कम वेतन में महीने के जरूरी खर्चे पूरे करने के बाद बचत के लिए पैसे बचाना अक्सर एक कठिन चुनौती लगता है। जब हर महीने की कमाई तीस हजार रुपये के आसपास सीमित हो, तो घर का किराया, बिजली का बिल, राशन, बच्चों की जरूरतें और दैनिक आने-जाने का किराया जेब पर भारी पड़ने लगता है। अधिकांश कामकाजी लोगों की शिकायत यही रहती है कि महीने के आखिरी सप्ताह तक पहुंचते-पहुंचते उनका बैंक खाता लगभग खाली हो जाता है। हालांकि, वित्तीय अनुशासन और वेतन आते ही खर्चों का सुनियोजित खाका तैयार कर लेने से कम कमाई में भी एक सम्मानजनक रकम बचाई जा सकती है। आगरा के चार्टर्ड अकाउंटेंट सुनील कुमार सिंह का मानना है कि यदि पहली तारीख को ही वेतन के बंटवारे की योजना बना ली जाए, तो तीस हजार रुपये की सीमित आय में से भी हर महीने छह से सात हजार रुपये की बचत सुनिश्चित की जा सकती है।
अनिवार्य खर्चों का सटीक वर्गीकरण और प्राथमिक बजट
बचत का पहला नियम यह है कि वेतन हाथ में आते ही सबसे पहले उन खर्चों की सूची तैयार की जाए, जिन्हें किसी भी स्थिति में टाला नहीं जा सकता। सुनील कुमार सिंह के दिए गए गणित के अनुसार, मान लीजिए कि किसी व्यक्ति को तीस हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। इस कुल राशि में से अगर लगभग सात हजार रुपये घर के किराए में चले जाते हैं, और इसके साथ ही बिजली, पानी व अन्य अनिवार्य उपयोगिता बिलों पर करीब तीन हजार रुपये खर्च होते हैं, तो कुल दस हजार रुपये सीधे तौर पर अनिवार्य देनदारियों में निकल जाते हैं। इसके बाद आपके हाथ में बीस हजार रुपये की शुद्ध रकम बचती है।
इस बची हुई बीस हजार रुपये की राशि को बेहद सावधानी से प्रबंधित करने की आवश्यकता होती है। यात्रा, पेट्रोल या सार्वजनिक परिवहन के मद में लगभग तीन हजार रुपये का बजट निर्धारित किया जा सकता है। इसके अलावा, यदि परिवार में दो मोबाइल फोन इस्तेमाल हो रहे हैं, तो उनके मासिक रिचार्ज के लिए करीब एक हजार रुपये अलग निकाल कर रख लेने चाहिए। इस तरह चार हजार रुपये और अलग करने के बाद सोलह हजार रुपये बचते हैं, जिनमें से घर का राशन, भोजन सामग्री, कभी-कभार का मनोरंजन और अन्य छोटे-मोटे फुटकर खर्च आसानी से निकाले जा सकते हैं। इस पूरी व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने पर महीने के अंत में छह से सात हजार रुपये की सुरक्षित बचत संभव हो जाती है।
फिजूलखर्ची पर अंकुश और बचत को प्राथमिकता
ज्यादातर लोग महीने भर मनमर्जी से खर्च करते हैं और अंत में यदि कुछ बच जाए, तो उसे बचत मान लेते हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट के अनुसार, यह नजरिया पूरी तरह गलत है। तीस हजार रुपये की सीमित आय में बचत करने के लिए अनावश्यक खरीदारी, बिना योजना के बाहर खाने-पीने और दिखावे वाली फिजूलखर्ची पर सख्त नियंत्रण रखना सबसे जरूरी कदम है। जब आप गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करते हैं, तो छोटी-छोटी रकम मिलकर एक बड़ा आधार तैयार करती है। इसलिए वेतन क्रेडिट होते ही बचत की तय राशि को अलग खाते में डाल देना चाहिए, ताकि खर्च हमेशा बची हुई रकम में से ही किया जाए। समय के साथ यह छोटी बचत एक मजबूत पूंजी का रूप ले लेती है।
पहली प्राथमिकता: आपातकालीन निधि का निर्माण
बचत की शुरुआत करते समय सीधे जोखिम भरे विकल्पों में कूदने के बजाय सबसे पहले एक आपातकालीन फंड तैयार करना चाहिए। जीवन में अचानक आने वाले संकट, जैसे कि अचानक कोई मेडिकल समस्या, अस्पताल का खर्च या नौकरी छूटने जैसी परिस्थितियां किसी को भी वित्तीय संकट में डाल सकती हैं। यदि आपके पास पहले से एक आपातकालीन पूंजी जमा होगी, तो संकट की घड़ी में आपको दोस्तों, रिश्तेदारों के आगे हाथ फैलाने या ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
आपातकालीन फंड के लिए बचाई गई रकम को बैंक के सामान्य बचत खाते या फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी जैसे सुरक्षित विकल्पों में रखना समझदारी माना जाता है। किसी भी बैंक में एफडी कराने या बचत खाता चुनने से पहले उसकी ब्याज दर, पैसे जमा करने के नियम और आपात स्थिति में बिना किसी भारी जुर्माने के तत्काल पैसे निकालने की सुविधा को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। तरलता ऐसी होनी चाहिए कि जरूरत पड़ने पर आधी रात को भी पैसा निकाला जा सके।
लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए एसआईपी और सरकारी योजनाएं
जब आपातकालीन जरूरत के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो जाए, तब भविष्य के बड़े लक्ष्यों के लिए निवेश की शुरुआत करनी चाहिए। सुनील कुमार सिंह का सुझाव है कि तीस हजार रुपये के वेतन में से लगभग तीन हजार रुपये प्रति माह की एक सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी शुरू की जा सकती है। एसआईपी के माध्यम से नियमित अंतराल पर म्यूचुअल फंड योजनाओं में एक निश्चित रकम निवेश होती रहती है।
यह ध्यान रखना बेहद आवश्यक है कि म्यूचुअल फंड सीधे तौर पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़े होते हैं, इसलिए इनमें रिटर्न की कोई निश्चित या गारंटीशुदा दर नहीं होती। हालांकि, यदि कोई निवेशक पांच, दस या पंद्रह वर्षों की लंबी अवधि तक अनुशासित रहकर निवेश जारी रखता है, तो उसे चक्रवृद्धि ब्याज का जबरदस्त लाभ मिल सकता है। एसआईपी शुरू करने से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता, आय की निरंतरता और जीवन के लक्ष्यों का निष्पक्ष आकलन अवश्य करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, कम जोखिम चाहने वाले लोग बैंक एफडी के अलावा केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा चलाई जाने वाली विभिन्न बचत योजनाओं का भी लाभ उठा सकते हैं। किसी भी योजना में अपनी गाढ़ी कमाई लगाने से पहले उसकी परिपक्वता अवधि, निकासी के कड़े नियम, ब्याज दरें और कर से जुड़ी शर्तों की पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।


















