कर्नाटक के प्रमुख शहरों में नए घरेलू एलपीजी कनेक्शन हासिल करने के लिए हजारों परिवारों को लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ रहा है। राज्य में तेजी से बढ़ती शहरी आबादी, नए आवासीय इलाकों के विस्तार और कामगारों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच घरेलू रसोई गैस की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। इसके बावजूद लगभग छत्तीस हजार नए घरेलू एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन के आवेदन पिछले कई महीनों से सरकारी तेल विपणन कंपनियों के पास लंबित पड़े हैं। आवश्यक प्रक्रिया रुक जाने की वजह से आम उपभोक्ताओं को समय पर नियमित रसोई गैस नहीं मिल पा रही है, जिससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों के सामने दैनिक भोजन पकाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
शहरी केंद्रों के तेजी से फैलाव के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, प्रवासी श्रमिकों और नए रिहायशी क्षेत्रों में बसे लोगों को कनेक्शन मिलने में सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। इस गंभीर प्रशासनिक और आपूर्ति समस्या को रेखांकित करते हुए अरशद ने केंद्रीय मंत्री पुरी को एक पत्र लिखा है। इस पत्राचार में उन्होंने स्पष्ट किया है कि हाल के वर्षों में कर्नाटक के भीतर अभूतपूर्व जनसंख्या वृद्धि और औद्योगिकीकरण हुआ है। परिणामस्वरूप, नियमित घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, लेकिन नई मंजूरी की प्रक्रिया ठप होने से जमीनी स्तर पर नागरिकों की मुश्किलें हर बीतते दिन के साथ बढ़ती जा रही हैं।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट
घरेलू गैस वितरण में आई इस रुकावट का सीधा संबंध पश्चिम एशिया में उपजे गंभीर तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति संकट से जुड़ा हुआ है। फरवरी के अंतिम दिनों में पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज होने के बाद वैश्विक स्तर पर तेल और गैस परिवहन पर बहुत गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इस संकट का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर देखा गया है, जो दुनिया भर में ऊर्जा परिवहन के सबसे संवेदनशील समुद्री गलियारों में गिना जाता है। दुनिया के कुल व्यापारिक तेल और गैस परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इस रणनीतिक जलडमरूमध्य में बाधा उत्पन्न होने से कच्चे तेल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की अंतरराष्ट्रीय खेप बुरी तरह प्रभावित हुई है।
इस अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण संभावित किल्लत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से घरेलू स्तर पर नए नियमित कनेक्शन देने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी प्रमुख सार्वजनिक तेल कंपनियों में 14.2 किलोग्राम क्षमता वाले इंडेन, एचपी गैस और भारत गैस के नए कनेक्शनों की बुकिंग मार्च 2026 से बंद रखी गई है। हालांकि आम नागरिक लगातार नई गैस आपूर्ति के लिए आवेदन करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन गैस कंपनियों के पोर्टल और वितरकों के स्तर पर नियमित घरेलू कनेक्शन जारी करने की अनुमति फिलहाल नहीं दी जा रही है।
घरेलू रिफाइनरियों का उत्पादन और जमीनी चुनौतियां
