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जापान में उपभोक्ता महंगाई जुलाई में बढ़कर 2.0 फीसदी पर पहुंची, कोर सीपीआई अनुमान के मुताबिक दर्जबाज़ार
21 अग॰ 2026, 7:45 am (3 घंटे पहले)· 0

जापान में उपभोक्ता महंगाई जुलाई में बढ़कर 2.0 फीसदी पर पहुंची, कोर सीपीआई अनुमान के मुताबिक दर्ज

जापान की राष्ट्रीय उपभोक्ता महंगाई दर जुलाई में बढ़कर 2.0 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि कोर सीपीआई 1.8 फीसदी पर दर्ज हुआ। आंकड़े सामने आने के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में USD/JPY जोड़ी में तेजी देखी गई।

जापानी सांख्यिकी ब्यूरो की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के महीने में जापान की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक दर में तेजी दर्ज की गई है। देश की राष्ट्रीय हेडलाइन मुद्रास्फीति सालाना आधार पर बढ़कर 2.0 फीसदी पर पहुंच गई है, जो जून महीने में 1.7 फीसदी दर्ज की गई थी। आंकड़ों में दर्ज यह बढ़ोतरी जापानी अर्थव्यवस्था के भीतर लगातार बने उपभोक्ता मूल्य दबाव को दर्शाती है, जो वैश्विक मौद्रिक रुझानों के अनुकूल है और केंद्रीय बैंक की भावी नीतियों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर रही है।

जापान में जुलाई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के मुख्य आंकड़े

आर्थिक रिपोर्ट के विस्तृत विश्लेषण से उपभोक्ता मूल्य मापन की विभिन्न श्रेणियों के स्पष्ट रुझान सामने आते हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, ताजा भोजन को छोड़कर राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी कोर मुद्रास्फीति जुलाई में सालाना आधार पर 1.8 फीसदी दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले महीने दर्ज किए गए 1.6 फीसदी से अधिक है और वित्तीय बाजार विश्लेषकों द्वारा व्यक्त किए गए अनुमानों के पूरी तरह अनुकूल है।

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इसके अलावा, ताजा भोजन और ऊर्जा दोनों घटकों को बाहर रखकर मापी जाने वाली कोर-कोर सीपीआई जुलाई महीने में सालाना आधार पर 1.8 फीसदी बढ़ी है, जो जून में 1.7 फीसदी रही थी। यह सम्मिलित आंकड़े संकेत देते हैं कि कृषि उपजों और ऊर्जा वस्तुओं की अस्थायी आपूर्ति में उतार-चढ़ाव से परे जाकर जापान में अंतर्निहित मूल्य वृद्धि लगातार गति पकड़ रही है।

मुद्रास्फीति के आंकड़े सामने आने के तुरंत बाद विदेशी मुद्रा बाजार में मूल्य प्रतिक्रिया देखी गई। ट्रेडिंग सत्र के दौरान USD/JPY मुद्रा जोड़ी 0.45 फीसदी की बढ़त के साथ 158.88 के स्तर पर पहुंच गई। संस्थागत निवेशकों और ट्रेडर्स ने फेडरल रिजर्व की नीतियों के मुकाबले बैंक ऑफ जापान की भविष्य की ब्याज दर रणनीति पर इन आंकड़ों के संभावित प्रभावों का मूल्यांकन किया।

मुद्रास्फीति की कार्यप्रणाली और केंद्रीय बैंक के लक्ष्य

मुद्रास्फीति एक मूलभूत आर्थिक संकेतक है, जिसका उपयोग किसी निश्चित समयावधि में वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिनिधि टोकरी के सामान्य मूल्य स्तर में होने वाली वृद्धि को मापने के लिए किया जाता है। अर्थशास्त्र और सांख्यिकी विशेषज्ञ आमतौर पर हेडलाइन मुद्रास्फीति को मासिक आधार और सालाना आधार पर प्रतिशत बदलाव के रूप में व्यक्त करते हैं। हेडलाइन आंकड़े राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सभी व्यापक उपभोग श्रेणियों को शामिल करते हुए समग्र उपभोक्ता खर्च में बदलाव को दर्शाते हैं।

दीर्घकालिक मौद्रिक रुझानों को बेहतर ढंग से समझने के लिए आर्थिक संस्थान हेडलाइन आंकड़ों को कोर मुद्रास्फीति से अलग करके देखते हैं। कोर मुद्रास्फीति में ताजा खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों जैसे अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले घटकों को शामिल नहीं किया जाता है। चूंकि ये विशिष्ट वस्तुएं स्थानीय मौसम, मौसमी फसल चक्र या भू-राजनीतिक आपूर्ति बाधाओं के कारण अक्सर तेज मूल्य उतार-चढ़ाव से गुजरती हैं, इसलिए इनके समावेश से वास्तविक आर्थिक दिशा अस्पष्ट हो सकती है।

