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राजस्थान के धौलपुर का गौरव पथ समेटे है अनूठा इतिहास, लंदन के हाइड पार्क से लेकर जय हिंद संघ की शपथ तक की कहानीराजस्थान
2 सित॰ 2026, 11:09 am (52 मिनट पहले)· 2

राजस्थान के धौलपुर का गौरव पथ समेटे है अनूठा इतिहास, लंदन के हाइड पार्क से लेकर जय हिंद संघ की शपथ तक की कहानी

धौलपुर का गौरव पथ महज एक मुख्य रास्ता नहीं बल्कि रियासतकालीन स्थापत्य कला और आजादी की लड़ाई का गवाह है। महाराज राणा उदयभान सिंह के लंदन के हाइड पार्क जैसे सपने से लेकर निहाल टावर के नीचे क्रांतिकारियों की शपथ तक, यह मार्ग धौलपुर की ऐतिहासिक धरोहरों का संगम है।

राजस्थान के धौलपुर शहर में स्थित गौरव पथ सिर्फ एक व्यस्त सड़क भर नहीं है, बल्कि यह धौलपुर के गौरवशाली अतीत, बेजोड़ स्थापत्य कला और स्वतंत्रता आंदोलन के स्वर्णिम इतिहास का जीवंत गवाह है। रियासतकाल के दौरान निर्मित यह मार्ग शहर की कई अमूल्य धरोहरों को अपने अंदर समेटे हुए है। इस एक ही रास्ते से गुजरते हुए धौलपुर के विभिन्न ऐतिहासिक अध्यायों को करीब से देखा जा सकता है, जो इसे केवल एक यातायात का जरिया न बनाकर एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गलियारा बनाते हैं।

रियासती स्थापत्य और निहाल टावर की ऐतिहासिक पहचान

गौरव पथ पर कदम रखते ही धौलपुर की रियासतकालीन वास्तुकला की झलक मिलने लगती है। इस मार्ग पर भारत का सबसे ऊंचा घंटाघर माना जाने वाला भव्य निहाल टावर शान से खड़ा है। निहाल टावर के साथ ही यहां ऐतिहासिक नगरपालिका भवन और प्रसिद्ध सिटी जुबली हॉल भी स्थित हैं। नगरपालिका की यह पुरानी इमारत धौलपुर में राजतंत्र से लोकतंत्र की ओर हुए बदलाव की पहचान मानी जाती है। इतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि सिटी जुबली हॉल को अब राजस्थान की हेरिटेज लाइब्रेरी के रूप में बदल दिया गया है, जहाँ ज्ञान और इतिहास का संरक्षण किया जा रहा है। इसी रास्ते पर आगे बढ़ने पर तीर्थराज मचकुंड के दर्शन होते हैं। एक ही मुख्य सड़क पर इतनी महत्वपूर्ण धरोहरों की मौजूदगी यह साफ दर्शाती है कि रियासतकाल में इस मार्ग का विशेष प्रशासनिक और सांस्कृतिक महत्व रहा था।

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लंदन के हाइड पार्क की तर्ज पर 'ठंडी सड़क' का सपना

धौलपुर रियासत के शासक महाराज राणा उदयभान सिंह इस गौरव पथ को एक अंतरराष्ट्रीय पहचान देना चाहते थे। इतिहासकार अरविंद शर्मा के अनुसार, महाराज राणा उदयभान सिंह की योजना गौरव पथ को इंग्लैंड के लंदन स्थित मशहूर हाइड पार्क की तर्ज पर विकसित करने की थी। वे इस मार्ग को नागरिकों और बच्चों के मनोरंजन व टहलने के लिए एक शानदार हरित स्थल बनाना चाहते थे, जिसके लिए यहां कई सुविधाएं विकसित की जा रही थीं। रियासत के दौर में इस मार्ग के दोनों ओर घने और बड़े पेड़ हुआ करते थे। इन पेड़ों की हरियाली और वहां बहने वाली ठंडी हवाओं के कारण स्थानीय लोग इसे बेहद प्यार से 'ठंडी सड़क' कहकर पुकारते थे। यदि महाराज राणा उदयभान सिंह को अपनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम करने का थोड़ा और समय मिला होता, तो गौरव पथ का यह खूबसूरत विस्तार और सौंदर्यीकरण तीर्थराज मचकुंड धाम तक पहुंच जाता।

