सोमवार को एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, जहां वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत 7 प्रतिशत से अधिक टूटकर $82.50 प्रति बैरल के आसपास आ गई। लगातार दो हफ़्तों तक चले सीधे सैन्य टकराव के बाद अमेरिका और ईरान द्वारा सप्ताहांत में हमलों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया गया। इस सैन्य विराम के बाद वित्तीय बाजारों में कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जगी है, जिससे मध्य पूर्व में जारी तनाव कम होने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही दोबारा सुरक्षित रूप से शुरू होने की संभावना बनी है।
सैन्य भंडार की कमी और कूटनीतिक गुंजाइश
अमेरिकी प्रशासन द्वारा अपने सैन्य अभियान को रोकने के पीछे इंटरसेप्टर मिसाइलों की घटती आपूर्ति और ईरान के भीतर उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों की सीमित संख्या मुख्य वजह रही। जॉइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सचेत किया था कि हमलों को जारी रखने से महत्वपूर्ण युद्धक हथियारों के भंडार पर गंभीर दबाव पड़ेगा।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज़ ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी बल पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संभावित कूटनीतिक वार्ताओं के लिए अवसर तैयार करना चाहते हैं। इसी बीच ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपनी नीति दोहराते हुए कहा कि तेहरान का रुख हमले के बदले हमला का है, यानी अगर अमेरिकी हमले रुकते हैं तो ईरान भी अपनी सैन्य कार्रवाइयों को स्थगित रखेगा। यह घटनाक्रम पिछले पांच महीनों से जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष में एक नया मोड़ माना जा रहा है।
लाल सागर में हुथी हमले और आपूर्ति संबंधी चिंताएं
सैन्य विराम के बावजूद बाजार के निवेशक और कारोबारी तेल आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को लेकर सतर्क हैं। यमन में ईरान समर्थित हुथी विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के किनारे स्थित सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर किए गए हालिया हमलों से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, जिससे ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है।
WTI क्रूड ऑयल क्या है और बाजार में इसका महत्व
वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट या WTI अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाने वाला एक प्रमुख कच्चा तेल है। यह वैश्विक तेल बाजार के तीन मुख्य प्रकारों में शामिल है, जिनमें ब्रेंट और दुबई क्रूड भी शामिल हैं। WTI को इसकी कम सघनता और कम सल्फर मात्रा के कारण हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है। इन विशेषताओं की वजह से इसे रिफाइन करना बेहद आसान होता है और इसे उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है।
यह कच्चा तेल मुख्य रूप से अमेरिका से निकाला जाता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से होता है, जिसे दुनिया का पाइपलाइन चौराहा भी कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वित्तीय बाजारों में WTI की कीमतों को एक प्रमुख मानक के रूप में उद्धृत किया जाता है।
कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
किसी भी अन्य संपत्ति की तरह WTI कच्चे तेल की कीमत भी मांग और आपूर्ति के सिद्धांतों से तय होती है। मजबूत वैश्विक आर्थिक विकास से तेल की मांग बढ़ती है, जबकि कमजोर आर्थिक वृद्धि मांग को घटाती है। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध आपूर्ति को बाधित करके कीमतों पर असर डालते हैं।
तेल उत्पादक देशों का संगठन ओपेक भी कीमतों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। चूंकि कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की विनिमय दर का WTI पर सीधा प्रभाव पड़ता है। कमजोर डॉलर विदेशी खरीदारों के लिए तेल को सस्ता बनाता है, जबकि मजबूत डॉलर से तेल महंगा हो जाता है।
साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट: API और EIA का असर
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) और एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक तेल सूची रिपोर्टों का WTI की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। ये रिपोर्टें आपूर्ति और मांग के बदलते रुझानों को दर्शाती हैं। यदि डेटा में कच्चे तेल के स्टॉक में गिरावट दिखती है, तो यह बढ़ती मांग का संकेत देता है जिससे कीमतें ऊपर जाती हैं। इसके विपरीत इन्वेंट्री में बढ़ोतरी आपूर्ति की अधिकता को दर्शाती है, जिससे कीमतें नीचे गिरती हैं।
API अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को प्रकाशित करता है, जबकि सरकारी एजेंसी EIA अगले दिन अपनी रिपोर्ट जारी करती है। सरकारी संस्था होने के कारण EIA के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय माना जाता है। लगभग 75 प्रतिशत मामलों में दोनों एजेंसियों के निष्कर्षों के बीच अंतर 1 प्रतिशत से भी कम रहता है।
ओपेक और ओपेक प्लस की बाजार में भूमिका
ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का एक संगठन है, जो साल में दो बार बैठक करके सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करता है। जब ओपेक उत्पादन कोटा में कटौती का निर्णय लेता है, तो बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है जिससे तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं। उत्पादन बढ़ाने पर इसका उल्टा असर होता है। ओपेक प्लस में 10 अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें रूस सबसे प्रमुख है।
विदेशी मुद्रा, सोना और क्रिप्टो बाजार पर असर
कच्चे तेल में गिरावट और कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों का असर अन्य वित्तीय संपत्तियों पर भी देखा गया। अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी के कारण GBP/USD जोड़ी में लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज की गई और एशियाई सत्र के दौरान यह 1.3300 के मध्य स्तर से ऊपर निकल गई। इसी तरह EUR/USD जोड़ी में भी बढ़त देखी गई और यह 1.1400 के स्तर को पार कर गई।
सोने की कीमतों में शुरुआती तेजी बनी रही और यह सोमवार को $4,100 के पास कारोबार करता दिखा। हालांकि कारोबारी इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं। दूसरी ओर क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कार्डानो (ADA) पर दबाव बना रहा और यह $0.165 पर कारोबार करता दिखा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मध्य पूर्व तनाव के कारण मुद्रास्फीति और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।



















