जब भी मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा की खबरें आती हैं, वित्तीय बाजारों में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या क्रूड ऑयल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा और क्या इससे वैश्विक मुद्रास्फीति फिर से भड़क उठेगी। भू-राजनीतिक संकट के दौरान आमतौर पर एक ही कहानी दोहराई जाती है, जिसमें कच्चे तेल की कीमतें चढ़ती हैं, महंगाई बढ़ती है, केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची बनाए रखते हैं और शेयर बाजारों में गिरावट आती है। हालांकि वित्तीय इतिहास यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बाजार केवल कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण धराशायी नहीं होते, बल्कि तब टूटते हैं जब वैश्विक वित्तीय प्रणाली से लिक्विडिटी गायब हो जाती है। वर्तमान में वैश्विक लिक्विडिटी का एक बड़ा हिस्सा उस वित्तीय व्यवस्था पर टिका है जिसे जापानी येन (JPY) कैरी ट्रेड के रूप में जाना जाता है।
जापानी येन और कैरी ट्रेड का पूरा गणित
कैरी ट्रेड की अवधारणा बहुत सरल लेकिन अत्यधिक प्रभावकारी है। वैश्विक निवेशक उन देशों से बेहद कम ब्याज दरों पर उधार लेते हैं जहां मौद्रिक नीति नरम होती है, और फिर उस पैसे को उन परिसंपत्तियों या देशों में निवेश करते हैं जहां रिटर्न और यील्ड अधिक मिलती है। जापान लंबे समय से शून्य या नकारात्मक ब्याज दरों की नीति का पालन करता रहा है, जिससे जापानी येन (JPY) दुनिया का सबसे पसंदीदा फंडिंग करेंसी बन गया। इसी तरह स्विस फ्रैंक (CHF) ने भी कम ब्याज दर वाली मुद्रा के रूप में वैश्विक कैरी ट्रेड को सहारा दिया है। इन दोनों मुद्राओं में ली गई सस्ती उधारी ने दुनिया भर में जोखिम भरी परिसंपत्तियों जैसे शेयर बाजारों, उभरते बाजारों और बॉन्ड में भारी पूंजी प्रवाह को सक्षम बनाया है।
यह पूरा तंत्र तब तक सुचारू रूप से काम करता है जब तक उधारी सस्ती बनी रहती है और संबंधित फंडिंग मुद्रा कमजोर रहती है। जैसे ही उधारी की लागत बढ़ती है या फंडिंग मुद्रा मजबूत होने लगती है, इस व्यापार का लाभ खत्म होने लगता है और निवेशक अपनी पोजीशन तेजी से बंद करने लगते हैं। जब अरबों डॉलर के कैरी ट्रेड एक साथ अनवाइंड होते हैं, तो बाजारों में अचानक लिक्विडिटी का सूखा पड़ जाता है।
अगस्त 2024 की घटना और बॉन्ड यील्ड का असर
इस जोखिम का एक स्पष्ट उदाहरण अगस्त 2024 में देखा गया था, जब बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने अचानक अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने और ब्याज दरों में उम्मीद से तेज बढ़ोतरी के संकेत दिए थे। बैंक ऑफ जापान के इस कदम से येन में अचानक मजबूती आई और येन-फंडेड कैरी ट्रेड का बहुत बड़ा हिस्सा तेजी से अनवाइंड हो गया। इसका परिणाम यह हुआ कि जापान का निकेई इंडेक्स केवल एक ट्रेडिंग सेशन में लगभग 12 प्रतिशत टूट गया। इस बिकवाली की लपटें वैश्विक बाजारों तक पहुंचीं और दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता का सूचकांक अचानक बढ़ गया।
उस घटना ने वैश्विक निवेशकों को यह चेतावनी दी कि जब केंद्रीय बैंक की नीति में अप्रत्याशित बदलाव होता है, तो लीवरेज्ड पोजीशन कितनी तेजी से बिखर सकती हैं। कच्चे तेल की कीमतें निश्चित रूप से अल्पावधि में मुद्रास्फीति बढ़ा सकती हैं, लेकिन जापानी सरकारी बॉन्ड की बढ़ती हुई यील्ड पूरे लीवरेज्ड वित्तीय गणित को बदल देती है। जब जापान में 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो येन में उधारी लेना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर संपत्ति बेचने का दबाव बनता है।
बाजार पर नजर रखने के लिए चार मुख्य संकेत
वैश्विक वित्तीय प्रणाली में संभावित झटकों को पहले से समझने के लिए निवेशकों को केवल क्रूड ऑयल चार्ट देखने के बजाय कुछ महत्वपूर्ण वित्तीय संकेतकों पर ध्यान देना चाहिए। ये सूचकांक अर्ली वार्निंग सिस्टम की तरह काम करते हैं और यह दर्शाते हैं कि कैरी ट्रेड विस्तार कर रहा है या अनवाइंड हो रहा है
- जापान की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड: इसमें लगातार वृद्धि इस बात का संकेत है कि जापानी पूंजी अपने देश वापस लौट सकती है।
- बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठकें और नीतियां: ब्याज दरों में किसी भी बदलाव या नीतिगत मार्गदर्शन का सीधा असर वैश्विक लिक्विडिटी पर पड़ता है।
- USD/JPY की विनिमय दर: विशेष रूप से उन स्तरों के आसपास जहां जापान के वित्त मंत्रालय द्वारा बाजार हस्तक्षेप की संभावना बनी रहती है।
- अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक फंडिंग स्थितियों के बीच गहरा संबंध होता है, जो अक्सर एक साथ दिशा तय करते हैं।
मुद्रा बाजार, सोना और क्रिप्टो की ताजा स्थिति
व्यापक विदेशी मुद्रा (Forex) बाजारों में भी विभिन्न घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं। GBP/USD में लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज की गई और यह यूरोपीय ट्रेडिंग सेशन के दौरान 1.3350 के करीब कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी और मध्य पूर्व संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों से ब्रिटिश पाउंड को सहारा मिला है, जबकि व्यापारी अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) और बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) की आगामी नीतिगत घोषणाओं का इंतजार कर रहे हैं।
इसी तरह EUR/USD भी 1.1400 के स्तर के आसपास मजबूत बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की खबरों से डॉलर पर दबाव बना है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना (XAU/USD) 4,100 डॉलर के स्तर के आसपास मामूली बढ़त बनाए हुए है। व्यापारी इस सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक से पहले कोई बड़ा दांव लगाने से बच रहे हैं। कूटनीतिक वार्ताओं की खबर से कच्चे तेल की इंट्राडे कीमतों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार की बात करें तो कार्डानो (ADA) पर दबाव बना हुआ है और यह 0.165 डॉलर के स्तर के नीचे कारोबार कर रहा है। डेरिवेटिव्स डेटा में मंदी के संकेत और कमजोर मोमेंटम इंडिकेटर्स यह बताते हैं कि इसमें तत्काल बड़ी तेजी की संभावना सीमित है। वहीं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) भी मध्य पूर्व की अनिश्चितताओं, मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण और ब्याज दरों से जुड़ी असमंजस की स्थिति के कारण उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है।
निष्कर्ष यह है कि वित्तीय बाजारों में अगला बड़ा झटका तेल क्षेत्रों से नहीं, बल्कि बॉन्ड बाजारों से आने की अधिक संभावना है। यदि जापानी बॉन्ड यील्ड में तेजी का दौर जारी रहता है, तो वैश्विक कैरी ट्रेड की अनवाइंडिंग एक बार फिर वित्तीय संपत्तियों के मूल्यांकन पर भारी पड़ सकती है।



















