यूरोपीय सेंट्रल बैंक आने वाले महीनों में अपनी मौद्रिक नीतियों को और अधिक सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और ऊर्जा की कीमतों में आए तीव्र उछाल को देखते हुए केंद्रीय बैंक अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है। नीति निर्माताओं का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों के कारण अन्य वस्तुओं और सेवाओं में महंगाई को फैलने से पहले ही नियंत्रित करना है।
ऊर्जा संकट और मुद्रास्फीति की रोकथाम
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते संघर्ष के साथ-साथ रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस जैसी बुनियादी ऊर्जा लागतों को काफी बढ़ा दिया है। यूरोप जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार में ऊर्जा लागत बढ़ने का सीधा असर आम उपभोग की वस्तुओं, माल ढुलाई और उत्पादन लागत पर पड़ता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक के नीति निर्माता इस स्थिति को लेकर बेहद सतर्क हैं और उनका मानना है कि अगर समय रहते नीतिगत दरों को सख्त नहीं किया गया, तो यह अस्थायी मूल्य वृद्धि व्यापक और दीर्घकालिक मुद्रास्फीति में बदल सकती है। इसी वजह से अक्टूबर में दरों में वृद्धि का विकल्प पूरी तरह से खुला रखा गया है।
मुद्रा बाजारों में यूरो और प्रमुख करेंसियों का प्रदर्शन
वैश्विक मुद्रा बाजारों में यूरोपीय साझा मुद्रा यानी यूरो ने अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले काफी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। मुद्रा विनिमय दरों के ताजा रुझानों पर नजर डालें तो यूरो ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले सबसे शानदार मजबूती दिखाई है। वैश्विक स्तर पर निवेशक अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं के ब्याज दर परिदृश्यों और केंद्रीय बैंकों के रुख का आकलन कर रहे हैं, जिससे विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में लगातार नए समीकरण बन रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति
गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी AUD/USD में 0.7200 के स्तर से ऊपर सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक यानी RBA द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को 14 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब बनाए रखा है। दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण अमेरिकी डॉलर को भी अच्छा सहारा मिला है। इस वजह से अमेरिकी महंगाई आंकड़ों से पहले इस मुद्रा जोड़ी की बढ़त सीमित रही।
वहीं जापानी मुद्रा के मोर्चे पर USD/JPY की जोड़ी गुरुवार को 153.50 के स्तर से ऊपर स्थिर होती दिखाई दी। बैंक ऑफ जापान यानी BoJ द्वारा दरों को सख्त करने की उम्मीदों के कारण जापानी येन मजबूत हुआ है, जिससे यह जोड़ी इस सप्ताह बने अपने सात महीने के निचले स्तर के करीब बनी रही। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने के बढ़ते दांव और भू-राजनीतिक तनाव ने अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली के दबाव को कम किया है, जिससे आगामी अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI आंकड़ों से पहले डॉलर को स्थिरता मिली।
मजबूत डॉलर और ट्रेजरी यील्ड से सोने में नरमी
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में गुरुवार को काफी उतार-चढ़ाव भरा रुख देखा गया। अमेरिकी डॉलर में आई जोरदार रिकवरी और पूरी यील्ड कर्व पर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हुई बढ़ोतरी के चलते सोने की कीमत गिरकर 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में पहुंच गई। अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक के जारी होने के बाद और शुक्रवार को आने वाले महत्वपूर्ण अमेरिकी CPI आंकड़ों से पहले निवेशकों की सतर्कता ने पीली धातु पर दबाव बनाए रखा।



















