कनाडाई मुद्रा की हालिया संभलती स्थिति पर अब व्यापारिक तनाव के काले बादल मंडराने लगे हैं। वित्तीय विशेषज्ञों सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग का मानना है कि अमेरिका और कनाडा के बीच पनपे नए ट्रेड विवाद इस रिकवरी को पटरी से उतार सकते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता के अंतिम क्षणों में टूटने के बाद हालात और ज्यादा अनिश्चित हो गए हैं। इस वजह से निवेशकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं, खासकर तब जब घरेलू आर्थिक आंकड़े कुछ राहत दे रहे थे।
व्यापार वार्ता टूटने और टैरिफ का असर
व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत आखिरी वक्त पर आकर पूरी तरह विफल हो गई। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई आयात पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगा दिया है। इस कड़े कदम के जवाब में कनाडा ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी 8 सितंबर से डॉलर के बदले डॉलर का कड़ा प्रहार करेगा। इस जवाबी कार्रवाई के दायरे में मुख्य रूप से स्टील, डेयरी उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अहम सेक्टर शामिल किए गए हैं, जिससे दोनों उत्तरी अमेरिकी पड़ोसियों के बीच तनाव अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गया है。
घरेलू मोर्चे पर राहत और बेरोजगारी में गिरावट
यह तनातनी ठीक उस समय सामने आई है जब कनाडा की घरेलू आर्थिकी में सुधार के स्पष्ट संकेत मिलने शुरू हो गए थे। जुलाई महीने में देश में बेरोजगारी दर लगातार तीसरे महीने नीचे आई थी और यह सीधे दो साल के सबसे निचले स्तर यानी 6.4 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। इसी बेहतर घरेलू मोर्चे के सहारे कनाडाई डॉलर ने अपने बीते नुकसान की भरपाई करना शुरू किया था और अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने में जुटा था। लेकिन ताजा व्यापारिक मतभेद इस सकारात्मक गति को बीच में ही रोकने की पूरी क्षमता रखते हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार और अन्य मुद्राओं का हाल
वैश्विक करेंसी बाजार में भी इन दिनों काफी हलचल देखने को मिल रही है। नए कारोबारी सप्ताह के शुरुआती दिन सोमवार को जीबीपी/यूएसडी यानी ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी लगभग 1.3600 के मध्य स्तर के आसपास नकारात्मक झुकाव के साथ कारोबार कर रही है। ईरान पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर फैली अनिश्चितताओं की वजह से डॉलर में एक बार फिर मजबूती लौट आई है, जिसके चलते जोखिम के प्रति संवेदनशील माना जाने वाला पाउंड दबाव में आ गया है। इसके अलावा, यूरोपीय सत्र के दौरान ईयूआर/यूएसडी जोड़ी भी 1.1700 के नीचे रक्षात्मक रुख के साथ संघर्ष कर रही है। पिछले सप्ताह अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक योजना के कारण हुई बिकवाली से उबरने की कोशिश में डॉलर जुटा है, जबकि ईरान पर आने वाले प्रतिबंधों के विवरण का इंतजार बाजार कर रहा है।
सोने की कीमतें और ट्रेजरी का बायबैक कदम
इन तमाम अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बीच पीली धातु यानी सोना यूरोपीय सत्र में मजबूत स्थिति बनाए हुए है। सोना तीन महीने के अपने उच्चतम स्तर के करीब लगभग 4,650 डॉलर के आसपास टिका हुआ है। अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और अमेरिका-कनाडा के बीच ताजा ट्रेड टेंशन का फायदा इस कीमती मेटल को मिल रहा है। इस बीच, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने निर्धारित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने 10-वर्षीय से 30-वर्षीय सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशंस के आकार को कम से कम दोगुना करने की घोषणा की है। इसके तहत अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक चलेगी जिस पर बाजार की पैनी नजर बनी हुई है।



















