जापानी येन ने वैश्विक मुद्रा बाजार में एक असाधारण कदम उठाया है, लेकिन इसके बावजूद उसे बाजार के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने पिछले महीने अपनी नीतिगत ब्याज दर को बढ़ाकर एक प्रतिशत कर दिया, जो लगभग एक पीढ़ी में पहली बार किया गया सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव था। इसके बावजूद, USD/JPY लगातार मजबूत होते हुए कई दशकों के उच्चतम स्तर 162.00 के पार बना हुआ है। बाजार में किसी प्रकार का भ्रम नहीं है, बल्कि व्यापारी सीधे तौर पर गणितीय गणना कर रहे हैं, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वर्तमान ब्याज दर का अंतर अभी भी अमेरिकी डॉलर के पक्ष में बना हुआ है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, USD/JPY अपने पिछले बंद भाव 162.63 से मामूली गिरावट के साथ 162.53 पर कारोबार कर रहा है, जो 145.86 से 162.84 के 52-सप्ताह के दायरे के ऊपरी छोर के करीब है।
टोक्यो की चेतावनी और अनकही सीमा
जापान की मुद्रा को संभालने वाले सरकारी अधिकारियों की ओर से लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है। जैसे-जैसे डॉलर के मुकाबले येन कमजोर हो रहा है, जापानी नीति निर्माताओं के बयानों में तल्खी बढ़ती जा रही है। बाजार की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने के बयानों से लेकर अब यह कहा जाने लगा है कि किसी भी विकल्प को नकारा नहीं जा सकता। जापान की मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस (MoF) 160.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास एक अघोषित सीमा मानकर चल रही है। यह वह क्षेत्र है जहां पहले भी सरकारी हस्तक्षेप देखा गया है, लेकिन मंत्रालय सार्वजनिक रूप से उस सटीक आंकड़े का खुलासा करने से बच रहा है जिसे वह बचाना चाहता है। वित्तीय बाजार के खिलाड़ी इसी खामोशी का फायदा उठा रहे हैं और वे इसे सरकार की हिचकिचाहट के रूप में देख रहे हैं।
अगर टोक्यो बाजार में हस्तक्षेप करता है तो क्या होगा?
ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि जब भी जापान सरकार सीधे तौर पर येन की खरीदारी करती है, तो एक ही सत्र में मुद्रा की विनिमय दर में भारी उतार-चढ़ाव आता है और येन मजबूत होता है। हालांकि, यह कदम उस बुनियादी अंतर को खत्म नहीं कर सकता जो दोनों देशों के ब्याज दरों के बीच मौजूद है। इसके परिणामस्वरूप, सरकारी दखल से होने वाली येन की किसी भी अस्थायी मजबूती को कैरी ट्रेड (carry trade) करने वाले निवेशक खरीदारी के एक नए और सस्ते अवसर के रूप में देख सकते हैं। हस्तक्षेप के कारण होने वाली गिरावट वास्तव में उन व्यापारिक स्थितियों को और बढ़ावा दे सकती है जिन्हें रोकने के लिए यह कदम उठाया गया था।
USD/JPY का तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण स्तर
वर्तमान तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, जापानी येन और डॉलर की जोड़ी में मजबूती का रुख बना हुआ है।
- प्रतिरोध स्तर (Resistance Levels): 163.00 का मनोवैज्ञानिक स्तर तात्कालिक बाधा बना हुआ है। यदि तेजी जारी रहती है, तो अगला पड़ाव 164.00 के स्तर पर होगा। राउंड-नंबर प्रतिरोध स्तर हस्तक्षेप के जोखिम को भी बढ़ाते हैं, क्योंकि विनिमय दर जितनी ऊपर जाएगी, टोक्यो के हस्तक्षेप करने की संभावना उतनी ही मजबूत होगी।
- समर्थन स्तर (Support Levels): 160.00 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण है, जो मनोवैज्ञानिक समर्थन और मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस की रक्षात्मक रेखा दोनों का काम करता है। यहीं पर 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA50) भी 160.06 पर मौजूद है। यदि बाजार इसके नीचे बंद होता है, तो यह माना जाएगा कि सरकारी हस्तक्षेप सफल रहा है या नीतिगत कहानी बदल गई है। इसके नीचे का अगला प्रमुख स्तर 158.50 पर है।
- तकनीकी संकेतक (Technical Indicators): वर्तमान में रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI(14) 78 पर है, जो दर्शाता है कि यह जोड़ी ओवरबॉट (अत्यधिक खरीदी गई) स्थिति में है। स्टोकेस्टिक आरएसआई (Stoch RSI) में भी ओवरबॉट संकेत मिल रहे हैं, जहां फास्ट लाइन 90 और सिग्नल लाइन 85 पर है। एमएसीडी (MACD) 0.79 पर है जो सिग्नल लाइन 0.68 से ऊपर है, जो एक मजबूत तेजी का संकेत है। इचिमोकु क्लाउड और सुपरट्रेंड (जो 161.0069 पर है) दोनों ही तेजी के रुख की पुष्टि कर रहे हैं।
