भारतीय वायदा बाजार और वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। घरेलू बाजार MCX पर सोने का भाव 1,700 रुपये टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में 3,500 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर दोनों 1 फीसदी की गिरावट के साथ क्रमशः $4,300 प्रति औंस और $63 प्रति औंस पर कारोबार कर रहे हैं। कीमती धातुओं में गिरावट का यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र है, जिससे सोना और चांदी फिसलकर पिछले तीन हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
फेडरल रिजर्व के रुख से ब्याज दरें बढ़ने की आशंका
कीमती धातुओं के भाव में आई इस तेज गिरावट के पीछे अमेरिकी केंद्रीय बैंक यूएस फेडरल रिजर्व के रुख को मुख्य वजह माना जा रहा है। यूएस फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श द्वारा पिछले सप्ताह दिए गए कड़े बयानों के बाद बाजार में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। वित्तीय बाजार में निवेशक अब इस महीने दरों में वृद्धि की 70 फीसदी संभावना जता रहे हैं। जब भी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत देता है, तब बिना ब्याज देने वाली सुरक्षित धातुओं जैसे सोने और चांदी की मांग पर दबाव बनता है और निवेशक बॉन्ड की तरफ रुख करने लगते हैं।
बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और 2023 के बाद का उच्चतम स्तर
बढ़ती महंगाई और दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं के कारण दुनिया भर में सरकारी बॉन्ड की यील्ड में उछाल दर्ज किया जा रहा है। अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बुधवार को चढ़कर 4.8 फीसदी पर पहुंच गई, जो अक्टूबर 2023 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। इसके अलावा 30 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी बढ़कर 5.28 फीसदी हो गई है। इससे पहले अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा बड़े पैमाने पर बायबैक कार्यक्रम की घोषणा के बाद यील्ड में जो नरमी आई थी, वह अब पूरी तरह से पलट गई है। बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने सर्राफा बाजार के निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिका-ईरान तनाव
ऊर्जा बाजार में जारी तेजी ने भी सर्राफा बाजार के सेंटीमेंट पर नकारात्मक असर डाला है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल के दामों में उछाल आया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का खतरा और गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूएस WTI क्रूड करीब 1 फीसदी की बढ़त के साथ $91 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इसी तरह ब्रेंट क्रूड भी 1 फीसदी उछलकर $96 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल के महंगे होने से केंद्रीय बैंकों पर मौद्रिक नीति को और सख्त करने का दबाव बढ़ जाता है।
आगामी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी बाजार की निगाहें
वित्तीय बाजार के विश्लेषक और सर्राफा व्यापारी अब अमेरिका से आने वाले प्रमुख रोजगार आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। बुधवार को जारी होने वाली ADP एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट और शुक्रवार को आने वाले नॉन फार्म पेरोल डेटा से यूएस फेडरल रिजर्व के भावी नीतिगत कदमों के स्पष्ट संकेत मिलेंगे। यदि रोजगार के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत आते हैं, तो केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो सकता है, जिससे सोने और चांदी की कीमतों पर आने वाले दिनों में और दबाव देखने को मिल सकता है।



















