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जापानी केंद्रीय बैंक ने दिए और ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत, मुद्रास्फीति दो प्रतिशत के करीबबाज़ार
18 अक्तू॰ 2026, 1:45 am (2 घंटे पहले)· 0

जापानी केंद्रीय बैंक ने दिए और ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत, मुद्रास्फीति दो प्रतिशत के करीब

बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने स्पष्ट किया है कि बुनियादी महंगाई दो प्रतिशत के लक्ष्य के निकट पहुंचते ही उधारी लागत में और इजाफा किया जाएगा।

बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने वित्तीय नीतियों को सामान्य बनाने की दिशा में अपने रुख को दोहराते हुए कहा है कि देश में उधारी लागत में वृद्धि का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। टोक्यो में केंद्रीय बैंक के शीर्ष नीति निर्माता ने स्पष्ट संकेत दिया कि जापान की बुनियादी मुद्रास्फीति अब दो प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुकी है। ऐसी परिस्थिति में केंद्रीय बैंक आने वाले समय में वित्तीय ढिलाई को कम करने के लिए तैयार है, हालांकि भविष्य में दरों में होने वाले बदलावों का समय और रफ्तार विदेशी मुद्रा विनिमय दरों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की वैश्विक मांग और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।

गवर्नर उएदा के इस नीतिगत बयान के बाद शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में बहुत तेज उथल-पुथल देखने को नहीं मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन 157.95 के स्तर के आसपास लगभग स्थिर बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक का यह रुख बाजार की मौजूदा उम्मीदों के काफी हद तक अनुकूल है। उएदा ने साफ किया कि आर्थिक गतिविधियां और कीमतों की चाल काफी हद तक बैंक के पहले से तय अनुमानों के अनुरूप बनी हुई हैं, और बोर्ड अपनी आगामी नीतिगत समीक्षा बैठक में इस बात पर विचार करेगा कि क्या बुनियादी मुद्रास्फीति के अपने पिछले आकलन में कोई औपचारिक संशोधन करने की आवश्यकता है।

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नीतिगत रुख और एआई मांग का वैश्विक परिदृश्य

काज़ुओ उएदा के वक्तव्य की समीक्षा करने वाले विश्लेषणात्मक पैमाने पर उनके इस संबोधन को 8.2 अंक दिए गए, जो उनके ऐतिहासिक 7.5 के सामान्य आधार स्तर से उल्लेखनीय रूप से अधिक है। यह स्कोर दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक का झुकाव अब दरों को सख्त करने की दिशा में थोड़ा अधिक मुखर हो चुका है। उएदा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जापान की बुनियादी महंगाई अब दो प्रतिशत के आंकड़े के बेहद पास है। जब तक वित्तीय स्थितियां सहायक और अनुकूल बनी रहेंगी, तब तक बैंक ऑफ जापान ब्याज दरों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ोतरी करने की राह पर आगे बढ़ता रहेगा। यह रुख जापानी येन को गिरावट से बचाने और आने वाले दिनों में उसे मजबूती प्रदान करने में सहायक माना जा रहा है।

गवर्नर ने यह भी उल्लेख किया कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी से बढ़ती मांग कीमतों पर दबाव डाल रही है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अन्य देशों के केंद्रीय बैंकरों और नीति निर्माताओं से बातचीत के बाद उन्होंने पाया कि कई वैश्विक अधिकारी एआई मांग को लेकर जापान के पहले के अनुमानों से भी अधिक उत्साहित हैं। उएदा ने बताया कि वैश्विक नीति निर्माताओं से जो बातें सामने आई हैं, उनमें और जापान के आंतरिक आकलन में कोई बड़ा अंतर नहीं है। इस तरह के तकनीकी विकास से उत्पन्न मांग दुनिया भर में मूल्य वृद्धि को सहारा दे सकती है, जिसका प्रभाव सीधे तौर पर जापान की आयातित लागतों और घरेलू उत्पादन पर भी पड़ सकता है।

मुद्रास्फीति को लक्ष्य पर टिकाए रखने की नई चुनौती

गवर्नर उएदा ने जोर देकर कहा कि जैसे-जैसे बुनियादी मुद्रास्फीति दो प्रतिशत के स्तर के निकट पहुंच रही है, वैसे-वैसे कीमतों को इस लक्ष्य के आसपास मजबूती से टिकाए रखना पहले की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाल की बैठकों में ऐसा कोई नया तथ्य सामने नहीं आया है जो केंद्रीय बैंक के मूल आधारभूत नजरिए को बदलने के लिए मजबूर करे। आगामी नीतिगत बैठक में अधिकारी इस बात पर गहन चर्चा करेंगे कि क्या आधिकारिक आकलन में इस बदलाव को दर्ज किया जाए कि मुद्रास्फीति लक्ष्य के मुहाने पर खड़ी है।

