अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और कमोडिटी बाजारों में सप्ताह की शुरुआत भारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के माहौल में हुई है। एक तरफ पश्चिम एशिया के यमन और सऊदी अरब के रणनीतिक इलाकों में बढ़ते सैन्य तनाव की खबरें सामने आ रही हैं, तो दूसरी तरफ प्रमुख ऊर्जा बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक कमोडिटी व्यापार के दौरान WTI क्रूड का भाव 3.60 प्रतिशत टूटकर 91.80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। ऊर्जा की कीमतों में आई इस नरमी के साथ ही विदेशी मुद्रा बाजार, सरकारी बॉन्ड यील्ड और सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली संपत्तियों में भी तेज प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
यमन और सऊदी अरब में बढ़ता भू-राजनीतिक संकट
पश्चिम एशिया के संघर्ष क्षेत्र में सोमवार को यमन के हूती गुट ने रणनीतिक पहाड़ी इलाकों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान आगे बढ़ाया। इस आक्रामक कदम का मुख्य मकसद लाल सागर के तटीय इलाकों का संपर्क सऊदी अरब समर्थित बलों के नियंत्रण वाले शेष क्षेत्रों से पूरी तरह काटना है। इस इलाके में जमीनी टकराव उस समय और तेज हुआ जब यह बात सामने आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती गुट के ठिकानों पर तय अंतिम क्षणों में अमेरिकी हमलों की योजना को रोक दिया था।
सैन्य गतिविधियों का असर सऊदी अरब की सीमा के भीतर भी दिखाई दिया। शनिवार को संघर्ष की ताजा शुरुआत के बाद पहली बार राजधानी रियाद पर हमला दर्ज किया गया। राजधानी के हवाई अड्डे के पास तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं और आसमान में धुएं का घना गुबार उठता देखा गया। इस घटना के बाद हूती गुट ने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी थीं। इस तरह के क्षेत्रीय हमलों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और तेल आपूर्ति शृंखलाओं में भारी रुकावट की आशंका लगातार बनी रहती है।
कच्चे तेल का गणित: WTI बेंचमार्क और मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया
कमोडिटी बाजारों में वैश्विक स्तर पर कारोबार होने वाले क्रूड ऑयल के तीन सबसे प्रमुख रूपों में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI), ब्रेंट क्रूड और दुबई क्रूड शामिल हैं। WTI को कमोडिटी जगत में 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड के नाम से भी जाना जाता है। इसे 'लाइट' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका घनत्व तुलनात्मक रूप से कम होता है, और 'स्वीट' इसलिए क्योंकि इसमें सल्फर यानी गंधक की मात्रा काफी कम होती है। अपनी इन रासायनिक विशेषताओं की वजह से यह बेहद उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल माना जाता है, जिसे रिफाइनरियों में पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में साफ करना काफी आसान होता है।
WTI क्रूड का उत्पादन मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर होता है। इसके परिवहन और भौतिक वितरण का सबसे बड़ा केंद्र ओक्लाहोमा का कुशिंग हब है, जिसे वैश्विक पाइपलाइन नेटवर्क के चौराहे के रूप में मान्यता प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वित्तीय बाजारों में जब भी कच्चे तेल के भाव का जिक्र होता है, तो WTI को एक महत्वपूर्ण बेंचमार्क के रूप में देखा जाता है। किसी भी अन्य वित्तीय संपत्ति की तरह WTI के भाव भी मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से तय होते हैं। जब दुनिया भर में आर्थिक वृद्धि तेज होती है तो विनिर्माण और परिवहन बढ़ने से तेल की मांग में उछाल आता है, जबकि आर्थिक मंदी के दौर में खपत कमजोर पड़ जाती है।
भू-राजनीतिक टकराव, सीमाई युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध कच्चे तेल की सामान्य आपूर्ति को बाधित कर कीमतों में भारी तेजी ला सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी WTI की कीमतों को सीधे नियंत्रित करता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का अधिकांश लेन-देन अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए तेल खरीदना सस्ता हो जाता है जिससे मांग बढ़ती है, जबकि मजबूत डॉलर आयात महंगा करके मांग पर दबाव बनाता है।
इन्वेंट्री आंकड़े और तेल निर्यातक देशों के ओपेक गठबंधन की भूमिका
कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करने में साप्ताहिक इन्वेंट्री आंकड़ों का बहुत बड़ा योगदान होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी (EIA) नियमित रूप से वाणिज्यिक तेल भंडार के आंकड़े जारी करते हैं। भंडारों में आने वाले बदलाव यह दर्शाते हैं कि बाजार में मांग अधिक है या आपूर्ति। जब इन्वेंट्री में गिरावट आती है तो इसका संकेत यह माना जाता है कि बाजार में खपत मजबूत है, जिससे तेल की कीमतें ऊपर की ओर रुख करती हैं। इसके विपरीत, यदि तेल भंडारों में बढ़ोतरी दर्ज होती है तो यह अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत होता है, जिससे कीमतों में गिरावट का दबाव बनता है।