आयातित गैस आपूर्ति पर बने दबाव को कम करने के लिए देश के भीतर स्थित तेल रिफाइनरियों ने उत्पादन में उल्लेखनीय तेजी लाई है। भारतीय रिफाइनरियों ने एलपीजी का उत्पादन बढ़ाकर औसतन 44,000 टन प्रतिदिन तक पहुंचा दिया है। उत्पादन का यह वर्तमान स्तर अगस्त के सामान्य औसत की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में भारी मांग और पहले से लंबित आवेदनों की संख्या इतनी अधिक है कि नए कनेक्शनों को सामान्य रूप से चालू करने के संबंध में अभी तक पूरी स्पष्टता सामने नहीं आ सकी है।
अरशद ने अपने पत्र में यह गहरी चिंता भी व्यक्त की है कि यदि नियमित घरेलू एलपीजी कनेक्शनों की उपलब्धता लंबे समय तक बहाल नहीं हुई, तो कई परिवारों को मजबूरी में पारंपरिक ईंधनों की तरफ लौटना पड़ेगा। जब स्वच्छ रसोई गैस उपलब्ध नहीं होती, तो लोग लकड़ी, कोयला और मिट्टी के तेल जैसे प्रदूषणकारी ईंधनों का इस्तेमाल करने लगते हैं। इससे न केवल महिलाओं का घरेलू श्रम और समय का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, बल्कि घरों के भीतर धुआं फैलने से वायु प्रदूषण और श्वसन संबंधी बीमारियों का जोखिम भी खड़ा होता है। इसके अलावा बंद कमरों में पारंपरिक चूल्हों के इस्तेमाल से घरेलू आगजनी और दुर्घटनाओं की आशंका भी काफी बढ़ जाती है।
कालेबाजार का जोखिम और छोटे सिलेंडरों का आर्थिक भार
घरेलू कनेक्शन मिलने में आ रही देरी से अवैध गतिविधियों और कालाबाजारी को भी बढ़ावा मिलने की आशंका जताई गई है। जब नियमित सिलेंडर नहीं मिल पाते, तो लोग अनधिकृत स्रोतों से गैस हासिल करने की कोशिश करते हैं, जिससे मुनाफाखोरी करने वालों को बढ़ावा मिलता है। विशेष रूप से बेंगलुरु और मैसूरु जैसे बड़े शहरों में रहने वाले प्रवासी कर्मचारियों, गिग श्रमिकों और निर्माण मजदूरों के पास पते के स्थायी दस्तावेज नहीं होते, जिससे उन्हें कानूनी रूप से तत्काल वैकल्पिक ईंधन जुटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके साथ ही लागत का अंतर भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। मानक 14.2 किलोग्राम वाले सब्सिडी युक्त अथवा नियमित घरेलू गैस सिलेंडर की तुलना में 5 किलोग्राम वाले मिनी एलपीजी सिलेंडरों की प्रति किलोग्राम लागत अधिक बैठती है। बार-बार छोटे सिलेंडर खरीदने से गरीब और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ जाता है। एकमुश्त बड़ी राहत की जगह यह छोटा विकल्प आर्थिक दृष्टि से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रहा है।
बाजार में मौजूद तत्काल विकल्प और 5 किलोग्राम मिनी सिलेंडर
नियमित कनेक्शन बंद होने की स्थिति में उपभोक्ताओं के लिए कुछ वैकल्पिक साधन बाजार में उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख 5 किलोग्राम क्षमता वाले मिनी रसोई गैस सिलेंडर हैं, जिन्हें आम बोलचाल में छोटू गैस भी कहा जाता है। यह विकल्प बाजार में इंडेन छोटू, भारत गैस मिनी और एचपी गैस अप्पू के नाम से अधिकृत एलपीजी वितरकों के पास आसानी से मिल जाता है।
- दस्तावेजों की कोई अनिवार्यता नहीं: यह 5 किलोग्राम फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर श्रेणी में आता है, जिसके लिए ग्राहकों को पते का कोई प्रमाण पत्र जमा करने की आवश्यकता नहीं होती है।
- पहचान पत्रों से छूट: इन सिलेंडरों को खरीदने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी जैसे पहचान पत्र प्रस्तुत करने की कानूनी बाध्यता नहीं रखी गई है।
- जमानत राशि से मुक्ति: सामान्य गैस कनेक्शन की तरह इसमें कोई भारी सिक्योरिटी डिपॉजिट भी नहीं लगता, जिससे अस्थायी रूप से रहने वाले छात्रों और प्रवासियों को सहूलियत मिलती है।
