वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में इस समय मिली-जुली स्थितियां बनी हुई हैं। प्रमुख मुद्रा जोड़ा EUR/USD 1.16 के स्तर के आसपास मजबूती से टिका हुआ नजर आ रहा है। ओसीबीसी के विश्लेषक क्रिस्टोफर वॉन्ग के आकलन के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में देखी जा रही नरमी और यूरो क्षेत्र के आर्थिक डेटा में सुधार ने यूरो को आवश्यक सहारा दिया है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और जर्मनी के भीतर पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण इस मुद्रा जोड़े पर दोनों तरफ का जोखिम बना हुआ है। आगामी ईसीबी बैठक और अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़े आने से पहले बाजार प्रतिभागी अत्यधिक सतर्कता बरत रहे हैं।
ईसीबी की मौद्रिक नीति और यूरोपीय अर्थव्यवस्था का परिदृश्य
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की इस सप्ताह आयोजित होने वाली नीतिगत समीक्षा बैठक को लेकर मुद्रा बाजारों में सरगर्मी तेज है। व्यापक स्तर पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि ईसीबी अपनी प्रमुख ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (25bp) की वृद्धि का निर्णय ले सकता है। यूरो क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार के संकेत और मजबूत होती उपभोक्ता भावना ने यूरो को निचले स्तरों पर सहारा दिया है। इसके बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मध्यम रहने के कारण ईसीबी के लिए मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति के दबाव को और बढ़ा रही हैं, जिससे केंद्रीय बैंक के सामने संतुलन बनाए रखने की जटिल चुनौती खड़ी हो गई है।
जर्मनी की राजनीतिक स्थिति और बाजार पर प्रभाव
यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है। सैक्सोनी-अनहाल्ट में दक्षिणपंथी दल एएफडी के मजबूत चुनावी परिणामों के बाद राजनीतिक अनिश्चितता का स्तर थोड़ा बढ़ गया है। हालांकि, विश्लेषकों का आकलन है कि इस क्षेत्रीय परिणाम का जर्मनी की केंद्रीय संघीय राजनीति पर दीर्घकालिक असर फिलहाल सीमित ही रहेगा। फिर भी, अल्पकालिक रूप से इसने विदेशी मुद्रा ट्रेडरों के बीच थोड़ी हिचकिचाहट पैदा की है। ईसीबी द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की मजबूत उम्मीदें और यूरो क्षेत्र के आर्थिक संकेतकों में सुधार यूरो की भारी गिरावट को रोकने में मददगार साबित हो रहे हैं, लेकिन बाजार विशेषज्ञ इस स्तर पर यूरो में नई खरीदारी करने से पहले सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
EUR/USD के तकनीकी संकेत और मुख्य स्तर
तकनीकी चार्ट पर नज़र डालें तो EUR/USD अंतिम बार 1.1620 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। दैनिक चार्ट पर हल्का बेयरिश मोमेंटम अभी भी बना हुआ है, जबकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 57 पर स्थिर बना हुआ है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, इस मुद्रा जोड़े में 2-वे रिस्क यानी दोनों दिशाओं में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। नीचे की ओर पहला मजबूत सपोर्ट स्तर 1.1560 पर है, जो कि 100-दिन के मूविंग एवरेज (100 DMA) के बराबर है। यदि यह स्तर टूटता है तो 1.1510 (50 DMA) पर अगला सपोर्ट देखने को मिल सकता है। ऊपर की ओर पहला बड़ा प्रतिरोध 1.1630 के स्तर पर 200-दिन के मूविंग एवरेज (200 DMA) के पास मौजूद है, जिसके पार जाने पर 1.1710 का स्तर देखा जा सकता है।
एशियाई सत्र में अन्य प्रमुख मुद्राओं का प्रदर्शन
यूरो के अलावा एशियाई कारोबारी सत्र में अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ों में भी महत्वपूर्ण हलचल दर्ज की गई। AUD/USD 0.7200 के स्तर से ऊपर निकल गया, जो कि 14 मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। जापानी येन में आई जबरदस्त तेजी ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की उम्मीदों को पछाड़ दिया, जिससे अमेरिकी डॉलर पर दबाव बढ़ा और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (ऑसी) को मजबूती मिली। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा इस महीने के अंत में ब्याज दर बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का समर्थन किया। हालांकि, चीन के मिले-जुले व्यापार संतुलन आंकड़ों ने इस जोड़े की बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधकर रखा।
दूसरी ओर, USD/JPY छह महीने के निचले स्तर 153.50 के करीब पहुंच गया। जापान में वेतन वृद्धि के सकारात्मक आंकड़ों और दूसरी तिमाही के जीडीपी संशोधन ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अगले सप्ताह ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को लगभग पक्का कर दिया है। इससे जापानी येन की मांग में भारी इजाफा हुआ। अमेरिकी डॉलर की बिकवाली लगातार जारी रहने से जापानी येन को अतिरिक्त बल मिला, जिससे USD/JPY निचले स्तरों पर आ गया।
सोने की कीमतें और डीजल क्रैक स्प्रेड का रिकॉर्ड उछाल
कमोडिटी बाजार में सोने ने लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए एशियाई सत्र में वापसी की। अमेरिकी डॉलर में तीन सप्ताह के उच्च स्तर से आई गिरावट और जापानी येन की तेजी के कारण सोने की कीमतों को आधार मिला। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग बनी रही, जिससे बिना ब्याज वाले सोने की ऊपरी बढ़त सीमित रही।
ऊर्जा बाजार में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला है। भले ही कच्चे तेल का बाजार बाहर से शांत नजर आ रहा हो, लेकिन डीजल का बाजार बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रहा है। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई (WTI) कच्चे तेल के बीच का अंतर, जिसे डीजल क्रैक स्प्रेड कहा जाता है, इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल से ऊपर निकल गया। इसने $102.00 प्रति बैरल से थोड़ा अधिक का नया रिकॉर्ड स्थापित किया, जो वैश्विक स्तर पर रिफाइंड ईंधन की आपूर्ति में चल रही तंगी और बढ़ती मांग को दर्शाता है।



















