वैश्विक वित्तीय बाजारों में उस समय एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला जब मध्य पूर्व में सैन्य तनाव कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा सप्ताहांत में ईरान पर आगे के सैन्य हमले न करने के फैसले और जवाब में तेहरान द्वारा अपनी ओर से जवाबी कार्रवाई रोकने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम नीचे आए हैं। इस घटनाक्रम का सीधा असर विदेशी मुद्रा बाजार में देखने को मिला, जहां जापानी येन में मजबूती दर्ज की गई। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी मुद्रा USD/JPY 163.60 के आसपास कारोबार करती नजर आई। जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में मध्य पूर्व से कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहता है। यही वजह है कि ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आने वाली किसी भी गिरावट से जापानी अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलती है और उसकी घरेलू मुद्रा येन को मजबूती हासिल होती है।
सैन्य अभियानों पर विराम और गोला-बारूद के घटते भंडार
सैन्य रणनीतिकारों और रक्षा विशेषज्ञों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, वाशिंगटन ने ईरान के भीतर अपने हमले फिलहाल रोक दिए हैं। इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण घटते इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार और ईरान में उपयुक्त सैन्य ठिकानों की कमी को बताया जा रहा है। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप को इस स्थिति से अवगत कराया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि सैन्य अभियान को लगातार जारी रखने से अमेरिकी सेना के महत्वपूर्ण गोला-बारूद और सुरक्षा भंडार पर गंभीर दबाव बन सकता है। इस प्रशासनिक और सैन्य सतर्कता के चलते दोनों देशों के बीच जारी सीधा टकराव फिलहाल टल गया है, जिससे ऊर्जा बाजार में फैला अनिश्चितता का माहौल भी काफी हद तक शांत हुआ है।
प्रधानमंत्री साने तकाइची के सामने घरेलू राजनीतिक चुनौतियां
एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से येन को फौरी राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ जापान का घरेलू राजनीतिक परिदृश्य दबाव में दिख रहा है। रविवार को जारी योमियूरी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, जापानी प्रधानमंत्री साने तकाइची की जनस्वीकृति दर जुलाई महीने में गिरकर उनके अब तक के कार्यकाल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। देश में लगातार बढ़ती जीवनयापन की लागत और महंगाई ने जनता में असंतोष पैदा किया है। साने तकाइची की विस्तारवादी आर्थिक नीतियों की वजह से सरकारी बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि येन पिछले चार दशकों के निचले स्तरों के आसपास बना हुआ है। इस राजनीतिक अस्थिरता और जनसमर्थन में आई कमी ने जापानी सरकार पर आर्थिक सुधारों को गति देने का दबाव बढ़ा दिया है।
बैंक ऑफ जापान की नीतियां और जापानी येन की संरचना
विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन दुनिया की सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली प्रमुख मुद्राओं में शामिल है। येन का मूल्य मुख्य रूप से जापान की आर्थिक स्थिति, बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीतियों, जापानी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच अंतर तथा वैश्विक निवेशकों की जोखिम क्षमता से तय होता है। बैंक ऑफ जापान का एक मुख्य दायित्व देश की मुद्रा के मूल्य को नियंत्रित रखना भी है। केंद्रीय बैंक अतीत में येन के अत्यधिक मजबूत होने पर बाजार में सीधा हस्तक्षेप करता रहा है, हालांकि अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के राजनीतिक दबाव के कारण ऐसा कदम बार-बार उठाने से बचता है।
वर्ष 2013 से 2024 के बीच बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनाई गई अति-ढीली मौद्रिक नीति के कारण अन्य वैश्विक केंद्रीय बैंकों के साथ नीतिगत अंतर काफी बढ़ गया था, जिससे येन में अन्य मुद्राओं के मुकाबले बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। इस अवधि में अमेरिका और जापान के 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर बढ़ता चला गया, जिसने अमेरिकी डॉलर को येन की तुलना में अधिक आकर्षक बना दिया। हालांकि, वर्ष 2024 से बैंक ऑफ जापान द्वारा इस अति-ढीली नीति को धीरे-धीरे वापस लेने के फैसले और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत से यह यील्ड गैप अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक अनिश्चितता के समय येन को एक सुरक्षित ठिकाना माना जाता है, जिससे संकट के क्षणों में निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए येन का रुख करते हैं।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार का परिदृश्य
मध्य पूर्व के घटनाक्रमों का असर केवल जापानी येन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में भी हलचल देखी गई। गुरुवार की बड़ी गिरावट के बाद ब्रिटिश पाउंड ने अमेरिकी सत्र के दौरान सुधार दिखाते हुए GBP/USD को 1.3300 के स्तर से ऊपर बनाए रखा। ब्रिटेन के उम्मीद से बेहतर रिटेल सेल्स आंकड़ों और जुलाई महीने के मजबूत PMI डेटा से पाउंड को सहारा मिला, हालांकि मध्य पूर्व में तनाव बने रहने की चिंताओं के कारण इसकी बढ़त एक सीमित दायरे में ही सिमट कर रह गई।
दूसरी ओर, EUR/USD अमेरिकी सत्र के दौरान 1.1400 के निचले स्तर के नीचे कारोबार करता हुआ नजर आया। जुलाई के S&P ग्लोबल PMI आंकड़ों में विरोधाभासी स्थिति देखने को मिली, जहां मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में संकुचन दर्ज किया गया, जबकि सर्विसेज क्षेत्र में विस्तार हुआ। इन मिले-जुले आंकड़ों से बाजार में कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं हुई और निवेशकों का पूरा ध्यान मध्य पूर्व के हालात और मुद्रास्फीति से जुड़ी चिंताओं पर ही टिका रहा। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए वर्ष की पहली छमाही काफी उतार-चढ़ाव भरी रही, जहां यह चार साल के उच्च स्तर को छूने के बाद नीचे आया। वर्ष की दूसरी छमाही में मध्य पूर्व की स्थिति को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का दृष्टिकोण अनिश्चितता से भरा हुआ है।
सोने की कीमतों में उछाल और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति के खतरों को कम किया है, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना घटी है। इस माहौल के बीच सोमवार को सोने की कीमतों में एक गैप-अप बढ़त देखी गई और यह $4,100 प्रति औंस के पार निकल गया। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता की उम्मीदों से कच्चे तेल के दाम गिरने और अमेरिकी डॉलर के एक महीने के उच्चतम स्तर से पीछे हटने से सोने जैसे गैर-प्रतिफल वाले धातु को बल मिला है। अब सभी निवेशकों और वैश्विक बाजार सहभागियों की निगाहें इस सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण FOMC नीतिगत बैठक पर टिकी हैं, जो भविष्य की ब्याज दरों का रुख तय करेगी।



