- त्वरित रीफिलिंग सुविधा: इस फ्री ट्रेड सिलेंडर को साल भर में आवश्यकतानुसार कितनी भी बार भरा जा सकता है और वितरक के पास जाकर रीफिल कराने में अमूमन 10 मिनट से भी कम समय लगता है।
10 किलोग्राम वाले कंपोजिट सिलेंडर और क्विक डिलीवरी सेवाएं
तेल विपणन कंपनियों ने आधुनिक तकनीक और बेहतर उपभोक्ता अनुभव को ध्यान में रखते हुए 10 किलोग्राम क्षमता वाले हल्के कंपोजिट सिलेंडर भी बाजार में उतारे हैं। इन सिलेंडरों को सुविधाजनक बनाने के लिए स्विगी के इंस्टामार्ट जैसे त्वरित डिलीवरी प्लेटफॉर्म के साथ भी जोड़ा गया है। इंडियन ऑयल ने इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ नाम से यह उत्पाद उतारा है, जो वजन में बेहद हल्का है और बिना किसी घरेलू सब्सिडी के फ्री ट्रेड एलपीजी उत्पाद के रूप में उपलब्ध है।
इसी तरह एचपीसीएल ने एचपी नव्या पेश किया है, जो देश भर के 100 से अधिक शहरों में उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा चुका है। दूसरी तरफ बीपीसीएल ने भारतगैस लाइट ज़िप की शुरुआत की है, जिसे मुख्य रूप से उन शहरी ग्राहकों के लिए तैयार किया गया है जो बेहतर आधुनिक सेवा, त्वरित डिलीवरी और आसान रखरखाव को प्राथमिकता देते हैं। ये सिलेंडर पारदर्शी फाइबर सामग्री से बने होते हैं, जिससे उपभोक्ता आसानी से गैस के बचे हुए स्तर को देख सकते हैं और भारी लोहे के सिलेंडरों को उठाने की परेशानी से बच सकते हैं।
पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी अपनाने की प्रक्रिया
सिलेंडरों की निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने के लिए नगर गैस वितरण कंपनियां और तेल विपणन कंपनियां पीएनजी नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही हैं। यदि कोई उपभोक्ता पाइपलाइन गैस कनेक्शन लेना चाहता है, तो उसे कुछ बुनियादी चरणों और पात्रता मानदंडों का पालन करना पड़ता है।
- इलाके में नेटवर्क की उपलब्धता जांचना: पीएनजी कनेक्शन के लिए सबसे पहली शर्त यह है कि आपकी संबंधित आवासीय सोसायटी या मोहल्ले में गैस पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद होना चाहिए।
- आवेदन की प्रक्रिया: यदि पाइपलाइन उपलब्ध है, तो उपभोक्ता इंडियन ऑयल, एचपीसीएल या बीपीसीएल के अधिकृत वेब पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं अथवा स्थानीय एलपीजी वितरक के पास व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर सकते हैं।
- एलपीजी कनेक्शन का समर्पण: पीएनजी का नया कनेक्शन चालू करवाने के लिए उपभोक्ता को अपना मौजूदा एलपीजी कनेक्शन आधिकारिक रूप से सरेंडर करना पड़ता है और तय कनेक्शन शुल्क का भुगतान करना होता है।
- आवश्यक दस्तावेजों की सूची: आवेदन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पुराने एलपीजी कनेक्शन के ट्रांसफर और सब्सक्रिप्शन वाउचर, उपभोक्ता रिकॉर्ड, सुरक्षा जमा रसीद, पते के प्रमाण और पहचान पत्र के तौर पर आधार कार्ड, पासपोर्ट, बिजली बिल, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र जमा करना अनिवार्य होता है।
कर्नाटक के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में साफ ईंधन की सुचारु आपूर्ति बहाल करने के लिए नीतिगत स्तर पर फैसलों का इंतजार किया जा रहा है, ताकि हजारों पेंडिंग फाइलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा हो सके।


















