अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में न्यू ज़ीलैंड डॉलर ने अपनी तेजी की रफ्तार को लगातार तीसरे दिन बनाए रखा है। शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान NZD/USD मुद्रा जोड़ी मजबूत बढ़त दर्ज करते हुए 0.5965 से 0.5970 के दायरे में पहुंच गई, जो जून के शुरुआती दिनों के बाद का इसका सबसे उच्चतम स्तर है। इस सप्ताह इस मुद्रा जोड़ी में शानदार बढ़त देखने को मिली है, जिसे दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के भिन्न नीतिगत रुख और वैश्विक आर्थिक संकेतकों का सीधा सहारा मिला है।
केंद्रीय बैंकों के रुख और ब्याज दरों की स्थिति
न्यू ज़ीलैंड डॉलर में आई इस हालिया तेजी के पीछे प्रमुख कारण रिजर्व बैंक ऑफ न्यू ज़ीलैंड (RBNZ) द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने की प्रबल संभावना है। इसके विपरीत, अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कमजोर पड़ी हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, बुधवार को जारी हुए FOMC के मिनट्स में यह संकेत भी दिया गया था कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक के पास मौद्रिक नीति को और कड़ा करने के विकल्प खुले हुए हैं, जिसके कारण डॉलर निचले स्तरों पर कुछ हद तक संभलने में सक्षम रहा है।
मध्य पूर्व तनाव और भू-राजनीतिक जोखिम
वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल से मुद्रास्फीति बढ़ने की चिंताएं गहराई हुई हैं। मध्य पूर्व में बने संकट और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका तथा ईरान के बीच बने गतिरोध ने वित्तीय बाजारों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की तरफ से ईरान के खिलाफ सख्त आर्थिक कार्रवाई की जाएगी और तेहरान पर लगे प्रतिबंधों को तोड़ने या व्यापार करने वाले किसी भी देश पर कड़े जुर्माने लगाए जाएंगे। वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव ही सबसे असरदार जरिया है। इन बयानों की वजह से सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली अमेरिकी मुद्रा को कुछ हद तक सहारा मिल रहा है।
न्यू ज़ीलैंड का व्यापार संतुलन और अमेरिकी आंकड़े
न्यू ज़ीलैंड के घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई के महीने में देश का व्यापार घाटा NZ$1.95 अरब रहा। हालांकि, इस व्यापार घाटे का मुद्रा दर पर कोई खास प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि वर्तमान में NZD/USD की चाल मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर की वैश्विक हलचलों से संचालित हो रही है। अब बाजार के कारोबारियों की नजर अमेरिका के आगामी फ्लैश PMI आंकड़ों पर टिकी है, जो अल्पकालिक ट्रेडिंग के नए अवसर तय करेंगे।
जीबीपी, यूरो और सोने के बाजार का हाल
अन्य प्रमुख मुद्राओं की बात करें तो GBP/USD जोड़ी गुरुवार को संभलकर 1.3630 से 1.3620 के दायरे में कारोबार करती दिखी। उधर EUR/USD जोड़ी में शुरुआती तेजी के बाद गिरावट आई और यह 1.1700 के स्तर से नीचे खिसक गई। दूसरी ओर, सर्राफा बाजार में सोना $4,500 प्रति औंस के पार मजबूत बना हुआ है और लगातार तीसरे हफ्ते बढ़त दर्ज करने की ओर अग्रसर है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और तेल संकट के बावजूद फेड द्वारा दरें न बढ़ाने की संभावना से सोने की कीमतों को समर्थन मिल रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी का तरलता सहायता कार्यक्रम
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए बुधवार को 12:32 GMT पर तरलता सहायता बायबैक परिचालन को दोगुना करने का ऐलान किया है। इसके तहत 10 साल से 20 साल और 20 साल से 30 साल की अवधि वाले बॉन्ड के लिए अधिकतम परिचालन सीमा $2 अरब से बढ़ाकर कम से कम $4 अरब प्रति ऑपरेशन कर दी गई है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक जारी रहेगी, जिसका सीधा असर अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर देखने को मिलेगा।



















