकी रहेगी। मंगलवार को ब्रिटेन के मासिक रोजगार के आंकड़े आएंगे और उसके बाद बुधवार को महंगाई के आंकड़े यानी CPI जारी होंगे। ये दोनों आंकड़े अहम माने जा रहे हैं क्योंकि ये पाउंड की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। भू-राजनीतिक घटनाक्रम के साथ मिलकर ये आंकड़े GBP/USD जोड़ी में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकते हैं।
चार्ट पर तकनीकी तस्वीर
ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक यह जोड़ी फिलहाल 1.34 के आसपास कारोबार कर रही है और पिछले बंद स्तर से इसमें मामूली 0.12% की नरमी है। बीते 52 हफ्तों में यह जोड़ी 1.30 से 1.38 के दायरे में घूमती रही है। इसका RSI(14) करीब 55 पर है, जो न ज्यादा खरीदारी और न ज्यादा बिकवाली, बल्कि एक संतुलित स्थिति दर्शाता है।
लंबी अवधि के रुझान में यह जोड़ी अब भी तेजी की ओर झुकी है, हालांकि छोटी अवधि के औसत लंबी अवधि के औसत से नीचे आ गए हैं, जो एक कमजोर संकेत है। बोलिंगर बैंड के हिसाब से कीमत 1.31 से 1.35 के दायरे के भीतर बनी है, जबकि ADX करीब 18 पर होने से रुझान अभी कमजोर और दायरे में बंधा दिख रहा है। नजदीकी समर्थन करीब 1.31 और अवरोध करीब 1.35 पर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, नई सरकार की नीतियों और इस हफ्ते के आंकड़ों से पहले पाउंड सधे कदमों से आगे बढ़ रहा है।



















