अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (EUR/USD) सुस्त पड़कर 1.1575 के करीब पहुंच गई। मध्य पूर्व में अचानक बढ़े सैन्य तनाव और अमेरिका के फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा प्रदान किया है। इसके चलते यूरो पर लगातार दबाव बना हुआ है और मुद्रा जोड़ी 1.1600 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार कर रही है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि गतिहीन तकनीकी संकेतकों के कारण फिलहाल इस करेंसी पैर में समेकन (कंसोलिडेशन) का दौर जारी रह सकता है।
मध्य पूर्व में गहराता सैन्य संकट और सेफ-हेवन डॉलर की मांग
वैश्विक वित्तीय बाजारों में डॉलर की मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थितियों का तेजी से बिगड़ना है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान के ठिकानों पर सिलसिलेवार हवाई हमलों की श्रृंखला पूरी की। अमेरिकी मध्य कमान (यूएस सेंट्रल कमांड) के अनुसार यह सैन्य कार्रवाई वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैन्यकर्मियों पर ईरान द्वारा किए गए संभावित हमलों के जवाब में की गई है। रिपोर्टों के अनुसार हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, केश्म द्वीप और दक्षिणी ईरान के विभिन्न हिस्सों में भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों से वैश्विक निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक संकट बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प की ओर रुख करते हैं। इसी सेफ-हेवन फ्लो का सीधा फायदा अमेरिकी ग्रीनबैक (डॉलर) को मिला है। ऊर्जा बाजारों में भी इसका व्यापक असर देखा गया, जहां कच्चे तेल और डीजल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे मुद्रास्फीति की चिंताएं एक बार फिर से सतह पर आ गई हैं।
फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श का सख्त बयान और ब्याज दर वृद्धि की शर्तें
अमेरिकी मुद्रा को दूसरा बड़ा समर्थन फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श के हालिया संबोधन से मिला है। जैक्सन होल संगोष्ठी (सिम्पोजियम) में अपने वक्तव्य के दौरान केविन वॉर्श ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि यदि मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे नहीं बढ़ती है, तो नीति निर्माताओं को एक बार फिर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कदम उठाना पड़ सकता है।
केविन वॉर्श के इस बयान ने मुद्रा बाजार की उम्मीदों को पूरी तरह बदल दिया है। वित्तीय डेटा प्रदाता सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, इस भाषण से पहले सितंबर में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना 40 प्रतिशत से भी कम आंकी जा रही थी। हालांकि, फेड अध्यक्ष की चेतावनी के बाद ट्रेडर्स ने अपनी रणनीति बदली और सितंबर में दर वृद्धि की संभावना का अनुमान उछलकर 68 प्रतिशत तक पहुंच गया। अमेरिकी दरों में वृद्धि की उच्च संभावना डॉलर की मांग को लगातार बढ़ा रही है।
EUR/USD के मुख्य तकनीकी स्तर और चार्ट विश्लेषण
दैनिक प्राइस चार्ट पर EUR/USD का तकनीकी ढांचा एक सीमित दायरे में फंसा हुआ नजर आ रहा है। यह करेंसी जोड़ी वर्तमान में अपने 100-दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज (SMA) 1.1565 के ठीक ऊपर टिकी हुई है, जो इसे तत्काल तकनीकी सहायता (सपोर्ट) प्रदान कर रहा है। हालांकि, यह 20-दिवसीय बॉलिंजर मिडिल बैंड से नीचे बनी हुई है, जिससे इसकी ऊपरी बढ़त सीमित हो गई है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में यह जोड़ी 1.16 के स्तर के आसपास स्थिर है, जबकि हालिया सत्रों में 0.34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 49.8 के स्तर पर बना हुआ है, जो तकनीकी रूप से पूरी तरह से तटस्थ स्थिति को दर्शाता है। इसका अर्थ यह है कि बाजार में इस समय किसी स्पष्ट दिशात्मक गति का अभाव है और कीमतें सपोर्ट तथा रेजिस्टेंस बैंड के बीच कंसोलिडेट हो रही हैं। 52-सप्ताह के 1.13 से 1.20 के व्यापक दायरे के बीच, अल्पकालिक तकनीकी संकेतक मिला-जुला रुख दिखा रहे हैं।
ऊपरी और निचले स्तरों के लिए महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस व सपोर्ट
कारोबारियों के लिए ऊपर की ओर पहला बड़ा अवरोध 1.1600 का स्तर है। यह स्तर बॉलिंजर मिडिल बैंड के साथ-साथ एक मनोवैज्ञानिक रेजिस्टेंस के रूप में भी काम कर रहा है। यदि यूरो इस स्तर को पार करने में सफल होता है, तो अगला प्रमुख रेजिस्टेंस 1.1710 के करीब ऊपरी बॉलिंजर बैंड पर स्थित है। इस ऊपरी स्तर पर पिछले उछाल के दौरान बिकवाली का भारी दबाव देखा गया था और आगे भी वहां सप्लाई बढ़ने की संभावना है।
इसके विपरीत, नीचे की ओर पहला तात्कालिक सपोर्ट 100-दिवसीय SMA यानी 1.1565 पर मौजूद है। यदि EUR/USD इस सपोर्ट लेवल को नीचे की तरफ तोड़ता है, तो गिरावट का दायरा बढ़कर 1.1490 के निचले बॉलिंजर बैंड तक खुल सकता है। इस स्तर के टूटने पर व्यापक कंसोलिडेशन के भीतर एक गहरा पुलबैक देखा जा सकता है, जो यूरो को और निचले स्तरों की ओर धकेल सकता है।
यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था और यूरो का वैश्विक महत्व