1946 का स्वतंत्रता संग्राम और जय हिंद संघ की ऐतिहासिक शपथ

गौरव पथ केवल राजशाही और स्थापत्य कला की कहानी नहीं सुनाता, बल्कि यह राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम का भी एक प्रमुख केंद्र रहा है। वर्ष 1946 में इसी गौरव पथ पर स्थित ऐतिहासिक निहाल टावर की छांव में धौलपुर के निडर क्रांतिकारियों ने 'जय हिंद संघ' की स्थापना की थी। देश की आजादी के दीवाने क्रांतिकारियों ने उस समय अपने ही शरीर से खून निकालकर कागजों पर दस्तखत किए थे और भारत माता को आजाद कराने के लिए अपनी अंतिम सांस तक संघर्ष करने की पवित्र शपथ ली थी। आज यद्यपि गौरव पथ पर आधुनिक धौलपुर शहर की तेज गतिविधियां और वाहनों की आवाजाही दिखाई देती है, लेकिन यहां मौजूद पुरानी ऐतिहासिक इमारतें हर आने-जाने वाले को धौलपुर के उसी पराक्रमी और स्वाभिमानी दौर की याद दिलाती हैं। यह मार्ग आज भी लोगों को धौलपुर के रियासती इतिहास, बेजोड़ स्थापत्य और आजादी के आंदोलनों से भावनात्मक रूप से जोड़ता है।

सवाल-जवाब

धौलपुर का निहाल टावर क्यों प्रसिद्ध है?
निहाल टावर गौरव पथ पर स्थित है और इसे भारत का सबसे ऊंचा घंटाघर माना जाता है, जो धौलपुर की रियासतकालीन स्थापत्य कला का एक प्रमुख प्रतीक है।
गौरव पथ को 'ठंडी सड़क' क्यों कहा जाता था?
रियासतकाल में गौरव पथ के दोनों ओर घने और बड़े पेड़ हुआ करते थे, जिनकी हरियाली और ठंडी छाया के कारण स्थानीय लोग इसे 'ठंडी सड़क' कहते थे।
महाराज राणा उदयभान सिंह का गौरव पथ को लेकर क्या सपना था?
इतिहासकार अरविंद शर्मा के अनुसार, महाराज राणा उदयभान सिंह गौरव पथ को इंग्लैंड के लंदन स्थित हाइड पार्क की तर्ज पर विकसित करना चाहते थे।
वर्ष 1946 में निहाल टावर के पास कौन सी ऐतिहासिक घटना घटी थी?
वर्ष 1946 में धौलपुर के क्रांतिकारियों ने निहाल टावर की छाया में 'जय हिंद संघ' की स्थापना की थी और अपने रक्त से दस्तखत करके देश की आजादी के लिए शपथ ली थी।
सिटी जुबली हॉल का वर्तमान में क्या उपयोग किया जा रहा है?
ऐतिहासिक सिटी जुबली हॉल को अब राजस्थान की हेरिटेज लाइब्रेरी के रूप में स्थापित कर दिया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·25 मिनट पहले

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि ऐतिहासिक गलियारों का विकास केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय पहचान और शहरी नियोजन का भी एक मजबूत आधार है। धौलपुर के गौरव पथ जैसी धरोहरों के संरक्षण से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी स्वतंत्रता और वास्तुकला के इतिहास से जुड़ने का सीधा अवसर मिलता है। आने वाले समय में ऐसे ऐतिहासिक मार्गों को हेरिटेज टूरिज्म सर्किट से जोड़ना क्षेत्रीय विकास के लिए बेहद प्रभावी कदम साबित होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 मिनट पहले

रोहन वर्मा की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस तरह के ऐतिहासिक और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े मार्गों का संरक्षण केवल सांस्कृतिक धरोहर बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा और हेरिटेज पुलिसिंग के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब पर्यटन बढ़ता है और ऐतिहासिक स्थलों पर भीड़ जुटती है, तब पर्यटकों की सुरक्षा और इन अमूल्य स्मारकों की हिफाजत के लिए मजबूत प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था की आवश्यकता होती है। ऐसे क्षेत्रों में विशेष हेरिटेज पुलिसिंग और आधुनिक निगरानी तंत्र लागू करना चाहिए ताकि ऐतिहासिक अखंडता और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों सुरक्षित रहें।

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