यूरोपीय अर्थव्यवस्था के मौजूदा आंकड़े मिला-जुला रुख दिखा रहे हैं, जहां मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में तेजी दर्ज की गई है तो वहीं सर्विसेज सेक्टर की रफ्तार थम गई है। फ़ारस की खाड़ी में जारी तनाव और ऊर्जा कीमतों में हालिया उछाल के बावजूद यूरोपीय कंपनियों पर इसका असर वसंत ऋतु के मुकाबले काफी कम देखने को मिल रहा है। परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़े बताते हैं कि यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था ऐतिहासिक रूप से मध्यम विकास की श्रेणी में बनी हुई है। हालांकि, यूरो क्षेत्र की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं यानी फ़्रांस और जर्मनी में कंपोजिट सेंटिमेंट इंडिकेटर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। फ़्रांस का इंडिकेटर 49.4 से गिरकर 48.8 पर आ गया है, जबकि जर्मनी का सूचकांक 51.3 से फिसलकर 51.0 रह गया है। इसके बावजूद समग्र आर्थिक संकेतकों में स्थिरता बनी हुई है।
मैन्युफैक्चरिंग में 4 साल का रिकॉर्ड उछाल और जर्मनी का योगदान
कंपोजिट इंडेक्स में सीधे तौर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के PMI में लगातार बढ़त का रुझान देखा जा रहा है। औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा सब-इंडेक्स 52.8 के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले चार वर्षों का सबसे उच्चतम स्तर है। इस औद्योगिक मजबूती में जर्मनी के सार्वजनिक निवेश की अहम भूमिका मानी जा रही है। जर्मनी में इंडस्ट्रियल इंडिकेटर उछलकर 54.1 के बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इसके विपरीत, अगस्त महीने में सर्विसेज क्षेत्र पूरी तरह स्थिर नजर आया। सर्विस प्रोवाइडर्स के सब-इंडेक्स में गिरावट न आने का एक प्रमुख कारण यह है कि स्पेन और इटली के आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं। दूसरी ओर, फ़्रांस और जर्मनी में सर्विसेज सेक्टर का सेंटिमेंट एक बार फिर 50 अंक के तटस्थ स्तर से काफी नीचे चला गया है, जो संकुचन का संकेत देता है।
फॉरेक्स मार्केट: GBP/USD और EUR/USD में गिरावट का रुख
विदेशी मुद्रा बाजार यानी फॉरेक्स मार्केट में शुक्रवार को पाउंड और यूरो पर दबाव देखा गया। GBP/USD की जोड़ी हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बैकफुट पर आ गई और दिन के 1.3670 के ऊपरी स्तर को छूने के बाद फिसलकर निचले 1.3600 के दायरे में आ गई। केबल के नाम से जानी जाने वाली इस मुद्रा जोड़ी में यह गिरावट लगातार दो दिनों की बढ़त के बाद आई है। अमेरिकी डॉलर (ग्रीनबैक) में आई मामूली मजबूती और यूके के कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने इस गिरावट को बढ़ावा दिया। वहीं दूसरी ओर, EUR/USD की जोड़ी भी 1.1700 के स्तर को पार करने में नाकाम रही और मामूली नुकसान के साथ 1.1670 के आसपास कारोबार करती दिखी। यूरो में आई यह सुस्ती अमेरिकी डॉलर में आई हल्की रिकवरी और अमेरिकी बॉन्ड मार्केट के घटनाक्रमों के बीच निवेशकों द्वारा हालिया आर्थिक आंकड़ों के आकलन के कारण दर्ज की गई है।
बुलिश मार्केट: सोना 4,600 डॉलर के पार और बिटकॉइन 77,000 डॉलर के ऊपर
कीमती धातुओं के बाजार में शुक्रवार को जबर्दस्त हलचल देखने को मिली। सोने ने गुरुवार की अनिश्चितता को पीछे छोड़ते हुए जोरदार छलांग लगाई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना प्रति ट्रॉय औंस 4,600 डॉलर के स्तर को पार करते हुए तीन महीने के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स में मामूली मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के बावजूद सोने की कीमतों में यह तेजी बनी रही। क्रिप्टो बाजार में भी शुक्रवार को चौतरफा तेजी देखने को मिली। बिटकॉइन (BTC) 77,000 डॉलर के स्तर को पार कर गया, जिससे पूरा डिजिटल एसेट मार्केट बुलिश नजर आया। बिटकॉइन के इस उछाल का असर ऑल्टकॉइन्स पर भी पड़ा। एथेरियम (ETH) 2,400 डॉलर के पास पहुंच गया, जबकि रिपल (XRP) 1.35 डॉलर के आसपास मजबूत स्थिति में कारोबार करता दिखाई दिया।
अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा तरलता कदम और जैक्सन होल पर नजरें
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने निर्धारित कैलेंडर से हटकर बुधवार को 12:32 GMT पर एक बड़ा ऐलान किया। विभाग ने 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड के लिए लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन्स का दायरा दोगुना करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह नया नियम 9 सितंबर से लागू होगा और 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। इधर वित्तीय जगत की नजरें केविन वॉर्श के जैक्सन होल डेब्यू पर टिकी हैं, जहां अस्पष्ट संदेशों के बीच नीतिगत दिशा पर चर्चा होगी। हालांकि बॉन्ड मार्केट में ट्रेजरी के हस्तक्षेप के बाद किसी बड़े सख्त कदम की संभावना कम जताई जा रही है। इसके साथ ही, टेक शेयरों में जारी रैली के सुस्त पड़ने के बीच बाजार की भावी दिशा तय करने में एनवीडिया के आने वाले वित्तीय नतीजे भी बेहद निर्णायक साबित होंगे।



















