रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अधिकारी केंट ने इस बात के पुख्ता संकेत दिए हैं कि घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर न्यूट्रल ब्याज दरें लगातार बढ़ रही हैं। वित्तीय बाजारों में फैली अनिश्चितता की वजह से किसी सटीक न्यूट्रल ब्याज दर को तय करना इस समय काफी जटिल साबित हो रहा है। इस नीतिगत परिदृश्य के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बढ़त दर्ज की गई है। मुद्रा विनिमय बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.28 प्रतिशत चढ़कर लगभग 0.6965 के स्तर पर कारोबार कर रही है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह जोड़ी मजबूती हासिल करते हुए 0.6950 की सीमा की तरफ बढ़ती नजर आई।
न्यूट्रल ब्याज दर और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति
न्यूट्रल ब्याज दर वह काल्पनिक मौद्रिक स्तर होता है जिस पर अर्थव्यवस्था न तो बहुत अधिक गति पकड़ती है और न ही उसमें मंदी आती है। जब न्यूट्रल दरें बढ़ती हैं, तो केंद्रीय बैंकों को मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए अपनी औपचारिक नीतिगत दरों को उसी अनुपात में समायोजित करना पड़ता है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलियाई बैंकों के आपसी उधारी लेनदेन की दरों को निर्धारित करके पूरी अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत को सीधे नियंत्रित करता है। बैंक का प्रमुख लक्ष्य मुद्रास्फीति की वार्षिक दर को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखना है। जब किसी देश की नीतिगत ब्याज दरें दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में ऊंची होती हैं, तो विदेशी पूंजी के प्रवाह से घरेलू मुद्रा को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत अपेक्षाकृत कम ब्याज दरें मुद्रा पर दबाव बनाती हैं। इसके अतिरिक्त मात्रात्मक सहजता का रुख मुद्रा के मूल्य को घटाता है, जबकि मात्रात्मक सख्ती से मुद्रा मजबूत होती है।
लौह अयस्क और ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था का जुड़ाव
ऑस्ट्रेलिया एक विशाल संसाधन संपन्न देश है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में लौह अयस्क की कीमतों का वहां की मुद्रा पर सीधा असर पड़ता है। वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा है, जिसकी सालाना हिस्सेदारी लगभग 118 अरब डॉलर दर्ज की गई थी। इस महत्वपूर्ण खनिज का प्राथमिक गंतव्य चीन है। जब वैश्विक बाजार में लौह अयस्क की कीमतों में तेजी आती है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग में भारी इजाफा होता है, जिससे मुद्रा का मूल्य ऊपर चढ़ जाता है। इसके विपरीत कीमतों में गिरावट आने पर मुद्रा के मूल्य में कमजोरी देखी जाती है। लौह अयस्क के ऊंचे दाम देश के व्यापार संतुलन को सकारात्मक बनाए रखने में भी सीधी भूमिका निभाते हैं।
चीनी अर्थव्यवस्था और द्विपक्षीय व्यापार का प्रभाव
चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके चलते चीनी आर्थिक वृद्धि की गति ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्यांकन को गहराई से तय करती है। जब चीन की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ती हैं, तो वहां से ऑस्ट्रेलियाई कच्चे माल, तैयार माल और विविध सेवाओं की खरीद बढ़ जाती है। आयात की इस बढ़ती मात्रा का भुगतान करने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग तेज होती है, जिससे विनिमय दरों को स्पष्ट सहारा मिलता है। जब चीनी विकास दर अनुमानों से धीमी रह जाती है, तो इसका विपरीत असर देखने को मिलता है। चीन के आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों में आने वाले सकारात्मक या नकारात्मक उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और उससे जुड़ी अन्य वैश्विक मुद्राओं के व्यापारिक जोड़ों को प्रभावित करते हैं।
व्यापार संतुलन और बाजार का जोखिम रुख
किसी भी देश का व्यापार संतुलन उसके द्वारा किए जाने वाले निर्यात से होने वाली आय और आयात पर किए जाने वाले खर्च के अंतर को दर्शाता है। ऑस्ट्रेलिया जब अपने उच्च मांग वाले उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, तो आयात खर्च की तुलना में विदेशी खरीदारों से आने वाला अधिशेष विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान करता है। सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा के मूल्य को बढ़ाता है, जबकि नकारात्मक संतुलन से कमजोरी पैदा होती है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में निवेशकों का रुख भी मुद्रा की दिशा तय करता है। जब निवेशक जोखिम लेने की स्थिति में होते हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम से जुड़ी मुद्राओं में तेजी आती है। सुरक्षित ठिकानों की तरफ निवेशकों के रुख के समय इस मुद्रा में नरमी दर्ज की जाती है।
अमेरिकी डॉलर में बिकवाली और अन्य संपत्तियों का रुख
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर चौतरफा बिकवाली का दबाव देखा गया है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष वॉर्श ने मूल्य स्थिरता बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन भविष्य में ब्याज दरों के रास्ते को लेकर कोई स्पष्ट रुख पेश नहीं किया। इस अनिर्णायक टिप्पणी के कारण अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ और प्रतिद्वंद्वी मुद्राओं को आगे बढ़ने का मौका मिला। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र में गिरकर 158.00 के स्तर से नीचे फिसल गई। दूसरी ओर सर्राफा बाजार में सोने के भाव में उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी डॉलर में नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में हल्की रिकवरी के बीच सोना 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक नीचे घट-बढ़ के साथ कारोबार कर रहा है।




















