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अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल से डॉलर मजबूत, एशियाई और यूरोपीय मुद्राओं पर बढ़ा दबावबाज़ार
1 अक्तू॰ 2026, 2:10 pm (2 घंटे पहले)· 0

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल से डॉलर मजबूत, एशियाई और यूरोपीय मुद्राओं पर बढ़ा दबाव

ऊर्जा कीमतों से उपजी महंगाई और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे रुपया, रूपिया, यूरो और येन पर दबाव देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती ताकत के बीच कई प्रमुख एशियाई और वैश्विक मुद्राओं में गिरावट का दौर देखा जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कई दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों के रुझान को डॉलर की ओर मोड़ दिया है। इस बदलाव का सीधा असर भारतीय रुपये के साथ-साथ इंडोनेशियाई रूपिया, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, यूरो और जापानी येन पर पड़ा है, जबकि सोने की कीमतों में भी सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है।

ट्रेजरी यील्ड में ऐतिहासिक उछाल और महंगाई की चिंताएं

अमेरिकी बॉन्ड बाजार में हाल के दिनों में जबरदस्त हलचल देखी गई है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से महंगाई के दोबारा भड़कने की आशंकाओं के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कई दशकों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। आंकड़ों के अनुसार, 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.34% तक पहुंच गई, जबकि लंबी अवधि की 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड चढ़कर 5.681% पर दर्ज की गई। बॉन्ड यील्ड में इस तेज बढ़त ने वैश्विक निवेशकों को अधिक प्रतिफल के लिए अमेरिकी संपत्तियों की तरफ आकर्षित किया है, जिससे डॉलर को व्यापक समर्थन मिला है।

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हालांकि, बुधवार को जारी हुए उम्मीद से कमजोर महंगाई आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं में थोड़ी कमी आई। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बाजार अब अक्टूबर में फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की करीब 39% संभावना जता रहा है, जो कि पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) के आंकड़ों से पहले लगभग 51% पर थी। अब सभी वित्तीय बाजारों की नजरें शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स रिपोर्ट पर टिकी हैं, जहां आम सहमति का अनुमान है कि सितंबर में 90,000 नई नौकरियां जुड़ी हैं और बेरोजगारी दर 4.1% पर स्थिर बनी रहेगी।

इंडोनेशियाई अर्थव्यवस्था पर अल नीनो और तेल का दोहरा असर

इंडोनेशिया में मुद्रास्फीति से जुड़ी चिंताओं ने वित्तीय बाजारों को सतर्क कर दिया है। देश की सालाना मुद्रास्फीति दर सितंबर में बढ़कर 3.28% पर पहुंच गई, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह अल नीनो के प्रभाव से खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार बना हुआ दबाव है। इसके अलावा, एक शुद्ध तेल आयातक देश होने के नाते इंडोनेशिया को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से अतिरिक्त वित्तीय और आयात लागत के संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उसकी घरेलू मुद्रा रूपिया पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।

मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की स्थिति

वैश्विक ऊर्जा और मुद्रा बाजारों पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता का साया भी बना हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं में बहुत कम प्रगति हुई है, भले ही मध्य पूर्व से तेल प्रवाह के बहाल होने के शुरुआती संकेत दिखे हैं। दोनों देश यानी वॉशिंगटन और तेहरान सामरिक जलमार्ग पर अपने-अपने नियंत्रण का दावा कर रहे हैं। बिना किसी औपचारिक शांति समझौते या संघर्ष समाधान के इस आपूर्ति बहाली की स्थिरता को लेकर बाजार बेहद सतर्क हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधान का जोखिम बरकरार है।

ब्याज दरों का तंत्र और बुलियन पर प्रभाव

वित्तीय व्यवस्था में ब्याज दरें उधारकर्ताओं को दिए जाने वाले ऋण और जमाकर्ताओं को मिलने वाले रिटर्न को तय करती हैं। केंद्रीय बैंक आमतौर पर लगभग 2% की मुख्य मुद्रास्फीति दर को लक्षित करके मूल्य स्थिरता बनाए रखने का प्रयास करते हैं। जब महंगाई इस लक्ष्य से नीचे गिरती है, तो अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की जाती है। इसके विपरीत, जब महंगाई 2% के स्तर से काफी ऊपर निकल जाती है, तो उसे नियंत्रित करने के लिए ऋण दरों को बढ़ाया जाता है। ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर किसी देश की मुद्रा को मजबूत बनाती हैं क्योंकि वे वैश्विक निवेशकों को पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं।

दूसरी ओर, बढ़ती ब्याज दरें सोने की मांग और कीमतों पर नकारात्मक असर डालती हैं। चूंकि सोना एक बिना यील्ड वाली संपत्ति है, इसलिए दरों में वृद्धि से इसे अपने पास रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। साथ ही, ऊंची दरों के कारण डॉलर महंगा होता है, जिससे डॉलर में आंकी जाने वाली सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर पड़ती हैं। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना 4,200 डॉलर के स्तर के आसपास मामूली बढ़त लेने के बाद लगभग सपाट कारोबार करता नजर आया।

प्रमुख मुद्रा जोड़ों और डिजिटल संपत्तियों की चाल

करेंसी बाजार में विभिन्न जोड़ों पर व्यापक डॉलर मजबूती का साफ असर दिखाई दे रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर का युग्म (AUD/USD) दो महीने के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में रहा और एशियाई सत्र के दौरान गुरुवार को 0.6900 के मध्य स्तर पर कारोबार करता देखा गया। अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, जिसका मुद्रा पर सीमित प्रभाव पड़ा।

जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) गुरुवार को अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे पर 158.00 से ऊपर टिका रहा। बैंक ऑफ जापान की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद अमेरिकी डॉलर की सुरक्षित निवेश मांग ने इस जोड़ी को मजबूत सहारा दिया।

यूरोपीय मोर्चे पर, EUR/USD मई 2025 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर फिसल गया। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक गिर गई थी, जो जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। यूरोप का ऊर्जा संकट, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर का दबदबा यूरो पर भारी पड़ रहा है, हालांकि यूरोज़ोन में नए मुद्रास्फीति के झटके यूरो को सहारा देने की संभावना भी पैदा कर सकते हैं। वहीं, डिजिटल एसेट बाजार में हाइपरलिक्विड (HYPE) गुरुवार को 2% की गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा, जिससे पिछले दिन की 5% बढ़त कम हो गई। बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की संस्थागत निकासी के कारण निवेशकों का रुझान सतर्क बना हुआ है और इसका भाव 90 डॉलर से नीचे सीमित है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हाल ही में कितनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है?
10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.34% और 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.681% तक पहुंच गई है।
फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की क्या संभावना जताई जा रही है?
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना घटकर लगभग 39% रह गई है, जो पहले करीब 51% थी।
इंडोनेशिया में मुद्रास्फीति किस स्तर पर पहुंच गई है?
अल नीनो के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से इंडोनेशिया की वार्षिक मुद्रास्फीति सितंबर में 3.28% के तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
ऊंची ब्याज दरों का सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ता है?
ऊंची ब्याज दरों से बिना यील्ड वाले सोने को रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है और डॉलर मजबूत होने से सोने के भाव पर दबाव बना रहता है।
शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट से क्या उम्मीदें हैं?
बाजार के अनुमान के अनुसार, सितंबर में 90,000 नई नौकरियां जुड़ने और बेरोजगारी दर के 4.1% पर स्थिर रहने की संभावना है।
यूरो और डॉलर का विनिमय दर किस स्तर पर पहुंच गया है?
यूरो/डॉलर जोड़ी गिरकर 1.1312 पर आ गई है, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
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