पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की नई उम्मीदें जाग उठी हैं, क्योंकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को न्यूयॉर्क रवाना होने वाले हैं। इस अहम कूटनीतिक यात्रा में उनके साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी रहेगा, जिसमें ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची मुख्य रूप से शामिल हैं। अमेरिकी धरती पर ईरानी नेतृत्व की मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खास तौर पर ऐसे वक्त में जब वैश्विक शांति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर कड़े प्रयास चल रहे हैं।
न्यूयॉर्क में पेजेशकियन का सघन कूटनीतिक एजेंडा
संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक सत्र के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। तय कार्यक्रम के अनुसार, पेजेशकियन संयुक्त राष्ट्र सत्र में शिरकत कर रहे विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। वैश्विक नेताओं के अलावा, उनके एजेंडे में अमेरिका में रहने वाले प्रमुख ईरानी प्रवासियों के साथ संवाद स्थापित करना भी शामिल है। इसके साथ ही, वे अमेरिकी विचारकों, विद्वानों और थिंक टैंकों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे ताकि दोनों देशों के बीच विचारों के आदान-प्रदान और समझ को बेहतर बनाया जा सके।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भी सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान मसूद पेजेशकियन से मिलने के लिए संभवतः तैयार हैं। यदि दोनों नेताओं के बीच किसी भी स्तर पर बातचीत संभव होती है, तो यह वैश्विक भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
वैश्विक तेल बाजार में भारी गिरावट और क्रूड का गणित
कूटनीतिक घटनाक्रमों के साथ-साथ वैश्विक जिंस बाजार में भी उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड ऑयल की कीमत दिन के कारोबार में 3.60% गिरकर 91.80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार में WTI एक बेहद महत्वपूर्ण बेंचमार्क क्रूड माना जाता है। वैश्विक बाजारों में बेचे जाने वाले तीन प्रमुख कच्चे तेल के प्रकारों में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ WTI शामिल है।
कम विशिष्ट घनत्व और कम सल्फर सामग्री के कारण WTI को हल्का और मीठा तेल कहा जाता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल माना जाता है, जिसे आसानी से परिष्कृत किया जा सकता है। इसका उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे दुनिया के पाइपलाइन चौराहे के रूप में जाना जाता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वित्तीय बाजारों में इसी WTI के भाव नियमित रूप से उद्धृत किए जाते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों को तय करने वाले मुख्य कारक
अन्य संपत्तियों की तरह ही, कच्चे तेल की कीमतों के प्राथमिक चालक मांग और आपूर्ति का बुनियादी संतुलन हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि मजबूत होने पर कच्चे तेल की मांग बढ़ती है, जबकि कमजोर वैश्विक वृद्धि की स्थिति में मांग में सुस्ती दर्ज की जाती है। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करते हैं, जिससे कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी WTI क्रूड के भाव को काफी हद तक तय करता है, क्योंकि कच्चे तेल का वैश्विक व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है। ऐसे में डॉलर के कमजोर होने पर कच्चा तेल अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए अधिक किफायती हो जाता है, जबकि डॉलर के मजबूत होने पर यह महंगा पड़ता है।
ओपेक यानी पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन भी तेल के मूल्य निर्धारण में अहम भूमिका निभाता है। ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में सामूहिक रूप से अपने सदस्य देशों के उत्पादन कोटे का फैसला करता है। जब ओपेक उत्पादन कोटा कम करने का निर्णय लेता है, तो बाजार में आपूर्ति सीमित हो जाती है और कीमतें ऊपर चढ़ने लगती हैं। इसके विपरीत उत्पादन बढ़ाने के फैसले से कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बनता है। ओपेक प्लस इस समूह का विस्तारित रूप है, जिसमें दस अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख देश रूस है।
इसके साथ ही हर हफ्ते अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी API और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी यानी EIA द्वारा जारी इन्वेंट्री रिपोर्ट भी WTI के दामों को दिशा देती हैं। स्टॉक में कमी आने का अर्थ मजबूत मांग माना जाता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं, जबकि इन्वेंट्री में बढ़ोतरी अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत देती है, जिससे दाम गिरते हैं। API अपनी रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को जारी करता है और EIA इसके अगले दिन बुधवार को आंकड़े पेश करता है। दोनों के निष्कर्ष अक्सर एक जैसे होते हैं और 75% मामलों में इनमें केवल 1% तक का अंतर रहता है, हालांकि सरकारी एजेंसी होने के कारण EIA का डेटा अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और बैंकों की नीति
वैश्विक वित्तीय बाजार भी तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में कई तरह की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD सोमवार को अपनी दिशा तय करने के लिए संघर्ष करता नजर आया। यह जोड़ी 0.7140 के स्तर को दोबारा छूने के तुरंत बाद ताजा दबाव में आ गई और एशिया में मंगलवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत से पहले 0.7100 के निचले दायरे में स्थिर होने का प्रयास कर रही थी। अमेरिकी डॉलर के प्रति मजबूत होती धारणा ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर यह दबाव बनाया।
दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी सोमवार को एशिया में 157.00 के नीचे आ गई। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा दर जांच किए जाने के बाद सरकारी हस्तक्षेप के बढ़ते जोखिम के चलते जापानी येन में हल्की मजबूती दर्ज की गई। जापान में छुट्टी के कारण व्यापारी रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इस पृष्ठभूमि में अमेरिकी डॉलर की गिरावट थमने से इस मुद्रा जोड़ी की गिरावट भी सीमित रही।
केंद्रीय बैंकों के फैसलों की बात करें तो बैंक ऑफ जापान ने व्यापक उम्मीदों के अनुरूप अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम दर्शाता है।
सोने के दाम में नरमी और बॉन्ड यील्ड की स्थिति
कमोडिटी बाजार में बहुमूल्य धातु सोने की शुरुआत भी सुस्ती के साथ हुई और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,350 डॉलर के आसपास बना रहा। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आ रही गिरावट के बावजूद अमेरिकी डॉलर में लौटी मजबूती ने सोने में यह तकनीकी सुधार पैदा किया है। वित्तीय बाजार इस समय अजीब स्थिति में हैं, जहां कच्चे तेल के दाम गिर रहे हैं, जबकि यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ खुलने की तैयारी कर रहे हैं। बाजार का दबाव मुख्य रूप से सॉवरेन बॉन्ड पर केंद्रित है, जहां यूरोपीय और अमेरिकी यील्ड शुक्रवार देर रात बढ़कर उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं।
