यूरो यूरोपीय संघ के उन 20 सदस्य देशों की साझा आधिकारिक मुद्रा है जो यूरोज़ोन का हिस्सा हैं। वैश्विक विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) बाजार में अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दुनिया की दूसरी सबसे अधिक ट्रेड की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, सभी फॉरेक्स लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका दैनिक औसत कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक था।
वैश्विक मुद्रा व्यापार में EUR/USD सबसे लोकप्रिय और तरल (लिक्विड) करेंसी पैर है। कुल अंतरराष्ट्रीय फॉरेक्स लेन-देन में इस जोड़ी की हिस्सेदारी अकेले 30 प्रतिशत की है। इसके बाद क्रमशः EUR/JPY (4 प्रतिशत), EUR/GBP (3 प्रतिशत) और EUR/AUD (2 प्रतिशत) का स्थान आता है। यही कारण है कि यूरोज़ोन और अमेरिका के आर्थिक घटनाक्रमों का असर पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों पर पड़ता है।
ईसीबी की मौद्रिक नीति और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की भूमिका
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक है। ईसीबी का प्राथमिक कार्य ब्याज दरें तय करना और संपूर्ण यूरो क्षेत्र के लिए मौद्रिक नीति का संचालन करना है। ईसीबी का मुख्य जनादेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका तात्पर्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना या आवश्यकता पड़ने पर आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना होता है।
ईसीबी का सबसे प्रमुख नीतिगत हथियार ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब यूरोज़ोन में ब्याज दरें तुलनात्मक रूप से उच्च होती हैं या दरें बढ़ने की उम्मीद होती है, तो वैश्विक निवेशक बेहतर रिटर्न की तलाश में यूरो में पूंजी लगाते हैं, जिससे यूरो मजबूत होता है। इसके विपरीत, दरें घटने पर यूरो में कमजोरी आती है। ईसीबी की शासी परिषद (गवर्निंग काउंसिल) साल में आठ बार अपनी मौद्रिक नीति बैठकों का आयोजन करती है। इन बैठकों में निर्णय यूरोज़ोन के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों और ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्यों द्वारा लिए जाते हैं।
मुद्रास्फीति डेटा और मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतकों का असर
यूरोज़ोन का मुद्रास्फीति डेटा, जिसे हरमोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेस (HICP) द्वारा मापा जाता है, यूरो की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि HICP मुद्रास्फीति ईसीबी के 2 प्रतिशत के लक्षित स्तर से अधिक बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बनता है, जो अंततः यूरो को मजबूती देता है।
इसके अतिरिक्त, अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को दर्शाने वाले अन्य प्रमुख आर्थिक संकेतक जैसे सकल घरेलू उत्पाद (GDP), विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMIs), रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण भी यूरो की चाल को प्रभावित करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश को आकर्षित करती है और ईसीबी को दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। यूरोज़ोन की कुल अर्थव्यवस्था में चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं - जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन - की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत है, इसलिए इन देशों के आर्थिक आंकड़े अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। इसके अलावा, निर्यात और आयात के अंतर को मापने वाला व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) भी यूरो की मांग को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।
कमोडिटी और अन्य मुद्रा बाजारों में हलचल
यूरो के अलावा अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) भी बुधवार के शुरुआती सत्र में गिरकर 1.3500 के स्तर के पास पहुंच गया। पाउंड पर भी सेफ-हेवन डॉलर की मांग का असर पड़ा है। अब निवेशकों की नजरें शुक्रवार को आने वाली अमेरिका की अगस्त रोजगार रिपोर्ट और यूरोज़ोन के रिटेल सेल्स आंकड़ों पर टिकी हैं।
सोने की कीमतों में भी तेज गिरावट आई है। एशियाई सत्र में सोना लगभग चार सप्ताह के निचले स्तर पर खिसककर $4,300 प्रति औंस से नीचे जाने की राह पर दिख रहा है। वहीं दूसरी ओर, कच्चे तेल के बाजार में आग लगी हुई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमतों में लगातार तीसरे दिन और पिछले छह सत्रों में पांचवीं बार तेजी दर्ज की गई, जिससे यह 24 जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड (WTI पर अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम) इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकल गया और $102.00 का नया इंट्राडे रिकॉर्ड बनाया। तेल की ये ऊंची कीमतें वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता बढ़ा रही हैं, जिससे फेड द्वारा दरों में कटौती की बजाय वृद्धि की संभावनाओं को बल मिल रहा है।



