जापानी येन के बुनियादी सिद्धांत और इतिहास
जापानी येन दुनिया की सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्राओं में से एक है। इसका मूल्य मुख्य रूप से जापान की आर्थिक स्थिति, बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति, जापान और अमेरिका के सरकारी बॉन्ड यील्ड (yield) के बीच के अंतर और वैश्विक निवेशकों की जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है। बैंक ऑफ जापान का एक मुख्य काम अपनी राष्ट्रीय मुद्रा के मूल्य को नियंत्रित रखना भी है। अतीत में, BoJ ने अक्सर येन के मूल्य को कम रखने के लिए बाजार में सीधे हस्तक्षेप किया है, हालांकि अपने व्यापारिक भागीदारों के राजनीतिक विरोध के डर से वह ऐसा बहुत बार नहीं करता है। वर्ष 2013 से 2024 के बीच बैंक ऑफ जापान की अत्यधिक उदार मौद्रिक नीति के कारण अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में येन के मूल्य में बड़ी गिरावट देखी गई थी। हालांकि, इस नीति को धीरे-धीरे समाप्त करने के हालिया फैसले से येन को कुछ सहारा मिला है।
सुरक्षित निवेश के रूप में येन और अमेरिकी बॉन्ड का प्रभाव
पिछले एक दशक में, बैंक ऑफ जापान की बेहद ढीली मौद्रिक नीति और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों के बीच का अंतर बढ़ता गया। इसके कारण 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड और जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) के यील्ड में बड़ा अंतर पैदा हो गया, जिसने अमेरिकी डॉलर को जापानी मुद्रा के मुकाबले मजबूत बनाया। वर्ष 2024 में जापान द्वारा इस ढीली नीति को छोड़ने की शुरुआत और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती से यह अंतर कुछ कम हो रहा है। इसके अलावा, जापानी येन को वैश्विक स्तर पर एक सुरक्षित निवेश (safe-haven) माना जाता है। इसका मतलब यह है कि जब भी वैश्विक बाजार में आर्थिक या राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक स्थिरता के लिए अपनी पूंजी जापानी येन में लगाना पसंद करते हैं। ऐसे तनावपूर्ण समय में येन की वैल्यू अन्य जोखिम भरी मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो जाती है।
ब्रिटिश पाउंड, यूरो और सोने के बाजार की स्थिति
मुद्रा बाजार के अन्य कोनों में भी बड़ी हलचल देखी जा रही है। ब्रिटिश पाउंड और यूएस डॉलर (GBP/USD) की जोड़ी बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान नए दबाव में आ गई और यह 1.3275 के दो सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर 1.3235 के करीब आ गई, जो दिन के दौरान 0.20% की गिरावट दर्शाती है। बाजार की नजर बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली और फेडरल रिजर्व के नवनियुक्त नीति निर्माता केविन वॉर्श के भाषणों पर टिकी है। वहीं, EUR/USD की जोड़ी भी लगातार गिरावट का सामना कर रही है और यह उत्तरी अमेरिकी सत्र के उत्तरार्ध में 1.1400 के स्तर से नीचे आ गई है। यूरो में यह कमजोरी अमेरिकी डॉलर में आ रही मजबूती के कारण है, जिसे ईसीबी फोरम (ECB Forum) में केविन वॉर्श के सतर्क बयानों से समर्थन मिला है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चमक बरकरार है। सोना बुधवार को भी तेजी के साथ कारोबार कर रहा है और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,100 डॉलर के स्तर को पार कर चुका है, हालांकि मजबूत डॉलर और बढ़ते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कारण ऊपरी स्तरों पर कुछ मुनाफावसूली देखी गई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग मजबूत बनी हुई है।
केंद्रीय बैंकों की स्वायत्तता का संकट
हाल के दिनों में केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता को लेकर काफी बहस हुई है, विशेषकर अमेरिका में जहां डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें घटाने का दबाव बनाने की चर्चाएं आम रही हैं। लेकिन अब प्रशांत महासागर के दूसरी ओर भी ऐसी ही एक कहानी शुरू होती दिख रही है। जापान की सरकार द्वारा बैंक ऑफ जापान की स्वतंत्रता और उसकी मौद्रिक नीतिगत फैसलों की स्वायत्तता की परीक्षा ली जा रही है, जो आने वाले समय में वैश्विक बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।













