वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग स्थिर रुख के साथ बंद होने की ओर बढ़ा। भू-राजनीतिक मोर्चे पर मध्य पूर्व विवाद के संभावित समाधान को लेकर बनी उम्मीदों और दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के सख्त बयानों के बीच मुद्रा जोड़ी सीमित दायरे में फंसी नजर आई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह जोड़ी 0.7116 पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.7119 से 0.04 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाती है, जबकि सत्र के दौरान यह 0.7114 के शुरुआती स्तरों के इर्द-गिर्द मंडराती रही। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई 47 पर दर्ज किया गया है, जो किसी स्पष्ट दिशा के अभाव और तटस्थ रुख का संकेत देता है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वाशिंगटन-तेहरान वार्ता
सत्र के दौरान प्रमुख दिशा तय करने में वैश्विक भू-राजनीति की सबसे बड़ी भूमिका रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़े बयान दिए, हालांकि बाद में उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वाशिंगटन और तेहरान के वार्ताकारों के बीच एक अत्यंत उपयोगी बैठक संपन्न हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सैन्य टकराव के बजाय एक कूटनीतिक समझौते को प्राथमिकता देते हैं। कूटनीति की इस सकारात्मक पहल ने बाजार में जोखिम की भावना को कुछ हद तक सहारा दिया, लेकिन फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की आक्रामक टिप्पणियों ने अमेरिकी डॉलर को लगातार मजबूत बनाए रखा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बना रहा। इसके अलावा, बाजार प्रतिभागी गुरुवार को होने वाले आगामी ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर भी करीबी नजर रख रहे हैं।
केंद्रीय बैंकों के रुख में सख्ती: फेडरल रिजर्व और आरबीए
दोनों प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नीति निर्माताओं के बयानों ने विदेशी मुद्रा बाजार को सतर्क बनाए रखा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं ने अपने हालिया भाषणों में स्पष्ट किया कि अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त मौद्रिक सख्ती का विकल्प पूरी तरह खुला हुआ है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक की सहायक गवर्नर सारा हंटर ने चेतावनी दी कि यदि मुद्रास्फीति अधिक समय तक उच्च स्तर पर बनी रहती है, तो ब्याज दरों में दोबारा इजाफा करने की आवश्यकता पड़ सकती है। इस सख्त रुख ने सितंबर में संभावित ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों को बल दिया है। अब निवेशकों का ध्यान ऑस्ट्रेलिया के आगामी एसएंडपी ग्लोबल फ्लैश पीएमआई के सितंबर के शुरुआती आंकड़ों पर टिका हुआ है, जो अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति और विनिर्माण व सेवा क्षेत्र की गति का संकेत देंगे।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के प्रमुख तकनीकी स्तर और सपोर्ट जोन
चार्ट पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का तकनीकी ढांचा कई अहम पड़ावों को दर्शाता है। नीचे की ओर, मुद्रा जोड़ी के लिए तात्कालिक सपोर्ट 0.7115 के स्तर पर मौजूद है। लाइव डेटा के अनुसार, पहला पिवट सपोर्ट 0.7114 और दूसरा सपोर्ट 0.7113 पर आंका गया है। यदि यह स्तर टूटता है, तो 0.7091 के आसपास ट्रिपल सिंपल मूविंग एवरेज द्वारा निर्धारित एक मजबूत मांग क्षेत्र देखने को मिलेगा। इसके अतिरिक्त 50-दिवसीय एसएमए 0.7092 पर स्थित है, जबकि 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड की निचली सीमा 0.7083 और 20-दिवसीय सपोर्ट लगभग 0.7087 पर है। आगे के गिरावट वाले स्तरों में 0.7035 और 0.6905 की अपवर्ड ट्रेंड-लाइन का दायरा शामिल है, जबकि ऐतिहासिक गहरा सपोर्ट 0.6376 पर स्थित है। 52-सप्ताह का न्यूनतम स्तर 0.6422 और उच्चतम स्तर 0.7277 दर्ज है।
ऊपरी स्तरों की बात करें तो पहला क्षैतिज अवरोध 0.7198 के स्तर पर बना हुआ है। इसके बाद ऊपर की ओर ट्रेंड-लाइन का ब्रेकआउट क्षेत्र लगभग 0.7381 पर आता है। यदि तेजी का रुझान और अधिक मजबूत होता है, तो लंबी अवधि के संरचनात्मक प्रतिरोध 0.8700 और 0.9545 के करीब स्थित हैं। मूविंग एवरेज के संदर्भ में, 20-दिवसीय ईएमए 0.7137, 50-दिवसीय ईएमए 0.7108 और 200-दिवसीय ईएमए 0.6960 पर हैं, जबकि 200-दिवसीय एसएमए 0.7017 पर स्थित है। ईएमए 50 का ईएमए 200 से ऊपर रहना एक गोल्डन क्रॉस को दर्शाता है, जो लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है। हालांकि, 21 का एडीएक्स स्तर बताता है कि मौजूदा मोमेंटम कमजोर है और बाजार एक सीमित दायरे में फंसा हुआ है।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और कमोडिटी बाजार का हाल
वैश्विक मुद्रा बाजार के क्रॉस-करेंसी प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने कनाडाई डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। दूसरी तरफ, एशियाई सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में नरमी रही और यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी 157.50 के करीब मामूली बढ़त के साथ कारोबार करती दिखी। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन की गिरावट को सीमित जरूर किया, लेकिन बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण के तहत ब्याज दरों को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किए जाने के बावजूद येन पर दबाव बना रहा। बैंक ऑफ जापान का यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो 31 वर्षों के उच्च स्तर पर ब्याज दरों को ले गया, लेकिन इसे व्यापक रूप से पहले से तय माना जा रहा था।
कमोडिटी बाजार में सोने ने मंगलवार को अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल की और ठोस बढ़त के साथ प्रति ट्रॉय औंस 4,400 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंच गया। पीली धातु में यह उछाल अमेरिकी डॉलर में नए सिरे से लिवाली, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मिले-जुले रुख और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद दर्ज किया गया, जो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को रेखांकित करता है।
















