अगर आप सोना या चांदी खरीदने का मन बना रहे थे, तो यह वक्त आपकी जेब के लिए राहत लेकर आया है। बुधवार को, यानी हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन, घरेलू और ग्लोबल दोनों बाजारों में कीमती धातुओं के भाव ताबड़तोड़ टूटे और कई महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। इस तेज गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह लगातार मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरें फिर से बढ़ने की आशंका मानी जा रही है।
घरेलू बाजार में कितना गिरा भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर बुधवार के कारोबार में चांदी सबसे ज्यादा पिटी। जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 3.9% यानी करीब 8,829 रुपये फिसलकर 2,17,005 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर आ गई। सोने का हाल भी कुछ अलग नहीं रहा। अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 3.8% यानी करीब 5,601 रुपये की भारी गिरावट के साथ 1,40,928 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
विदेशी बाजार में भी टूटा सोना
गिरावट सिर्फ देश तक सीमित नहीं रही। इंटरनेशनल बाजार COMEX पर भी सोना धड़ाम हुआ। यहां सोना 169 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस लुढ़ककर 3,980 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गया। सबसे अहम बात यह रही कि नवंबर के बाद यह पहली बार है जब सोना 4,000 डॉलर के बड़े मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसला है।
जून महीने में अब तक सोना करीब 13 फीसदी टूट चुका है। अगर महीने के आखिर तक यही चाल बनी रही, तो यह बीते एक दशक से भी ज्यादा समय की सबसे बड़ी मासिक गिरावट बन सकती है। चांदी ने भी इस गिरावट में पूरा साथ निभाया। COMEX पर चांदी करीब 4 डॉलर प्रति औंस गिरकर 58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, जो दिसंबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। अगर फरवरी के आखिर से अब तक का हिसाब देखें, तो चांदी करीब 38 फीसदी और सोना तकरीबन 24 फीसदी तक टूट चुका है।
आखिर क्यों मचा भाव में हाहाकार
जानकारों की मानें तो अमेरिकी डॉलर में लगातार आ रही मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रवैया कीमती धातुओं पर भारी दबाव डाल रहा है। बाजार को अंदेशा है कि महंगाई पर लगाम कसने के लिए फेड ब्याज दरों में और इजाफा कर सकता है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सोने जैसे बिना ब्याज देने वाले निवेश से किनारा करने लगते हैं और इसी वजह से इसकी मांग घट जाती है।
आगे क्या रहेगा रुख
बाजार के जानकारों का मानना है कि फिलहाल सोने और चांदी पर दबाव बना रह सकता है। अब सबकी निगाहें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों पर टिकी हैं। अगर डॉलर इसी तरह मजबूत रहता है और दरें बढ़ने के संकेत मिलते हैं, तो कीमती धातुओं में और कमजोरी आ सकती है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यही गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका भी बनकर सामने आ सकती है।













