यूरोपीय सेंट्रल बैंक अपनी सख्त मौद्रिक नीति को पूरी तरह समाप्त करने के मूड में नहीं दिख रहा है। नीति निर्धारकों के हालिया बयानों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी के अपने रुख को छोड़ा नहीं है। हालांकि बैंक प्रत्येक बैठक के आधार पर आने वाले आर्थिक आंकड़ों का मूल्यांकन कर रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया है कि जब तक नए आंकड़े मौजूदा परिदृश्य को बड़े पैमाने पर नहीं बदलते, तब तक नीति की आगे बढ़ने की दिशा काफी स्पष्ट बनी हुई है। मौद्रिक नीति के जानकारों का मानना है कि अक्टूबर के मुकाबले दिसंबर का महीना किसी भी अंतिम नीतिगत समायोजन के लिए अधिक संभावित समय हमेशा से रहा है।
वित्तीय स्थितियों में सख्ती और केंद्रीय बैंक का ठहराव
केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में तत्काल बढ़ोतरी पर रोक लगाने का सबसे बड़ा कारण सितंबर के बाद से वित्तीय परिस्थितियों में आई तेज सख्ती रही है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला यील्ड तेजी से ऊपर चढ़ा है। आधिकारिक टिप्पणियों में रेखांकित किया गया है कि औसत 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में सितंबर के अनुमानों के मुकाबले लगभग 35 आधार अंकों की बढ़त दर्ज की गई है। इसके समानांतर शेयर बाजारों में इक्विटी की कीमतों में गिरावट देखी गई है, जबकि दूसरी तरफ परिवारों और कारोबारी संस्थानों के लिए उधारी की लागत लगातार महंगी हुई है। इस प्रकार बाजार के भीतर पहले से मौजूद इस वित्तीय कसाव ने नीति निर्माताओं को तुरंत दरें बढ़ाने के बजाय ठहराव अपनाने की गुंजाइश दी।
मुद्रा बाजारों में तेजी और डॉलर के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का रुख
वैश्विक मुद्रा बाजारों में शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी मजबूत होकर लगभग 0.7035 के स्तर तक पहुंच गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह बढ़त ऑस्ट्रेलिया में आए मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद दर्ज की गई है। वहां उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़े अपेक्षा से अधिक गर्म रहे हैं। महंगाई के इस मजबूत दबाव ने बाजार में यह उम्मीद बढ़ा दी है कि रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया आगे अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कदम उठा सकता है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को अच्छा समर्थन मिला।
येन की वापसी और बैंक ऑफ जापान का निर्णय
दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन नरमी दर्ज की गई। यह जोड़ी फिसलकर 157.00 के दायरे में आ गई और फिर वहां से कुछ सुधार की कोशिश करती दिखाई दी। निवेशक बैंक ऑफ जापान की नवीनतम नीतिगत बैठक के फैसलों की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। इस बैठक में जापानी केंद्रीय बैंक ने अपनी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और उन्हें पूर्व स्तर पर ही स्थिर छोड़ दिया, जो कि बाजार की व्यापक उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप था। नीतिगत स्थिरता के इस आकलन के बीच मुद्रा में यह उठापटक देखी गई।
सोने पर दबाव और फेडरल रिजर्व की नीतियों का प्रभाव
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का दौर देखा गया और शुक्रवार को यह पीली धातु फिसलकर साल के नए निचले स्तर पर पहुंच गई। व्यापक वित्तीय बाजारों में जोखिम से बचने के माहौल के बावजूद सोना संभलने में नाकाम रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जारी उम्मीदें बाजार की कीमतों को लगातार प्रभावित कर रही हैं। इस सख्त अमेरिकी नीतिगत परिदृश्य के चलते सोना महीने के अंत में नकारात्मक दायरे में बंद होने की राह पर बना रहा। दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों के कड़े रुख ने निवेशकों को सतर्क मुद्रा में बनाए रखा है।


















