घरेलू इक्विटी बाजारों में बीते सप्ताह लगातार आठवें हफ्ते मंदी का रुख बना रहा, जिससे पच्चीस वर्षों की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट का ऐतिहासिक दौर सामने आ गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक पिछले कारोबारी हफ्ते के दौरान 3.1 प्रतिशत फिसलकर 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 2.7 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज करते हुए 71,909.70 के स्तर पर आकर ठहरा। दोनों प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, क्योंकि 5 से 9 अक्टूबर के आगामी कारोबारी सप्ताह में बाजार की दिशा कई घरेलू और वैश्विक चुनौतियों पर टिकी रहने की संभावना है।
बाजार में मंदी को गहरा करने वाले वैश्विक और वृहद कारक
दलाल स्ट्रीट पर बने इस भारी दबाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह के घटनाक्रम जिम्मेदार रहे हैं। अमेरिका में 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई जोरदार तेजी ने उभरते बाजारों के लिए जोखिम पैदा कर दिया है। जब अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल बढ़ता है, तो डॉलर आधारित संपत्तियां अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन जाती हैं, जिसके चलते वे भारत जैसे विकासशील इक्विटी बाजारों से अपनी पूंजी निकालकर सुरक्षित विकल्पों में लगाने लगते हैं।
इसके अलावा, पश्चिम एशिया में दोबारा भड़के भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल के बाजार में आग लगा दी है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण आंकड़े को पार कर चुकी हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे ईंधन से न केवल व्यापार घाटा बढ़ता है बल्कि मुद्रास्फीति का दबाव भी गहराता है। ऊर्जा लागत में वृद्धि होने से सीधे तौर पर कंपनियों के परिचालन मार्जिन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उच्च बॉन्ड यील्ड और महंगे कच्चे तेल के इस दोहरे दबाव ने भारतीय रुपये को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर कर दिया है, जिससे घरेलू शेयरों के प्रति धारणा और नाजुक हो गई है।
विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और घरेलू संस्थागत खरीदारी
बाजार में तरलता के मोर्चे पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) का रुख बेहद आक्रामक बिकवाली का रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बीते हफ्ते इक्विटी बाजार में 34,966 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, और यह लगातार सातवां हफ्ता रहा जब वे शुद्ध बिकवाल बने रहे। वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल और मुद्रा पर दबाव के बीच विदेशी पूंजी की यह लगातार निकासी बाजार को संभलने का मौका नहीं दे रही है।
दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को संभालने की भरकस कोशिश की है। डीआईआई ने आलोच्य सप्ताह के दौरान 33,455 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। हालांकि घरेलू संस्थागत फंडों की यह जबर्दस्त खरीदारी भी एफआईआई की भारी बिकवाली को पूरी तरह बेअसर करने में नाकाम रही। आगामी 5 से 9 अक्टूबर के सत्रों में दोनों संस्थागत वर्गों के पूंजी प्रवाह की दिशा सूचकांकों के लिए निर्णायक साबित होगी।
घरेलू मोर्चे पर मानसून की कमी और ऑटो बिक्री के आंकड़े
अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के साथ-साथ घरेलू वृहद आंकड़े भी इक्विटी बाजार के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून में सामान्य से 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। बारिश के इस घाटे ने कृषि उत्पादन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति के लंबे समय तक उच्च स्तर पर बने रहने का जोखिम खड़ा हो गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग की गति को लेकर भी इससे अनिश्चितता बनी है।
इसके साथ ही, निवेशक सितंबर महीने के वाहन बिक्री आंकड़ों के असर का भी विश्लेषण कर रहे हैं। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों के बिक्री आंकड़े मिले-जुले रहे हैं, जिससे संबंधित शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। आगामी तिमाहियों में कंपनियों की आय वृद्धि सुस्त रहने की आशंकाओं के बीच तिमाही नतीजों का सीजन शुरू होने जा रहा है, जिससे व्यक्तिगत शेयरों में व्यापक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निफ्टी 50 के तकनीकी स्तर और विश्लेषकों का नजरिया
तकनीकी चार्ट पर निफ्टी 50 में 3.11 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई है। सूचकांक फिलहाल अपने 21-दिवसीय, 55-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से नीचे कारोबार कर रहा है। सभी प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे बने रहने की यह स्थिति तकनीकी ढांचे में स्पष्ट कमजोरी का संकेत देती है। जब भी बाजार में कोई रिकवरी की कोशिश होती है, तो ऊपरी स्तरों पर तुरंत ताजा बिकवाली हावी हो जाती है।
मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रवि सिंह ने तकनीकी स्थिति पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि नीचे की तरफ 22,250 का स्तर तात्कालिक समर्थन बना हुआ है। यदि सूचकांक 22,250 के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है, तो बिकवाली का दबाव और तेज हो सकता है तथा 22,000 की ओर रास्ता खुल सकता है। उन्होंने आगे कहा कि ऊपर की दिशा में 22,700 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध क्षेत्र है, और इस स्तर की ओर किसी भी संभावित उछाल में बिकवाली का सामना करना पड़ेगा, जिससे उछाल पर बिकवाली की रणनीति बरकरार रहेगी।
आगामी हफ्ते में ट्रेडर्स के लिए निफ्टी में 22,250 का स्तर बेहद अहम लक्ष्मण रेखा का काम करेगा। इस स्तर के टूटने पर 22,000 का मनोवैज्ञानिक दायरा सामने आएगा, जबकि किसी भी तेजी की स्थिति में 22,700 पर रुकावट देखने को मिलेगी।
बैंक निफ्टी में भी कमजोरी बरकरार, 54,000 का स्तर अहम
बैंकिंग शेयरों में भी मंदी का दबाव बदस्तूर जारी रहा, जहां बैंक निफ्टी सूचकांक लगातार छठे हफ्ते नुकसान में बंद हुआ। सप्ताह के दौरान बैंक निफ्टी 2.03 प्रतिशत टूटा और अपने सभी महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा, जो कमजोर तकनीकी बनावट की पुष्टि करता है।
बैंक निफ्टी के तकनीकी परिदृश्य पर डॉ. रवि सिंह ने बताया कि निचले स्तर पर 54,000 तात्कालिक समर्थन के साथ-साथ महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। इस दायरे के नीचे निर्णायक ब्रेकडाउन होने पर गिरावट की रफ्तार तेज हो सकती है और सूचकांक 53,500 की तरफ लुढ़क सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऊपरी स्तरों पर 55,000 पर मुख्य रेजिस्टेंस नजर आ रहा है, और जब तक सूचकांक इस बाधा के नीचे टिका रहता है, तब तक उछाल पर बेचने की रणनीति ही बेहतर रहेगी, जहां 55,000 से 55,100 की ओर आने वाला कोई भी उछाल नई शॉर्ट पोजीशन बनाने का अवसर प्रदान करेगा।
इस प्रकार, 5 से 9 अक्टूबर के दौरान बैंक निफ्टी के लिए 54,000 का स्तर तात्कालिक सहारा रहेगा, जिसके टूटने पर 53,500 के स्तर खुलेंगे। वहीं दूसरी ओर 55,000 से 55,100 का दायरा मजबूत अवरोध बना रहेगा।



















