एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान बुधवार को वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह वैश्विक बेंचमार्क घटकर लगभग 80.10 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। ऊर्जा बाजार में आई इस मंदी के पीछे मुख्य वजह मध्य पूर्व में जारी कूटनीतिक गतिविधियां हैं। इरान और ओमान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक अस्थायी संयुक्त समुद्री गलियारा स्थापित करने पर विचार-विमर्श किया है। इसके साथ ही, वाशिंगटन द्वारा इरान के व्यापारिक साझेदारों पर द्वितीयक प्रतिबंध न लगाने के फैसले ने भी आपूर्ति संबंधी चिंताओं को कम किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
इरान और ओमान की समुद्री वार्ता और क्षेत्रीय मध्यस्थता की पहल
इरान और ओमान के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रहने की संभावना है, ताकि एक स्थायी व्यवस्था बनाई जा सके। प्रस्तावित समुद्री गलियारे के तहत इस रणनीतिक जलमार्ग के प्रशासन, सूचना साझा करने की प्रणालियों, नौवहन यातायात प्रबंधन, और समुद्री सुरक्षा सेवाओं के समन्वय का ढांचा तैयार किया जाएगा। इस जलमार्ग से दुनिया के कुल तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां तनाव कम होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को राहत मिलने की उम्मीद है।
समुद्री सुरक्षा वार्ताओं के साथ-साथ क्षेत्र में व्यापक कूटनीतिक प्रयास भी तेज हुए हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने हाल ही में तेहरान की यात्रा कर चल रही कूटनीतिक पहलों का समर्थन किया। दूसरी ओर, कतर ने भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि वह संकट को सुलझाने और क्षेत्रीय तनाव को घटाने के लिए मध्यस्थता प्रयासों को सक्रियता से आगे बढ़ा रहा है। इन बहुपक्षीय पहलों ने बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को घटाने में मदद की है।
प्रतिबंधों पर वाशिंगटन का रुख और आपूर्ति की वास्तविक स्थिति
अमेरिकी प्रशासन द्वारा इरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर द्वितीयक प्रतिबंध न लगाने के फैसले ने भी तेल बाजार के नरमी के रुख को बल दिया है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अल्पकालिक गिरावट के बावजूद बुनियादी आपूर्ति स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। वित्तीय विश्लेषण फर्म टीडी सिक्योरिटीज का आकलन है कि कच्चे तेल का भौतिक प्रवाह अब भी काफी सीमित बना हुआ है और रिफाइंड उत्पादों का बाजार लगातार तंग हो रहा है। इस स्थिति में जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम है, जिससे ब्रेंट क्रूड के लिए दीर्घकालिक आधार पर सकारात्मक दृष्टिकोण बना हुआ है।
WTI कच्चा तेल क्या है और इसकी कीमत कैसे तय होती है?
वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाने वाला एक प्रमुख कच्चा तेल है। यह वैश्विक तेल बाजार के तीन मुख्य बेंचमार्क में से एक है, जबकि अन्य दो ब्रेंट और दुबई क्रूड हैं। WTI को इसकी कम घनत्व (ग्रेविटी) और कम सल्फर सामग्री के कारण "लाइट" और "स्वीट" क्रूड कहा जाता है। कम सल्फर होने की वजह से इसे गैसोलीन और डीजल जैसे ईंधन में रिफाइन करना काफी आसान और कम खर्चीला होता है।
WTI का उत्पादन मुख्य रूप से अमेरिका में होता है और इसका वितरण ओकलाहोमा स्थित कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है। कुशिंग हब को "द पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड" के नाम से जाना जाता है। अन्य संपत्तियों की तरह, WTI की कीमतें भी मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के सिद्धांतों से संचालित होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि से तेल की मांग बढ़ती है, जबकि आर्थिक सुस्ती से मांग घटती है। इसके अलावा भू-राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, और प्रतिबंध आपूर्ति को बाधित कर कीमतों को प्रभावित करते हैं। अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी WTI की कीमत को प्रभावित करता है, क्योंकि कच्चा तेल डॉलर में कारोबार करता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी खरीदारों के लिए तेल खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग और कीमतें बढ़ सकती हैं।
API और EIA इन्वेंट्री रिपोर्ट का महत्व
साप्ताहिक तेल इन्वेंट्री रिपोर्ट कच्चे तेल की कीमतों को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये रिपोर्ट अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) और अमेरिकी ऊर्जा सूचना एजेंसी (EIA) द्वारा जारी की जाती हैं। इन्वेंट्री में बदलाव बाजार में आपूर्ति और मांग के उतार-चढ़ाव को दर्शाते हैं। यदि रिपोर्ट में इन्वेंट्री में गिरावट दिखाई देती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ती हैं। इसके विपरीत, इन्वेंट्री में बढ़ोतरी अधिक आपूर्ति का संकेत देती है, जिससे कीमतें गिरती हैं।
API की रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी होती है, जबकि सरकारी एजेंसी EIA अपनी रिपोर्ट अगले दिन बुधवार को प्रकाशित करती है। दोनों एजेंसियों के आंकड़े 75 प्रतिशत मामलों में 1 प्रतिशत के अंतर के भीतर एक-दूसरे से मेल खाते हैं। हालांकि, EIA एक आधिकारिक अमेरिकी सरकारी निकाय होने के कारण इसके आंकड़ों को बाजार प्रतिभागियों द्वारा अधिक सटीक और विश्वसनीय माना जाता है।
ओपेक (OPEC) और ओपेक+ की उत्पादन नीतियां
पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (ओपेक) 12 तेल उत्पादक राष्ट्रों का एक समूह है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करता है। ओपेक के फैसले सीधे तौर पर WTI की कीमतों को प्रभावित करते हैं। जब ओपेक उत्पादन कोटा घटाने का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे कीमतें ऊपर जाती हैं। इसके विपरीत, उत्पादन बढ़ाने के फैसले से कीमतें नीचे आती हैं।
ओपेक+ इस संगठन का एक विस्तृत रूप है, जिसमें 10 अतिरिक्त गैर-ओपेक तेल उत्पादक देश शामिल हैं। इनमें रूस सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली गैर-ओपेक भागीदार है। ओपेक+ के फैसले वैश्विक तेल आपूर्ति को नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
मुद्रा बाजार और सोने की स्थिति
तेल बाजार में आई गिरावट का असर अन्य वित्तीय संपत्तियों पर भी देखने को मिला है। मंगलवार को यूरो और ब्रिटिश पाउंड में मामूली मजबूती देखी गई। GBP/USD की जोड़ी सोमवार की निराशा के बाद संभली, हालांकि इसे 1.3650 के स्तर के आसपास प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। वहीं EUR/USD की जोड़ी 1.1670 के करीब कारोबार करती दिखी। निवेशक अब अमेरिकी PCE मुद्रास्फीति आंकड़ों और दूसरी तिमाही के GDP संशोधित आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
दूसरी ओर, सोना लगभग 4,650 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर स्थिर बना हुआ है। मंगलवार को सोना 14 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंचा था। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट, तेल की कम कीमतों, और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी न करने की संभावनाओं ने सोने को समर्थन दिया है, जबकि अमेरिकी डॉलर पर कुछ दबाव देखा गया है।



















