वैश्विक मुद्रा बाजार और वित्तीय परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां जापानी येन (JPY) को अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले मजबूत होते देखा जा रहा है. डीबीएस ग्रुप रिसर्च के फिलिप वी के विश्लेषण के अनुसार, मौद्रिक नीतियों में आ रहा यह ढांचागत बदलाव सीधे तौर पर जापानी मुद्रा के पक्ष में काम कर रहा है. जहां एक तरफ यूरो (EUR) को बाजार में अपनी साख का फायदा मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ जापानी येन अपनी मौद्रिक नीतियों में ऐतिहासिक बदलाव के दम पर मजबूत स्थिति में खड़ा है. सालों से चली आ रही अत्यधिक उदार मौद्रिक नीति को खत्म करने की दिशा में उठाया गया यह कदम आने वाले महीनों में अमेरिकी डॉलर के खिलाफ जापानी येन को काफी मजबूती दे सकता है.
शॉर्ट पोजीशन का खत्म होना और बाजार में हस्तक्षेप
बाजार की स्थिति में आया यह अचानक बदलाव निवेशकों के रुख में आए बड़े बदलाव का परिणाम है. जिन सट्टेबाजों ने लंबे समय से जापानी येन के खिलाफ अपनी शॉर्ट पोजीशन बनाई हुई थी, उन्होंने तेजी से अपने सौदे वापस लेना शुरू कर दिया है. बाजार में इस बदलाव की शुरुआत जुलाई में हुई थी, जब अमेरिकी और जापानी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया था. इस साझा कदम के बाद, बाजार के खिलाड़ियों को यह समझ आ गया कि बैंक ऑफ जापान (BoJ) अपनी मौद्रिक नीतियों को सख्त करने जा रहा है. अब निवेशक येन के कमजोर होने पर दांव लगाने के बजाय सितंबर के आखिर में होने वाली ब्याज दर बढ़ोतरी की तैयारियों में जुट गए हैं.
आर्थिक नीतियों में बड़ा बदलाव: एबेनॉमिक्स से ताकाईचिनॉमिक्स का सफर
जापान के इस आर्थिक बदलाव को राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर भी सहारा मिल रहा है. बेसेंट के बयानों ने निवेशकों के बीच ताकाईचिनॉमिक्स की धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है. इसे अब सिर्फ एबेनॉमिक्स 2.0 यानी केवल महंगाई बढ़ाने वाली पुरानी नीति के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे एक नए नजरिए से पेश किया जा रहा है. नए आर्थिक एजेंडे का मुख्य ध्यान नियमों को आसान बनाने, पूंजी निवेश को बढ़ावा देने और शेयरधारकों के अनुकूल ढांचागत सुधारों पर केंद्रित है. केवल मौद्रिक राहत देने के बजाय किए जा रहे इन बुनियादी सुधारों के कारण बैंक ऑफ जापान को अपनी नीतियों को सामान्य बनाने का पूरा मौका मिल गया है, जिससे JPY की साख लगातार बढ़ रही है.
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य मुद्राओं का हाल
इस बीच, वैश्विक मुद्रा बाजार की अन्य जोड़ियों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD की जोड़ी पर दबाव देखा गया और यह करीब डेढ़ हफ्ते के निचले स्तर 0.7140 के पास पहुंच गई. हालांकि, इसमें कोई बहुत बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई और यह जोड़ी दिन के दौरान करीब 0.25% की गिरावट के साथ 0.7100 के मध्य स्तर से ठीक ऊपर कारोबार कर रही है. दूसरी तरफ, हफ्ते की शुरुआत में USD/JPY जोड़ी को खरीदारों का सहारा मिला. यह जोड़ी शुक्रवार को हुए नुकसान से उबरते हुए 154.00 के स्तर के करीब पहुंच गई. इस मामूली सुधार के बावजूद, यह जोड़ी पिछले एक हफ्ते से एक सीमित दायरे में बनी हुई है और पिछले मंगलवार को छुए गए अपने सात महीने के सबसे निचले स्तर के बेहद करीब है. निवेशक इस हफ्ते होने वाली विभिन्न केंद्रीय बैंकों की बैठकों से पहले बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं.
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बढ़त का माहौल
पारंपरिक मुद्रा बाजार के समानांतर डिजिटल एसेट्स के बाजार में भी सकारात्मक रुख देखा जा रहा है. बिटकॉइन (BTC) सोमवार को बढ़त के साथ $77,884 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था, जिसे पूरे क्रिप्टो बाजार से सहारा मिल रहा है. अन्य प्रमुख डिजिटल मुद्राएं भी बिटकॉइन के इस बढ़ते दायरे का अनुसरण कर रही हैं. इथेरियम (ETH) ने $2,521 और रिपल ने $1.38 के अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों को मजबूती से संभाल रखा है. पारंपरिक मुद्राओं में जारी उठापटक और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच क्रिप्टो बाजार की यह स्थिरता दर्शाती है कि जोखिम लेने वाले निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत है.
फेडरल रिजर्व के सामने नीतिगत चुनौती और राजनीतिक दबाव
अमेरिका में आर्थिक आंकड़े फेडरल रिजर्व के लिए फैसले लेना मुश्किल बना रहे हैं. हाल ही में जारी हुए प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों ने निवेशकों के बीच ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को फिर से हवा दे दी है. बाजार अब अमेरिकी डॉलर की भविष्य की दिशा तय करने के लिए फेडरल रिजर्व के नए डॉट प्लॉट का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. इसके साथ ही, ब्याज दरों को कम रखने के लिए ट्रंप द्वारा बनाए जा रहे लगातार दबाव के बीच वॉर्श की नीतिगत स्वतंत्रता की भी कड़ी परीक्षा होने वाली है. अमेरिकी डॉलर को अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए फेडरल रिजर्व को बाजार की मौजूदा उम्मीदों पर खरा उतरना होगा, जिसके चलते आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंक के फैसले बेहद महत्वपूर्ण होंगे.


