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरें तय करते समय कोर मुद्रास्फीति के आंकड़ों को प्राथमिकता देते हैं। टिकाऊ आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक मूल्य स्थिरता बनाए रखने के अपने जनादेश के तहत केंद्रीय बैंक आमतौर पर कोर मुद्रास्फीति को 2.0 फीसदी के वार्षिक लक्ष्य के आसपास बनाए रखने का प्रयास करते हैं। जब मुद्रास्फीति दरें इस मानक से भटकती हैं, तो केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था को संतुलन में वापस लाने के लिए मौद्रिक नीति साधनों में बदलाव करते हैं।

ब्याज दरों का ढांचा और विदेशी मुद्रा बाजार पर असर

उपभोक्ता मूल्य रुझानों और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति का सीधा प्रभाव राष्ट्रीय मुद्रा के मूल्य पर पड़ता है। जब कोर मुद्रास्फीति लगातार तय 2.0 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक अत्यधिक मांग को नियंत्रित करने और आर्थिक गतिविधियों को संतुलित करने के लिए मानक ब्याज दरों में वृद्धि करते हैं। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति लक्ष्य से नीचे आती है, तो मौद्रिक प्राधिकरण उधार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में केंद्रीय बैंक की ऊंची ब्याज दरें घरेलू मुद्रा के आकर्षण को बढ़ाती हैं। ब्याज दरें बढ़ने पर उस मुद्रा क्षेत्र में निश्चित आय प्रतिभूतियों और जमा पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ जाता है, जिससे अधिक रिटर्न की तलाश में वैश्विक निवेशकों की पूंजी आकर्षित होती है। पूंजी का यह प्रवाह मुद्रा पर निरंतर खरीदारी का दबाव बनाता है, जिससे विदेशी मुद्रा दरों में मजबूती आती है।

दूसरी ओर, कम मुद्रास्फीति और गिरती ब्याज दरों वाला माहौल मुद्रा की मांग को घटा देता है, क्योंकि वैश्विक निवेशक बेहतर रिटर्न देने वाले बाजारों में धन स्थानांतरित करने लगते हैं। यही कारण है कि घरेलू मुद्रास्फीति की घोषणाएं दुनिया भर के मुद्रा ट्रेडर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाओं में शामिल रहती हैं।

महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों का सोने के निवेश पर प्रभाव

मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति चक्रों के दौरान वैश्विक निवेश पोर्टफोलियो में सोने की अपनी एक अनूठी भूमिका रही है। अत्यधिक आर्थिक अनिश्चितता या बाजार में भारी उथल-पुथल के समय निवेशक अक्सर भौतिक सोने में शरण लेते हैं, क्योंकि इसे लंबे समय तक क्रय शक्ति बनाए रखने वाले एक सुरक्षित संपत्ति विकल्प के रूप में देखा जाता है।

हालांकि, सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में बढ़ती मुद्रास्फीति सोने के निवेशकों के लिए विपरीत परिस्थितियां पैदा करती है। जब केंद्रीय बैंक लगातार बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो सोना जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों को अपने पास रखने की अवसर लागत (ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट) काफी बढ़ जाती है। निवेशक नकद जमा खातों या ब्याज देने वाले सरकारी बांडों में पूंजी लगाकर निश्चित आय प्राप्त कर सकते हैं, जिससे सोना तुलनात्मक रूप से कम आकर्षक हो जाता है।

इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति का दबाव कम होता है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करते हैं, तो कीमती धातुओं को रखने से जुड़ी अवसर लागत घट जाती है। कम ब्याज दरें सोने को एक अधिक प्रतिस्पर्धी निवेश विकल्प बनाती हैं, जिससे रिटेल और संस्थागत निवेशकों की ओर से खरीदारी बढ़ने की संभावना रहती है।

प्रमुख विदेशी मुद्रा जोड़ों का हाल: GBP/USD और EUR/USD में उतार-चढ़ाव

जापानी मुद्रास्फीति आंकड़ों के साथ-साथ व्यापक विदेशी मुद्रा बाजारों में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। गुरुवार के कारोबार के दौरान GBP/USD मुद्रा जोड़ी अपनी दैनिक बढ़त बनाए रखने में सफल रही, हालांकि इसने अपनी कुछ बढ़त गंवा दी और 1.3630 से 1.3620 की सीमा में कारोबार करती दिखी। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मामूली सुधार के बावजूद ब्रिटिश पाउंड में मजबूती दर्ज की गई, जबकि निवेशक शुक्रवार को यूनाइटेड किंगडम के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों के जारी होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