API हर मंगलवार को अपनी इन्वेंट्री रिपोर्ट पेश करता है, जबकि इसके ठीक अगले दिन बुधवार को सरकारी एजेंसी EIA अपने आंकड़े प्रकाशित करती है। ऐतिहासिक रूप से दोनों एजेंसियों के नतीजे लगभग 75 प्रतिशत मौकों पर एक दूसरे के बेहद करीब, यानी 1 प्रतिशत के दायरे में रहते हैं। हालांकि, सरकारी संस्था होने के कारण संस्थागत निवेशक EIA के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय और आधिकारिक मानते हैं।
दूसरी ओर, 12 तेल उत्पादक देशों का संगठन ओपेक (ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) साल में दो बार होने वाली बैठकों में सदस्य देशों के लिए सामूहिक उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। ओपेक द्वारा उत्पादन में कटौती का फैसला आपूर्ति को सीमित कर देता है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें चढ़ने लगती हैं। वहीं जब यह समूह उत्पादन बढ़ाने की घोषणा करता है तो बाजार में आपूर्ति की अधिकता होने से कीमतें गिरने लगती हैं। इस व्यवस्था का एक विस्तृत रूप ओपेक प्लस (OPEC+) है, जिसमें ओपेक के मूल देशों के साथ दस अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल हैं। इन सहयोगी देशों में रूस सबसे प्रमुख और निर्णायक भूमिका निभाता है।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव: डॉलर, येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती ने कई प्रमुख करेंसी जोड़ों पर गहरा असर डाला है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) का युग्म सोमवार को एक स्पष्ट दिशा तलाशने के लिए संघर्ष करता नजर आया। 0.7140 के स्तर को दोबारा छूने के तुरंत बाद इस जोड़ी पर नए सिरे से गिरावट का दबाव देखा गया, जिसके बाद यह मंगलवार को एशियाई सत्र की शुरुआत से पहले 0.7100 के निचले स्तरों पर स्थिरता तलाशने की कोशिश कर रहा था। इस जोड़ी में आई दैनिक कमजोरी की सबसे बड़ी वजह ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर के प्रति निवेशकों का सुधरता रुझान रहा।
अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) के बाजार में भी महत्वपूर्ण गतिविधियां दर्ज की गईं। एशियाई कारोबार में यह जोड़ी 157.00 के स्तर से फिसलकर नीचे आ गई। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा की गई ब्याज दर समीक्षा के बाद बाजार में सरकारी हस्तक्षेप के बढ़ते जोखिमों के बीच जापानी येन को कुछ मजबूती मिली। हालांकि, जापान में सार्वजनिक अवकाश होने के कारण स्थानीय व्यापार सीमित रहा, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष तथा पश्चिम एशिया में गहराते संकट के कारण व्यापारी लगातार सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इन भू-राजनीतिक तनावों के कारण अमेरिकी डॉलर की गिरावट थम गई, जिसने USD/JPY की गिरावट को भी एक सीमित दायरे में बांधे रखा।
बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति और सोने के भाव में सुधार
जापान के केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने अपनी नीतिगत दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला बैंक की नीतिगत समिति में 7 के मुकाबले 2 मतों के बहुमत से लिया गया। यह निर्णय देश में मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करता है, जो वित्तीय विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों की हफ्तों पुरानी उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रहा।
कीमती धातुओं के खंड में सोने की शुरुआत नए कारोबारी चक्र में सुस्त रही। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली इस पीली धातु का कारोबार 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर के करीब बना रहा। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सभी अवधियों के दौरान आई नरमी के बावजूद अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के कारण सोने की कीमतों में यह करेक्शन यानी मुनाफावसूली देखने को मिली। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोने की खरीद महंगी हो जाती है, जिससे इसके भाव पर तात्कालिक दबाव बनता है।
तीसरी तिमाही के अंतिम दौर में वैश्विक इक्विटी और बॉन्ड बाजार
वित्तीय बाजार इस समय वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) के अंतिम सप्ताहों में प्रवेश कर रहे हैं, जहां एक बेहद असामान्य स्थिति उभरती दिखाई दे रही है। बाजार में भारी अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव का माहौल हावी है, लेकिन इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। वहीं दूसरी तरफ, यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ खुलने की तैयारी करते दिखे।
वित्तीय तंत्र में सबसे बड़ा तनाव इस समय विभिन्न देशों के सरकारी बॉन्ड बाजारों में केंद्रित है। शुक्रवार के उत्तरार्ध में यूरोपीय और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में एक बार फिर तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे कर्ज बाजारों में चिंताएं बढ़ गई हैं। बॉन्ड यील्ड में यह हलचल यह संकेत देती है कि महंगाई, केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर चक्र और वैश्विक भू-राजनीतिक टकरावों को लेकर निवेशक अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।





