इसके अलावा उएदा ने यह जानकारी भी साझा की कि एशविले में हुई मुलाकात के बाद से उनका अमेरिकी ट्रेजरी सचिव बेसेन्ट के साथ कोई सीधा संवाद नहीं हुआ है। दरों में बढ़ोतरी के भविष्य के समय और गति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इसका निर्धारण पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। इसमें मुख्य रूप से तीन कारकों की निगरानी की जाएगी, जिसमें मुद्रा विनिमय दरों में होने वाले उतार-चढ़ाव, एआई तकनीक के विस्तार से पैदा होने वाली नई मांग, और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात शामिल हैं, क्योंकि ये सभी कारक ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।

अति-उदार मौद्रिक नीति का ऐतिहासिक सफर

बैंक ऑफ जापान देश का केंद्रीय बैंक है, जिसका प्राथमिक कार्य बैंक नोट जारी करना और देश में मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मुद्रा और मौद्रिक नियंत्रण का संचालन करना है। जापान में मूल्य स्थिरता का अर्थ करीब दो प्रतिशत की वार्षिक मुद्रास्फीति दर हासिल करना माना गया है। इस लक्ष्य को पाने के लिए केंद्रीय बैंक को लंबे समय तक लीक से हटकर असामान्य कदम उठाने पड़े थे।

जापान ने साल 2013 में लंबे समय से चली आ रही आर्थिक मंदी और अत्यंत कम मुद्रास्फीति के माहौल से निपटने के लिए एक व्यापक अति-उदार मौद्रिक नीति की शुरुआत की थी। इस नीति का मुख्य आधार क्वांटिटेटिव और क्वालिटेटिव ईजिंग यानी मात्रात्मक और गुणात्मक ढिलाई थी। इसके तहत केंद्रीय बैंक ने अर्थव्यवस्था में नकदी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए नए नोट छापे और सरकारी तथा कॉरपोरेट बॉन्ड जैसी वित्तीय संपत्तियों की बड़े पैमाने पर खरीद शुरू की। इस कदम का मकसद बाजार में सस्ती पूंजी उपलब्ध कराकर निवेश और खपत को प्रोत्साहित करना था।

अर्थव्यवस्था को और अधिक सहारा देने के उद्देश्य से साल 2016 में केंद्रीय बैंक ने अपनी इस रणनीति को और आक्रामक बना दिया। बैंक ने सबसे पहले नकारात्मक ब्याज दरों की प्रणाली लागू की, ताकि वाणिज्यिक बैंक अपने पैसे केंद्रीय बैंक में जमा रखने के बजाय बाजार में कर्ज के रूप में बांटें। इसके साथ ही बैंक ने 10 वर्षीय जापानी सरकारी बॉन्ड के प्रतिफल को सीधे अपने नियंत्रण में लेने के लिए यील्ड कर्व कंट्रोल नीति लागू की। हालांकि, एक दशक से अधिक समय तक इस व्यवस्था को चलाने के बाद, मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की और अपनी अति-उदार मौद्रिक नीति से औपचारिक रूप से पीछे हटने की शुरुआत कर दी।

कमजोर येन और वेतन वृद्धि का कीमतों पर प्रभाव

केंद्रीय बैंक द्वारा कई वर्षों तक दिए गए भारी प्रोत्साहन पैकेज का एक बड़ा प्रतिकूल असर जापानी मुद्रा पर पड़ा, जिसके चलते येन प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले काफी कमजोर हो गया। यह स्थिति साल 2022 और 2023 के दौरान और अधिक गंभीर हो गई, जब दुनिया भर के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने कई दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंची मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी शुरू की। बैंक ऑफ जापान द्वारा दरों को शून्य से नीचे बनाए रखने और बाकी दुनिया में दरें बढ़ने के कारण ब्याज दरों का अंतर बहुत चौड़ा हो गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर येन का मूल्य तेजी से गिरता चला गया।

साल 2024 में जब बैंक ऑफ जापान ने अपनी अति-ढीली मौद्रिक नीति को त्यागने का मन बनाया, तब जाकर मुद्रा अवमूल्यन के इस रुझान में कुछ ठहराव आया। कमजोर येन और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में आए उछाल ने जापान के भीतर आयात लागत को बढ़ा दिया, जिससे मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य को पार कर गई। इसके साथ ही, देश में वेतन वृद्धि की मजबूत संभावनाओं ने भी महंगाई को लगातार हवा दी। जापान में वेतन और कीमतों का यह आपसी चक्र मुद्रास्फीति को टिकाऊ बनाने में सबसे अहम कारक साबित हो रहा है, जिसे गवर्नर उएदा अब सामान्य दरों की ओर लौटने के लिए आधार बना रहे हैं।