दूसरी ओर, EUR/USD जोड़ी ने अपनी शुरुआती पूरी बढ़त गंवा दी और 1.1700 के स्तर से नीचे आ गई। ट्रेडिंग सत्र के अंत में अमेरिकी डॉलर की वापसी ने यूरोपीय मुद्रा पर दबाव डाला, जिससे गुरुवार को उत्तर अमेरिकी सत्र की समाप्ति के बाद विनिमय दरें व्यावहारिक रूप से अपरिवर्तित रहीं। बाजार की निगाहें अब शुक्रवार को यूरोप और अमेरिका दोनों तरफ से आने वाले प्रारंभिक एसएंडपी ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई आंकड़ों पर टिकी हैं।

कीमती धातुओं में सुधार: सोना $4,500 के स्तर के पार

स्थिर होते अमेरिकी डॉलर के दबाव के बावजूद, हाजिर सोने ने मजबूती का प्रदर्शन करते हुए गुरुवार को वापसी की और प्रति ट्रॉय औंस $4,500 के महत्वपूर्ण स्तर को फिर से हासिल कर लिया। सोने में यह सुधार अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मामूली मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के बीच हुआ, जो बुधवार को यील्ड कर्व में आई गिरावट के बाद देखने को मिला है।

कीमती धातु ट्रेडर्स बढ़ती बांड यील्ड और व्यापक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच संतुलन बनाते नजर आए, जिससे सोने की कीमतें अपने प्रमुख तकनीकी समर्थन स्तरों से ऊपर बनी रहीं।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार का रुझान: इथेरियम डेरिवेटिव्स में नई तेजी

डिजिटल एसेट बाजारों में भी गुरुवार को नए सिरे से तेजी देखी गई, जिसमें इथेरियम की कीमतों में बढ़त जारी रही। प्रमुख एक्सचेंजों पर हाल ही में लीवरेज्ड पोजीशन के फ्लश होने के बाद डेरिवेटिव बाजार में पूंजी की वापसी दर्ज की गई।

आंकड़ों के अनुसार, इथेरियम के ओपन इंटरेस्ट (जो सक्रिय डेरिवेटिव अनुबंधों के कुल बकाया मूल्य को मापता है) में पिछले कुछ घंटों के दौरान 2,70,000 ETH की वृद्धि दर्ज की गई। पूंजी के इस प्रवाह ने कुल इथेरियम ओपन इंटरेस्ट को 1,32,00,000 ETH तक पहुंचा दिया, जो संस्थागत भागीदारी और सकारात्मक बाजार भावना को दर्शाता है।

अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा तरलता बायबैक विस्तार की बड़ी घोषणा

निश्चित आय बाजार के एक प्रमुख घटनाक्रम में, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जीएमटी 12:32 बजे अपने नियमित परिचालन कैलेंडर से अलग हटकर अपने तरलता सहायता बायबैक कार्यक्रम के विस्तार की घोषणा की। ट्रेजरी ने कहा कि वह दीर्घकालिक सरकारी बांड क्षेत्रों में अपने प्रस्तावित बायबैक संचालन के आकार को कम से कम दोगुना करेगा।

विशेष रूप से 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले बांडों को लक्षित करते हुए, ट्रेजरी प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन कर रहा है। तरलता बढ़ाने वाला यह संशोधित ढांचा 9 सितंबर से प्रभावी होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा, जिससे लंबी अवधि की ट्रेजरी प्रतिभूतियों को बेहतर बाजार गहराई और ढांचागत स्थिरता मिलेगी।

सवाल-जवाब

जुलाई में जापान की राष्ट्रीय उपभोक्ता महंगाई दर कितनी रही?
जुलाई में जापान की राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) दर बढ़कर 2.0 फीसदी सालाना रही, जो जून के 1.7 फीसदी से अधिक है।
ताजा भोजन को छोड़कर जापान की कोर मुद्रास्फीति कितनी दर्ज की गई?
ताजा भोजन को छोड़कर जापान की राष्ट्रीय कोर सीपीआई जुलाई में 1.8 फीसदी दर्ज की गई, जो बाजार के अनुमानों के अनुकूल है।
मुद्रास्फीति के आंकड़े आने के बाद USD/JPY मुद्रा जोड़ी का क्या हाल रहा?
डेटा जारी होने के समय USD/JPY मुद्रा जोड़ी 0.45 फीसदी चढ़कर 158.88 के स्तर पर कारोबार कर रही थी।
कोर मुद्रास्फीति का केंद्रीय बैंक के ब्याज दर निर्णयों से क्या संबंध है?
जब कोर मुद्रास्फीति 2 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर जाती है, तो केंद्रीय बैंक महंगाई नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाते हैं, जिससे घरेलू मुद्रा मजबूत होती है।
अमेरिकी ट्रेजरी ने तरलता बायबैक कार्यक्रम के लिए क्या घोषणा की?
अमेरिकी ट्रेजरी ने 10 से 30 वर्ष के दीर्घकालिक बांड क्षेत्रों में अपने तरलता बायबैक ऑपरेशन की सीमा $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन प्रति ऑपरेशन कर दी है।
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