वैश्विक बाजारों और मुद्राओं में हलचल

उएदा के बयानों के बीच शुक्रवार के कारोबारी सत्र में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी तेजी को बढ़ाते हुए 0.6950 के स्तर की ओर उछल गया। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श की टिप्पणियों के बाद अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे अन्य मुद्राओं को संभलने का मौका मिला। वॉर्श ने अपने वक्तव्य में कहा कि वह भविष्य में ब्याज दरों के रास्ते पर कोई ठोस संकेत दिए बिना केवल मूल्य स्थिरता लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस अनिर्णायक टिप्पणी से अमेरिकी मुद्रा को झटका लगा।

इसी तरह अमेरिकी डॉलर में आई ताजा बिकवाली के कारण डॉलर-येन जोड़ी पर दबाव बना और इसने एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर छोड़ दिया। फेडरल रिजर्व के रुख में स्पष्टता न होने से निवेशकों ने डॉलर में अपनी पोजीशन हल्की की, जिसका फायदा येन और अन्य प्रतिस्पर्धी मुद्राओं को मिला। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज की गई। पीली धातु 4,180 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार करती दिखी, जिसमें खरीदार अक्टूबर के कारोबारी दायरे के ऊपरी स्तर यानी 4,230 डॉलर के क्षेत्र को छूने की कोशिश में लगे हुए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के नरम बयानों ने सोने की कीमतों को जबरदस्त मजबूती प्रदान की है।

क्रिप्टोकरेंसी और अमेरिकी शेयर बाजारों का हाल

पारंपरिक मुद्राओं और सोने के उलट डिजिटल संपत्ति बाजार अक्टूबर के महीने में लगातार दबाव का सामना कर रहा है। प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन इस सप्ताह की शुरुआत में 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई थी, हालांकि शुक्रवार तक इसमें मामूली सुधार हुआ और यह 82,000 डॉलर के आसपास कारोबार करती देखी गई। व्यापक आर्थिक चिंताओं, अनिश्चितताओं और निवेशकों की सुस्त पड़ती मांग ने फिलहाल पूरे क्रिप्टो बाजार पर भारी दबाव बना रखा है।

दूसरी ओर, अमेरिकी शेयर बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल रहा, क्योंकि जोखिम से बचने की भावना ने सरकारी बॉन्ड में निवेश को बढ़ावा दिया। तकनीकी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी के बीच निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों और आगामी मध्यावधि चुनावों पर टिकी हुई हैं। इसके अलावा ब्रिटेन के रोजगार और मुद्रास्फीति के नए आंकड़े भी बाजार के रडार पर हैं, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की मौजूदा उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं। इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच, जापानी केंद्रीय बैंक का अपनी उधारी दरों को सामान्य करने का कदम यह दिखाता है कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अब शून्य ब्याज दरों के लंबे दौर से पूरी तरह बाहर निकलने की कोशिश में जुटी हैं।

सवाल-जवाब

बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने ब्याज दरों को लेकर क्या कहा?
गवर्नर उएदा ने दोहराया कि जापान में बुनियादी मुद्रास्फीति 2% के लक्ष्य के करीब पहुंच रही है, इसलिए ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी जारी रहेगी।
भविष्य में दरें बढ़ाने का फैसला किन बातों पर निर्भर करेगा?
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की दरों का समय और रफ्तार विदेशी मुद्रा दरों, एआई तकनीक की मांग और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।
गवर्नर के बयान के बाद डॉलर और येन के विनिमय दर पर क्या असर हुआ?
बयान के तुरंत बाद बाजार में बहुत सीमित प्रतिक्रिया रही और डॉलर-येन की जोड़ी 157.95 के स्तर के आसपास लगभग स्थिर बनी रही, हालांकि बाद में इसने 158.00 का स्तर छोड़ा।
बैंक ऑफ जापान ने अपनी अति-उदार मौद्रिक नीति कब वापस ली थी?
बैंक ऑफ जापान ने मार्च 2024 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके अपनी 2013 से चली आ रही अति-उदार मौद्रिक नीति और नकारात्मक ब्याज दरों से हटने की शुरुआत की थी।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी के बाजारों में इस दौरान क्या रुझान देखा गया?
सोने की कीमतें 4,180 डॉलर प्रति औंस के करीब मजबूत रहीं, जबकि बिटकॉइन 80,000 डॉलर से नीचे गिरने के बाद सुधरकर 82,000 डॉलर के स्तर पर पहुंचा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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